पीयूष गोयल और डेनमार्क मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड की बैठक, व्यापार-निवेश व ग्रीन एनर्जी सहयोग पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में डेनमार्क के व्यापार और प्रतिस्पर्धा मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मज़बूत करने के रास्तों पर विस्तृत चर्चा हुई। वर्तमान में भारत में 250 से अधिक डेनिश कंपनियाँ सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।
बैठक का संदर्भ और मुख्य बिंदु
भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि भारत में पहले से ही 250 से अधिक डेनिश कंपनियाँ काम कर रही हैं और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे रही हैं। राजदूत के अनुसार, बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मज़बूत करने के तरीकों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग
इसी दिन भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 के दौरान मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी से भी मुलाकात की। जोशी ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस बैठक में ऑफशोर विंड एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण जैसे क्षेत्रों में भारत-डेनमार्क सहयोग को विस्तार देने पर विचार किया गया।
जोशी ने भारत के तेज़ी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक निवेश अवसरों को रेखांकित करते हुए डेनमार्क की कंपनियों को तकनीकी साझेदारी, संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) और स्थानीय विनिर्माण के ज़रिये अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों ने भारत-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
मुंबई दौरा और समुद्री सहयोग
इन बैठकों से पहले सोमवार, 2 नवंबर को डेनमार्क के मंत्री लिडेगार्ड ने मुंबई का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने समुद्री मामलों, हरित शिपिंग, प्रौद्योगिकी, व्यापार और निवेश से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डेनमार्क और महाराष्ट्र लगभग समान आकार की अर्थव्यवस्थाएँ हैं और दोनों के पास एक-दूसरे को देने के लिए पर्याप्त अवसर हैं।
भारत-डेनमार्क संबंधों का व्यापक परिदृश्य
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ग्रीन एनर्जी क्षमता को तेज़ी से विस्तार दे रहा है और यूरोपीय देशों के साथ हरित प्रौद्योगिकी में साझेदारी तलाश रहा है। डेनमार्क, विश्व में पवन ऊर्जा प्रौद्योगिकी में अग्रणी देशों में गिना जाता है, और भारत के 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को देखते हुए यह भागीदारी रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। आगामी दिनों में दोनों देशों के बीच ठोस व्यापार एवं ऊर्जा समझौतों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।