अनिरुद्ध थापा का ऐतिहासिक गोल, फिर भी उरुग्वे ने भारत को 6-1 से रौंदा — इंटरनेशनल विंडो का अंत
सारांश
मुख्य बातें
अनिरुद्ध थापा ने 6 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में दो बार की फीफा विश्व कप विजेता उरुग्वे के खिलाफ गोल दागकर इतिहास रचा, लेकिन भारतीय सीनियर पुरुष फुटबॉल टीम अंततः 1-6 के बड़े अंतर से हार गई। 37,307 दर्शकों की मौजूदगी में खेले गए इस मैच के साथ भारत की इंटरनेशनल विंडो का समापन हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
डार्विन नुनेज ने 12वें मिनट में पेनाल्टी स्पॉट से उरुग्वे को बढ़त दिलाई — रेफरी रुस्तम लुतफुलिन ने प्रमवीर द्वारा फेडरिको विन्यास पर पेनाल्टी एरिया के भीतर स्लाइडिंग टैकल के बाद यह निर्णय दिया। थापा ने 22वें मिनट में शानदार वापसी की — रयान विलियम्स के शॉट को गोलकीपर थियागो कार्डोजो ने रोका, और थापा ने रिबाउंड पर तेज़ी से प्रतिक्रिया देते हुए गोल कर दिया, जिससे स्टेडियम में जश्न का माहौल बन गया।
27वें मिनट में बिजली कड़कने के कारण खेल लगभग आधे घंटे के लिए रोकना पड़ा। इस अनिवार्य विराम के बाद जब खेल फिर से शुरू हुआ, तो उरुग्वे ने लय पूरी तरह अपने हाथ में ले ली। मैक्सिमिलियानो अराउजो ने 29वें और 59वें मिनट में दो गोल दागे, जबकि रोड्रिगो जलाजार (53वाँ मिनट), जेएम सनाब्रिया (71वाँ मिनट) और रोड्रिगो एगुइरे (87वाँ मिनट) ने उरुग्वे की जीत को निर्णायक बनाया।
थापा का ऐतिहासिक पल
थापा का यह गोल केवल स्कोरकार्ड पर एक अंक नहीं था — यह भारतीय फुटबॉल के इतिहास में दर्ज हो गया। वह सीनियर इंटरनेशनल मैच में उरुग्वे के विरुद्ध गोल करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने। उनसे पहले मानस भट्टाचार्य ने 1982 के नेहरू कप में ईडन गार्डन्स पर भारत की 3-1 की हार के दौरान यह उपलब्धि हासिल की थी — यानी यह रिकॉर्ड 44 वर्षों बाद टूटा।
गोल के बाद थापा ने पलटकर उन दर्शकों की ओर देखा जो जोश से चिल्ला रहे थे। गौरतलब है कि बराबरी के उस क्षण में 'ब्लू टाइगर्स' ने दो बार की विश्व चैंपियन टीम को वास्तविक प्रतिस्पर्धा दी।
दूसरे हाफ में उरुग्वे का दबदबा
हाफ-टाइम तक भारत 1-2 से पीछे था और कोच खालिद जमील ने प्रमवीर और एडमंड लालरिंडिका की जगह बिजॉय वर्गीज और सहल अब्दुल समद को उतारा। लेकिन दूसरे हाफ में उरुग्वे के सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी — लुकास टोरेइरा, फाकुंदो पेलिस्ट्री और सनाब्रिया — और भी प्रभावशाली साबित हुए। भारत के लिए लालेंगमाविया (62वाँ मिनट) और मोहम्मद सनन (70वाँ मिनट) के शॉट करीब आए, लेकिन कार्डोजो ने उन्हें रोका।
गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने कई मौकों पर शानदार बचाव किए — खासतौर पर 37वें मिनट में नुनेज के 'चिप' शॉट को अपने चेहरे से रोककर उन्होंने स्कोर और नहीं बढ़ने दिया।
इंटरनेशनल विंडो का संतुलन
इस मैच के साथ भारत ने तीन मैचों की इंटरनेशनल विंडो का समापन किया। इस दौरान उन्होंने पनामा के साथ 1-1 से ड्रॉ खेला, ब्राजील से हारे और अब उरुग्वे से 1-6 से हार का सामना किया। 2026 विश्व कप में भाग लेने वाली इन तीन टीमों के विरुद्ध भारत ने 2 गोल किए और 11 गोल खाए — यह आँकड़ा रैंकिंग की विशाल खाई को उजागर करता है, लेकिन यह अनुभव भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।
आगे की राह
विश्व की शीर्ष टीमों के खिलाफ इन मुकाबलों से भारतीय फुटबॉल को मूल्यवान अनुभव मिला है। थापा जैसे खिलाड़ियों का विश्व स्तरीय दबाव में प्रदर्शन यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत प्रतिभा मौजूद है — असली चुनौती सामूहिक संरचना और गहराई बनाने की है। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के लिए यह विंडो अगले चक्र की योजना बनाने का स्पष्ट खाका छोड़ती है।