नेपाल बाढ़ राहत: चौथा भारतीय विमान 11 टन सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा, कुल 68.5 टन सहायता भेजी
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार ने नेपाल बाढ़ राहत अभियान के तहत 30 अगस्त 2026 को अपना चौथा विमान 11 टन राहत सामग्री लेकर काठमांडू भेजा। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि सामग्री संबंधित नेपाली अधिकारियों को सौंप दी गई है। इस चौथी खेप के साथ भारत की ओर से हवाई मार्ग से भेजी गई कुल राहत सामग्री 68.5 टन हो गई है।
राहत सामग्री में क्या-क्या शामिल
चौथे विमान में भेजी गई सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और स्वच्छता किट जैसी आवश्यक वस्तुएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त खोज एवं बचाव अभियान के लिए ज़रूरी उपकरण तथा सुरंग तकनीकी विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भी इस उड़ान के ज़रिये नेपाल पहुँची। डीएनए जाँच हेतु फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक अलग टीम भी भेजी गई है।
चार उड़ानों का क्रमवार विवरण
26 अगस्त 2026 को — जिस दिन नेपाल में अचानक बाढ़ आई — भारतीय वायु सेना (IAF) के सी-130जे हरक्यूलिस विमान ने 10 टन आपातकालीन सामग्री पहुँचाई, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप और दवाइयाँ शामिल थीं।
27 अगस्त 2026 की सुबह IAF के सी-17 ग्लोबमास्टर विमान ने 37.5 टन सामग्री पहुँचाई — 28.5 टन तंबू, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप, जल निकासी पंप, रसोई सेट और जेनरेटर; 8 टन दवाइयाँ; तथा 1 टन खाद्य सामग्री।
28 अगस्त 2026 को एक और सी-130जे हरक्यूलिस ने भारतीय सेना की 5 सदस्यीय सुरंग बचाव दल और 6 सदस्यीय चिकित्सा दल को एयरलिफ्ट किया, साथ ही पोर्टेबल जेनरेटर, डिग्निटी किट, भोजन, जल शोधन की गोलियाँ और दवाइयाँ सहित 10 टन अतिरिक्त सामग्री भेजी। यह तकनीकी दल प्रभावित क्षेत्र में सुरंग बचाव कार्य में जुट चुका है।
पुलों के पुनर्निर्माण में भी भारत की मदद
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 230 फुट लंबे सिंगल लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण के लिए आवश्यक उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुँच चुके हैं। इसके अलावा सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए ज़रूरी उपकरण भी शीघ्र भेजे जाएंगे। इन पुलों को स्थापित करने वाली तकनीकी टीमें भी जल्द काठमांडू पहुँचेंगी।
विदेश मंत्रालय का बयान
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'हम नेपाल के साथ मजबूती से खड़े हैं। नेपाल के लिए राहत सामग्री लेकर गया चौथा विमान 11 टन सहायता के साथ नेपाल पहुंच गया है और राहत सामग्री संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।
आगे क्या होगा
भारत की ओर से राहत अभियान जारी रहने की उम्मीद है। सुरंग बचाव दल और फोरेंसिक विशेषज्ञ पहले से ज़मीन पर काम कर रहे हैं, जबकि बेली ब्रिज की तकनीकी टीमें शीघ्र पहुँचने वाली हैं। यह अभियान भारत-नेपाल के ऐतिहासिक पड़ोसी संबंधों की पुष्टि करता है, जहाँ भारत ने अतीत में भी — जैसे 2015 के भूकंप के दौरान — तत्काल मानवीय सहायता प्रदान की थी।