23 अगस्त 2026
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मायावती का कांग्रेस पर प्रहार: जंतर-मंतर आरक्षण विरोधी धरने पर राहुल की चुप्पी ने उजागर की मानसिकता

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मायावती का कांग्रेस पर प्रहार: जंतर-मंतर आरक्षण विरोधी धरने पर राहुल की चुप्पी ने उजागर की मानसिकता

सारांश

मायावती ने जंतर-मंतर पर आरक्षण-विरोधी धरने के दौरान राहुल गांधी की चुप्पी को कांग्रेस की दोहरी नीति का सबूत बताया। बसपा प्रमुख ने एक्स पर पोस्ट कर आर्थिक आधार पर आरक्षण की माँग को असंवैधानिक और देशहित विरोधी करार दिया।

मुख्य बातें

बसपा प्रमुख मायावती ने 23 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर जंतर-मंतर के आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन की निंदा की।
उन्होंने कहा कि एससी, एसटी व ओबीसी के संवैधानिक आरक्षण को खत्म करने की कोशिश 'देशहित में नहीं है।' राहुल गांधी उसी दिन पास के पार्लियामेंट थाने के बाहर धरने पर थे, लेकिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को समझाने नहीं गए।
भीमराव अम्बेडकर को उद्धृत करते हुए कहा — 'जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है।' उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण पहले से लागू है, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण इसका लाभ नहीं मिल रहा।
बसपा प्रमुख ने सभी सरकारों से आरक्षण-विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण न देने की अपील की।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 23 अगस्त को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आर्थिक आधार पर आरक्षण की माँग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी या कोई भी कांग्रेसी नेता वहाँ प्रदर्शनकारियों को समझाने नहीं पहुँचा। मायावती के अनुसार यह चूक कांग्रेस की एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के प्रति आरक्षण-विरोधी मानसिकता को बेनकाब करती है।

मायावती का मुख्य आरोप

बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि जंतर-मंतर पर संविधान में एससी, एसटी व ओबीसी समाज को दिए गए आरक्षण के विरुद्ध कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की उठाई गई माँग 'कतई भी उचित व देशहित में नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे कार्यों से समतामूलक समाज और विकसित देश बनाने के संवैधानिक प्रयासों को आघात पहुँचता है।

मायावती ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर को उद्धृत करते हुए कहा कि 'जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है।' उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति न करें।

राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर सवाल

मायावती ने बताया कि जिस दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट थाने के बाहर घंटों धरने पर बैठे रहे, उसी दिन पास के जंतर-मंतर पर दलित व शोषित वर्गों के जातीय आधार पर मिले आरक्षण को समाप्त करने की माँग को लेकर प्रदर्शन हो रहा था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी या उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन प्रदर्शनकारियों को समझाने तक नहीं गया।

बसपा प्रमुख के अनुसार यह मौन कांग्रेस की दोहरी नीति और इन वर्गों के प्रति उनकी आरक्षण-विरोधी सोच को उजागर करता है।

आर्थिक आरक्षण और सरकारी व्यवस्था पर टिप्पणी

मायावती ने कहा कि देश में पहले से ही आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था लागू है, लेकिन उसका सही लाभ अपरकास्ट समाज के गरीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा। उनके अनुसार इसमें 'छलावा अधिक है।' उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें गरीबी उन्मूलन के अनेक कार्यक्रमों पर हर वर्ष भारी सरकारी धन खर्च करती हैं, किंतु व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण इसका लाभ जन-सामान्य तक नहीं पहुँचता।

उन्होंने कहा कि यही भ्रष्ट और जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक प्रावधान को कभी ज़मीन पर सही से लागू नहीं होने दिया, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग आज भी गरीबी, शोषण और जातिवाद का दंश झेलते हैं।

सरकारों से अपील

बसपा प्रमुख ने सभी सरकारों से माँग की कि वे आरक्षण-विरोधी तत्वों को शरण और संरक्षण न दें। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे इस अहम मुद्दे पर राजनीतिक खिलवाड़ न होने दें।

आगे की राजनीतिक दिशा

यह बयान ऐसे समय में आया है जब आरक्षण से जुड़ी बहस एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। मायावती के इस हमले से बसपा ने दलित-पिछड़ा राजनीति में अपनी प्रासंगिकता को पुनः रेखांकित करने की कोशिश की है, और आने वाले समय में यह मुद्दा विपक्षी एकता की परीक्षा भी ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बसपा की उस रणनीतिक ज़रूरत का हिस्सा है जिसमें वह दलित-पिछड़े मतदाताओं को यह संदेश देना चाहती है कि उनका असली रक्षक कौन है। विडंबना यह है कि जिस आर्थिक आरक्षण की माँग को वे 'छलावा' कह रही हैं, वह EWS कोटा उसी संवैधानिक ढाँचे में जोड़ा गया जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने वैध ठहराया है। मायावती ने सरकारी भ्रष्टाचार को आरक्षण की विफलता का कारण बताया, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहा कि बसपा के अपने शासनकाल में इस व्यवस्था में क्या बदलाव आया। आरक्षण की बहस को चुनावी हथियार बनाने की प्रवृत्ति सभी दलों में है — मायावती का यह बयान उस प्रवृत्ति का अपवाद नहीं, बल्कि हिस्सा है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर क्या कहा?
मायावती ने जंतर-मंतर पर आर्थिक आधार पर आरक्षण की माँग को लेकर हुए प्रदर्शन को आरक्षण-विरोधी करार दिया और कहा कि एससी, एसटी व ओबीसी के संवैधानिक आरक्षण को खत्म करने की कोशिश देशहित में नहीं है। उन्होंने इसे समतामूलक समाज के संवैधानिक लक्ष्य के विरुद्ध बताया।
मायावती ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?
मायावती ने कहा कि जिस दिन राहुल गांधी पार्लियामेंट थाने के बाहर एफआईआर के लिए धरने पर बैठे थे, उसी दिन पास के जंतर-मंतर पर दलित आरक्षण के विरुद्ध प्रदर्शन हो रहा था, लेकिन राहुल या कोई कांग्रेसी नेता वहाँ प्रदर्शनकारियों को समझाने नहीं गया। उन्होंने इसे कांग्रेस की आरक्षण-विरोधी मानसिकता का प्रमाण बताया।
आर्थिक आधार पर आरक्षण के बारे में मायावती का क्या कहना है?
मायावती ने कहा कि देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन इसमें 'छलावा अधिक है' और अपरकास्ट के गरीब परिवारों को इसका सही लाभ नहीं मिल रहा। उनके अनुसार इसके लिए भ्रष्ट और जातिवादी सरकारी व्यवस्था जिम्मेदार है।
मायावती ने डॉ. अम्बेडकर को क्यों उद्धृत किया?
मायावती ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के कथन — 'जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है' — का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन करने वाले लोग वास्तविक देशभक्ति का परिचय नहीं दे रहे। उन्होंने सभी से अपील की कि वे जातिवाद से ऊपर उठकर संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करें।
बसपा ने सरकारों से क्या माँग की है?
बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों से माँग की कि वे आरक्षण-विरोधी तत्वों को किसी भी प्रकार की शरण या संरक्षण न दें। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति न करें और न होने दें।
राष्ट्र प्रेस
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