नेपाल बाढ़: भारतीय फोरेंसिक दल काठमांडू पहुंचा, DNA मिलान से होगी 700+ मृतकों की पहचान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम 30 अगस्त 2026 को काठमांडू पहुंची, जो रसुवा क्षेत्र में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान के लिए नेपाली समकक्षों के साथ मिलकर DNA नमूनों का मिलान करेगी। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने काठमांडू में इस दल के सदस्यों से मुलाकात की और अभियान की प्रगति की समीक्षा की।
भारतीय दल का काठमांडू आगमन
राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि राहत सामग्री लेकर पहुंची चौथी फ्लाइट में आए भारतीय फोरेंसिक टीम के सदस्यों से उन्होंने काठमांडू में मुलाकात की। यह टीम अपने नेपाली समकक्षों के साथ मिलकर रसुवा में आई भयावह बाढ़ के दौरान जान गंवाने वालों के DNA सैंपल का मिलान करेगी। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस पोस्ट को अपने एक्स हैंडल पर साझा किया।
राहत अभियान की स्थिति
भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान 11 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा। इस विमान में फोरेंसिक दल के अलावा सर्च-एंड-रेस्क्यू अभियान में सहायता करने वाली एक टनल टेक्निकल टीम और आवश्यक उपकरण भी भेजे गए हैं। यह मिशन भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की संयुक्त निगरानी में संचालित किया जा रहा है।
आपदा का विस्तार और मृतक संख्या
26 अगस्त को मध्य नेपाल और नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद से बड़े पैमाने पर खोज और राहत अभियान जारी है। शनिवार तक मृतकों की संख्या 700 से अधिक हो गई थी, जबकि 2,000 से ज़्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हज़ारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन सड़कों, पुलों और बुनियादी ढाँचे को हुए व्यापक नुकसान के कारण आपदा-प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचना अभी भी कठिन बना हुआ है।
परिजनों को इंतज़ार
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सहित कई देशों के परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। DNA मिलान की प्रक्रिया इन परिवारों को अपनों की पहचान में निर्णायक मदद दे सकती है। गौरतलब है कि इस पैमाने की आपदा में फोरेंसिक सहयोग क्षेत्रीय मानवीय सहायता का एक महत्वपूर्ण लेकिन प्रायः अनदेखा पहलू है।
आगे क्या होगा
भारतीय फोरेंसिक दल और नेपाली टीम मिलकर रसुवा क्षेत्र में DNA नमूनों के मिलान का कार्य शुरू करेंगी। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के साथ-साथ बुनियादी ढाँचे की बहाली भी प्राथमिकता में है, ताकि दूरदराज़ के प्रभावित इलाकों तक सहायता पहुँचाई जा सके।