महिला आरक्षण विधेयक खारिज: कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक का खारिज होना एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है।
- कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- सरकार का तर्क है कि जनगणना और परिसीमन आवश्यक हैं।
- महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है।
- भविष्य में विधेयक के पुनः लाने की संभावना है।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को अस्वीकार कर दिया गया। इस विधेयक के माध्यम से महिला आरक्षण को बिना शर्त लागू करने की मांग की जा रही थी। विधेयक के खारिज होने पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने संबोधित करते हुए कहा, "इस प्रश्न का उत्तर केवल वही दे सकते हैं। मुझे लगता है कि कहीं न कहीं सरकार की नियत में खोट है। सरकार लगातार ऐसी शर्तें और अटकलें पेश करती रहती है, कभी परिसीमन की शर्त तो कभी जनगणना की शर्त, ताकि महिला आरक्षण का मुद्दा आगे न बढ़ सके।"
गोगोई ने आगे कहा कि कल रात जो महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ, उसका कांग्रेस पार्टी ने पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा, "महिला आरक्षण विधेयक अब लागू है, लेकिन हमने जो कहा था वह यह था कि इसे बिना किसी शर्त के लाया जाना चाहिए, ताकि इसे आज से ही लागू किया जा सके। सरकार को भारत की महिलाओं और लोगों की समझ का अपमान नहीं करना चाहिए।"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. सी. वेणुगोपाल ने इसे भारतीय लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा, "यह भारतीय लोकतंत्र की जीत है। महिला आरक्षण के नाम पर इस विधेयक के माध्यम से लोकतंत्र को खत्म करने और उस पर कब्जा करने की केंद्र सरकार की कोशिश नाकाम हो गई है।"
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने आरोप लगाया कि सरकार पर्दे के पीछे से काम कर रही है। उन्होंने कहा, "हमने पहले ही कहा था कि आपको जाति जनगणना करवानी चाहिए।"
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सरकार पर चूक का आरोप लगाते हुए कहा, "आपने 2024 में यह प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं की? यह एक संवैधानिक प्रावधान है कि पहले जनगणना कराई जाएगी और उसके बाद ही परिसीमन होगा। यह सरकार की ओर से एक बड़ी चूक है।"
आरजेडी सांसद मीसा भारती ने कहा कि उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का कभी विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा, "यह विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका था। वे (भाजपा) केवल चुनावों पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं और महिलाओं को उनके अधिकार नहीं देना चाहते।"
विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने के बजाय परिसीमन और जनगणना की शर्त लगाकर मुद्दे को टाल रही है। वहीं, सरकार का पक्ष है कि आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन आवश्यक है, ताकि आरक्षण सही तरीके से लागू हो सके।