राहुल गांधी ने भाजपा पर महिलाओं के मुद्दों का उपयोग कर चुनावी नक्शा बदलने का आरोप लगाया
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं की शक्ति को मान्यता दी जानी चाहिए।
- भाजपा चुनावी नक्शे में बदलाव की कोशिश कर रही है।
- दलितों और ओबीसी के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता है।
- संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी।
- राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण पर शुक्रवार को हुई बहस में, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा।
उन्होंने अपनी बहन और वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की प्रशंसा करते हुए यह बताया कि उन्होंने जो काम 20 वर्षों में नहीं किया, वह प्रियंका ने करके दिखाया। एक दिन पहले, उन्होंने लोकसभा में प्रियंका के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने 'चाणक्य' का नाम लेकर अपनी बात रखी थी। राहुल ने प्रियंका के भाषण को 'बेहद शानदार' बताया।
लोकसभा की चर्चा के दौरान, राहुल ने एक निजी अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि बचपन में उनकी दादी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, ने उनसे कहा था कि असली ताकत छिपी रहती है और इंसान को सबसे ज्यादा डर अपने आप से होना चाहिए। उन्होंने इसे वर्तमान राजनीतिक हालात से जोड़ते हुए समझाने की कोशिश की।
राहुल गांधी ने एक मजेदार अंदाज में प्रधानमंत्री का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके और प्रधानमंत्री के बीच कोई 'वाइफ इश्यू' नहीं है। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की असली ताकत महिलाएं हैं और देश की प्रगति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी महिला मुद्दों के पीछे छिपकर देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने के बजाय, असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। हमारे समाज में दलितों और ओबीसी के साथ जो कुछ हुआ है, वह सब जानते हैं। भाजपा जातीय जनगणना से बचने की कोशिश कर रही है और ओबीसी समुदाय के अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है। बीजेपी भारत की बदलती राजनीति से डरी हुई है और उसे अपनी सत्ता कमजोर होती नजर आ रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार जो भी कदम उठाने की कोशिश कर रही है, उसके लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी और विपक्ष इसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने देगा। यह पूरी तरह से असंवैधानिक प्रयास है और पूरा विपक्ष इसे रुकवाने के लिए एकजुट है। भाजपा देश की सत्ता संरचना में ओबीसी और दलितों को पर्याप्त स्थान नहीं दे रही है। दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों को परिसीमन से डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि विपक्ष उनके अधिकारों की रक्षा करेगा।