गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर तंज: संसद में पाकिस्तान की भाषा बोल रहे थे
सारांश
Key Takeaways
- गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- राहुल गांधी ने पीएम मोदी को अपमानित किया।
- महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा राजनीति में महत्वपूर्ण है।
- कांग्रेस पार्टी पर महिलाओं को वोट बैंक समझने का आरोप लगाया गया।
- विपक्ष ने विधेयक के खिलाफ वोट दिया, जिससे महिलाओं के अधिकारों पर असर पड़ा।
नई दिल्ली, १८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में एलओपी के रूप में नहीं बल्कि पाकिस्तान की भाषा का प्रयोग कर रहे थे।
लोकसभा में संविधान (१३१वां संशोधन) विधेयक के अस्वीकृत होने पर गिरिराज सिंह ने टिप्पणी की कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल हमेशा से महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही राजनीतिक पार्टियाँ इस बात की खुशी मना लें कि पीएम मोदी का विधेयक गिरा दिया गया, लेकिन देश और खासकर महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि उनकी टिप्पणियाँ मुझे दुखी करती हैं, न कि उनके द्वारा किए गए अपशब्दों के कारण, बल्कि इसलिए कि यह देश का दुर्भाग्य है कि हमारे विपक्ष के नेता ऐसे बयान दे रहे हैं। कल राहुल गांधी ने न केवल पीएम को अपमानित किया, बल्कि बालाकोट और 'ऑपरेशन सिंदूर' के संदर्भ में भी पाकिस्तान की बातों को दोहराया।
भाजपा सांसद मनन मिश्रा ने कहा कि यह देश के लिए बेहद दुखद है और यह राहुल गांधी, कांग्रेस और विपक्षी दलों का दुर्भाग्य है। देश में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पीएम मोदी ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया था, जिसमें ३३ प्रतिशत महिलाओं को संसद में चुनने का प्रावधान था, लेकिन विपक्ष इसे नहीं समझा।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में देखती है। विपक्ष ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं को गुमराह किया है।
भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि विपक्षी दलों को इस विधेयक के खिलाफ वोट देकर शर्म आनी चाहिए, फिर भी वे जश्न मना रहे हैं। जब २०२३ में यह विधेयक पास हुआ था, तब उन्होंने कहा था कि इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए, लेकिन कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इसके खिलाफ वोट देकर यह स्पष्ट कर दिया कि वे आम महिलाओं को अधिकार नहीं देना चाहते।