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भारत-नॉर्वे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत: राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने संयुक्त सचिव अपर्णा रे से की बैठक

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भारत-नॉर्वे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत: राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने संयुक्त सचिव अपर्णा रे से की बैठक

सारांश

ओस्लो में 'ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' की घोषणा के बाद नई दिल्ली में नॉर्वे की राजदूत और विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव की बैठक ने संकेत दिया है कि भारत-नॉर्वे संबंध अब स्वच्छ ऊर्जा, ब्लू इकोनॉमी और इंडो-पैसिफिक सहयोग की धुरी पर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्य बातें

15 जून 2026 को नई दिल्ली में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर और विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव अपर्णा रे के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर बैठक हुई।
पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संबंधों को 'ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र: स्वच्छ ऊर्जा, ब्लू इकोनॉमी, ग्रीन शिपिंग, नवाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास।
नॉर्वे इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में शामिल हुआ — मोदी ने इसे सकारात्मक कदम बताया।
नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम ने मोदी को 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' — उनका 32वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान — प्रदान किया।

भारत और नॉर्वे के बीच कूटनीतिक सहयोग को नई गति मिली है। नई दिल्ली में 15 जून 2026 को भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने विदेश मंत्रालय में नीति नियोजन एवं अनुसंधान की संयुक्त सचिव अपर्णा रे से मुलाकात की। इस बैठक में बदलती वैश्विक प्राथमिकताओं और भारत-नॉर्वे के बहुआयामी संबंधों को और सुदृढ़ बनाने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में क्या हुई चर्चा

राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा, "संयुक्त सचिव (नीति नियोजन और अनुसंधान) अपर्णा रे से मिलकर खुशी हुई। हमने दुनिया में बदलती प्राथमिकताओं और भारत-नॉर्वे के बहुआयामी संबंधों को और मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की। मैं हमारे करीबी सहयोग को आगे भी जारी रखने के लिए उत्सुक हूं।" यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क पिछले कुछ हफ्तों में काफी बढ़ा है।

मोदी की नॉर्वे यात्रा और 'ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप'

गौरतलब है कि पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर नॉर्वे गए थे, जहाँ उन्होंने इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया और कई द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गहर स्टोर से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने भारत-नॉर्वे संबंधों को 'ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' का दर्जा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, "ओस्लो में प्रधानमंत्री जोनस गहर स्टोर के साथ मेरी बातचीत बहुत सकारात्मक रही। हमारी बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हमारे द्विपक्षीय संबंधों को 'ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' तक बढ़ाना रहा। इससे स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ विकास, ब्लू इकोनॉमी, ग्रीन शिपिंग और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा।"

व्यापार, शोध और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री स्टोर ने ओस्लो सिटी हॉल में आयोजित बिजनेस और रिसर्च समिट में भी संयुक्त रूप से भाग लिया। इस अवसर पर मोदी ने भारत में जारी आर्थिक सुधारों की जानकारी दी और नॉर्वे को भारत की स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन, ऊर्जा और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

मोदी ने एक्स पर लिखा, "हमारे दोनों देश खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग कर सकते हैं। जहाज निर्माण का क्षेत्र भी असीम संभावनाएं रखता है।" इसके अतिरिक्त नवाचार, शोध, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में भी संबंध गहरे करने पर सहमति बनी।

मोदी को नॉर्वे का सर्वोच्च सम्मान

इस यात्रा के दौरान नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम ने ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मान 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' से नवाज़ा। यह उन्हें मिला 32वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान था, जो भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

नई दिल्ली में हुई यह बैठक ओस्लो शिखर वार्ता के बाद की कूटनीतिक अनुवर्ती कार्रवाई का हिस्सा मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच 'ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' के तहत स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक सहयोग के क्षेत्र में ठोस परियोजनाओं की रूपरेखा आने वाले महीनों में सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। हालाँकि, असली कसौटी यह होगी कि स्वच्छ ऊर्जा निवेश के ठोस समझौते कितनी जल्दी ज़मीन पर उतरते हैं — ऐसी साझेदारियाँ अक्सर घोषणाओं के बाद क्रियान्वयन की धीमी गति से कमज़ोर पड़ जाती हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-नॉर्वे 'ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' क्या है?
यह भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंधों को दिया गया एक नया दर्जा है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी की ओस्लो यात्रा के दौरान हुई। इसके तहत स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ विकास, ब्लू इकोनॉमी और ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।
15 जून 2026 की बैठक में क्या हुआ?
नई दिल्ली में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर और विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव अपर्णा रे के बीच बैठक हुई, जिसमें बदलती वैश्विक प्राथमिकताओं और भारत-नॉर्वे के बहुआयामी संबंधों को मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई। यह बैठक ओस्लो शिखर वार्ता की अनुवर्ती कूटनीतिक कार्रवाई का हिस्सा मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे यात्रा की मुख्य उपलब्धियाँ क्या रहीं?
मोदी की नॉर्वे यात्रा में 'ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' की घोषणा, इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भागीदारी और बिजनेस व रिसर्च समिट में नॉर्वे को स्वच्छ ऊर्जा निवेश का निमंत्रण प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं। इसके अलावा नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा।
नॉर्वे के इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में शामिल होने का क्या महत्व है?
नॉर्वे का इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में शामिल होना भारत की इस क्षेत्रीय रणनीति को यूरोपीय समर्थन मिलने का संकेत है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे सकारात्मक कदम बताया, जो दोनों देशों के बीच समुद्री और भू-राजनीतिक सहयोग की नई संभावनाएं खोलता है।
मोदी को नॉर्वे में कौन-सा सम्मान मिला?
नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम ने ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी को 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' से सम्मानित किया। यह उन्हें मिला 32वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान था।
राष्ट्र प्रेस
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