भारत-नॉर्वे ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप मजबूत करने पर चर्चा, EFTA व्यापार और मत्स्य पालन सहयोग भी एजेंडे में
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में नॉर्वे के विदेश मंत्रालय की राज्य सचिव एस्ट्रिड बर्गमाल से मुलाकात की, जिसमें भारत-नॉर्वे ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और सुदृढ़ करने, भारत-EFTA व्यापार एवं निवेश संबंधों को प्रगाढ़ बनाने तथा मत्स्य पालन और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह द्विपक्षीय बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंध नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं।
बैठक में क्या हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया, 'सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने नई दिल्ली में नॉर्वे के विदेश मंत्रालय की राज्य सचिव एस्ट्रिड बर्गमाल से मुलाकात की।' मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय सहयोग और आपसी हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
गौरतलब है कि इस बातचीत में भारत-EFTA (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) के अंतर्गत व्यापार और निवेश संबंधों को विस्तार देने को विशेष प्राथमिकता दी गई। नॉर्वे EFTA का एक प्रमुख सदस्य है और भारत के साथ उसके आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़े हैं।
राजदूत की पहले की टिप्पणियाँ
पिछले महीने भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने दोनों देशों के बीच संबंधों की सराहना करते हुए कहा था कि यह साझेदारी 'दिन-ब-दिन बढ़ रही है और मजबूत हो रही है।' उन्होंने कहा, 'जिन व्यावसायिक संबंधों के बारे में मैं पहले ही बात कर चुकी हूँ, वे मजबूत हो रहे हैं। हमारे देशों के बीच आर्थिक संबंध बढ़ रहे हैं, और इसे देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।'
राजदूत स्टेनर ने इस साझेदारी के मूल्य-आधारित स्वरूप पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार, 'यह साझेदारी मूल्यों पर भी आधारित है। हम सभी लोकतांत्रिक देश हैं। हम सभी नियम-आधारित विश्व व्यवस्था में विश्वास करते हैं और एक ऐसी दुनिया में — जो लंबे समय से अब अधिक अनिश्चित हो गई है — इन मुद्दों पर भारत के साथ काम करके खुश हैं।'
नॉर्डिक-भारत शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि
इस वर्ष की शुरुआत में ओस्लो में आयोजित नॉर्डिक-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे के बीच हुई मुलाकात ने इस साझेदारी को नई दिशा दी थी। राजदूत स्टेनर ने उस बैठक को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया था।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में एक सक्रिय भागीदार के रूप में उभर रहा है, और नॉर्वे — जो नवीकरणीय ऊर्जा एवं समुद्री प्रौद्योगिकी में अग्रणी है — भारत के लिए एक रणनीतिक साझेदार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आम जनता और उद्योग पर असर
भारत-EFTA व्यापार संबंधों के विस्तार से भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाज़ारों तक बेहतर पहुँच मिल सकती है। मत्स्य पालन क्षेत्र में नॉर्वे की विशेषज्ञता भारत के तटीय समुदायों के लिए नई प्रौद्योगिकी और टिकाऊ मछली पालन के तरीके लेकर आ सकती है। आर्कटिक सहयोग वैज्ञानिक अनुसंधान और जलवायु अध्ययन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएँ खोलता है।
क्या होगा आगे
6 अक्टूबर की इस बैठक के बाद दोनों पक्षों से आगे की औपचारिक वार्ता और कार्यकारी समूहों की बैठकें अपेक्षित हैं। भारत-EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के क्रियान्वयन को और गति देने पर ध्यान केंद्रित रहने की संभावना है। ग्रीन पार्टनरशिप के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में ठोस परियोजनाओं की घोषणा निकट भविष्य में हो सकती है।