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मोदी की नॉर्वे यात्रा के बाद भारत-नॉर्वे ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप हुई मज़बूत: राजदूत मे-एलिन स्टेनर

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मोदी की नॉर्वे यात्रा के बाद भारत-नॉर्वे ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप हुई मज़बूत: राजदूत मे-एलिन स्टेनर

सारांश

43 वर्षों में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री के नॉर्वे दौरे ने द्विपक्षीय संबंधों को नई परिभाषा दी है। नॉर्वे राजदूत मे-एलिन स्टेनर के अनुसार, ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी और सर्कुलर इकोनॉमी पर केंद्रित ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप अब और मज़बूत आधार पर खड़ी है।

मुख्य बातें

नॉर्वे राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने 23 जून 2025 को नई दिल्ली में भारत-नॉर्वे संबंधों में प्रगति की सराहना की।
PM नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली ऐसी यात्रा थी।
यात्रा के बाद ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप — जिसमें ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी, ग्रीन मैरीटाइम और सर्कुलर इकोनॉमी शामिल हैं — और सुदृढ़ हुई।
नॉर्वे की कंपनी यारा इंटरनेशनल 15 वर्षों से भारत में सक्रिय है; नॉर्वे सरकार इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदार है।
यारा इंडिया सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट 2025 लॉन्च के अवसर पर राजदूत ने सतत कृषि में कंपनी के योगदान को रेखांकित किया।

भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने 23 जून 2025 को नई दिल्ली में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा दी है और ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और अधिक सुदृढ़ किया है। यह बयान नई दिल्ली में आयोजित यारा इंडिया सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट 2025 के लॉन्च कार्यक्रम के दौरान दिया गया।

43 वर्षों में पहली भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे यात्रा

राजदूत स्टेनर ने कहा, "दोनों देशों के बीच संबंध अत्यंत मज़बूत और सकारात्मक हैं, और हाल के वर्षों में इनमें और अधिक प्रगति हुई है। विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा से इसमें सकारात्मक बदलाव आया।" उन्होंने रेखांकित किया कि यह पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा थी, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की।

ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: मुख्य स्तंभ

स्टेनर ने बताया कि इस यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप और अधिक प्रगाढ़ हुई है। उनके अनुसार यह साझेदारी ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी, ग्रीन मैरीटाइम स्पेस और सर्कुलर इकोनॉमी — यानी चक्रीय अर्थव्यवस्था — पर पहले से चल रहे सहयोग को और मज़बूत आधार दे रही है। सर्कुलर इकोनॉमी वह प्रणाली है जिसका उद्देश्य संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करना और कचरे को न्यूनतम करना है।

यारा इंटरनेशनल और सतत कृषि में योगदान

यह कार्यक्रम नॉर्वे की प्रमुख कंपनी यारा इंटरनेशनल की सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट के लॉन्च का अवसर था। राजदूत ने बताया कि यारा पिछले 15 वर्षों से भारत में सक्रिय है और इसमें नॉर्वे सरकार की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि कंपनी के उर्वरक और तकनीकी समाधान सतत कृषि और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी कृषि-क्षेत्र में उत्सर्जन कटौती और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं पर काम कर रहा है। नॉर्वे जैसे देश के साथ तकनीकी साझेदारी इस दिशा में कूटनीतिक और व्यावहारिक दोनों दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।

आगे की राह

राजदूत स्टेनर ने यारा को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि इस तरह की पहल कृषि क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में अहम भूमिका निभाती हैं। भारत-नॉर्वे ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत आने वाले वर्षों में हरित ऊर्जा और समुद्री क्षेत्र में और अधिक सहयोग की संभावनाएँ तलाशी जाएंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

साझेदारी की वास्तविक परीक्षा इस बात में होगी कि ग्रीन एनर्जी और ब्लू इकॉनमी के लक्ष्य ठोस परियोजनाओं और निवेश में कितनी तेज़ी से तब्दील होते हैं — घोषणाओं से आगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-नॉर्वे ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप क्या है?
यह भारत और नॉर्वे के बीच एक द्विपक्षीय सहयोग ढाँचा है जो ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी, ग्रीन मैरीटाइम स्पेस और सर्कुलर इकोनॉमी पर केंद्रित है। PM मोदी की नॉर्वे यात्रा के बाद यह साझेदारी और मज़बूत हुई है।
PM मोदी की नॉर्वे यात्रा क्यों ऐतिहासिक मानी जा रही है?
यह पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा थी। नॉर्वे राजदूत मे-एलिन स्टेनर के अनुसार, इस दौरे ने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति और दिशा दी है।
यारा इंटरनेशनल का भारत में क्या योगदान है?
यारा इंटरनेशनल एक नॉर्वेजियन कंपनी है जो पिछले 15 वर्षों से भारत में सक्रिय है और नॉर्वे सरकार इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदार है। कंपनी उर्वरक और तकनीकी समाधानों के ज़रिए भारत में सतत कृषि और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रही है।
सर्कुलर इकोनॉमी से क्या तात्पर्य है और इसका भारत-नॉर्वे सहयोग से क्या संबंध है?
सर्कुलर इकोनॉमी यानी चक्रीय अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जिसका उद्देश्य संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करना और कचरे को न्यूनतम करना है। भारत-नॉर्वे ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत यह क्षेत्र दोनों देशों के सहयोग के प्रमुख स्तंभों में से एक है।
भारत-नॉर्वे हरित सहयोग आगे किन क्षेत्रों में बढ़ेगा?
ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत ग्रीन एनर्जी, समुद्री क्षेत्र और सतत कृषि में सहयोग विस्तार की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं। यारा जैसी कंपनियों की उपस्थिति इस सहयोग को व्यावसायिक धरातल पर भी मज़बूत कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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