30 अगस्त 2026
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नेपाल में एक और झील फटने का खतरा, भोटेकोसी नदी का जलस्तर बढ़ा; 675 मौतें, 2,498 लापता

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नेपाल में एक और झील फटने का खतरा, भोटेकोसी नदी का जलस्तर बढ़ा; 675 मौतें, 2,498 लापता

सारांश

नेपाल में 26 अगस्त की तबाही अभी थमी नहीं — 675 मौतें, 2,498 लापता और अब एक और झील फटने का खतरा। रसुवागढ़ी के पास ल्हेंडे खोला का प्रवाह रुकने से 0.11 वर्ग किलोमीटर की नई झील बनी है। NDRRMA ने चार जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है।

मुख्य बातें

नेपाल की NDRRMA ने 30 अगस्त 2026 को नई बाढ़ चेतावनी जारी की; भोटेकोसी नदी का जलस्तर और बढ़ा।
रसुवागढ़ी से 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह रुकने से 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नई झील बनी।
धाडिंग जिले के गल्छी में त्रिशूली नदी सामान्य से 3 मीटर ऊपर; 26 अगस्त को यह स्तर 14 मीटर से अधिक था।
26 अगस्त 2026 की बाढ़ में अब तक 675 मौतें ; 2,498 लोग लापता, जिनमें 589 विदेशी नागरिक शामिल।
रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिलों में सतर्कता की अपील; बचाव अभियान जारी।

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने 30 अगस्त 2026 को नई बाढ़ चेतावनी जारी करते हुए बताया कि रसुवा जिले में भोटेकोसी नदी का जलस्तर और अधिक बढ़ गया है। अथॉरिटी के अनुसार, एक और झील के फटने की आशंका बनी हुई है, जिससे निचले इलाकों में विनाशकारी बाढ़ का खतरा है।

ल्हेंडे खोला में बाधित प्रवाह से नई झील का निर्माण

NDRRMA ने 27 अगस्त 2026 को सुबह 11:44 बजे ली गई सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण के आधार पर शनिवार देर रात बताया कि रसुवागढ़ी सीमा बिंदु से लगभग 18 किलोमीटर ऊपर की ओर ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह पूरी तरह रुक गया है। इस अवरोध के कारण करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक नई झील बन गई है।

अथॉरिटी ने चेतावनी दी कि इस झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध कभी भी टूट सकता है, जिससे एक और भीषण बाढ़ आ सकती है। शुरुआती आकलन से यह भी संकेत मिले हैं कि उस क्षेत्र में कुछ और झीलें भी बनी हो सकती हैं। ल्हेंडे खोला, भोटेकोसी नदी की एक सहायक नदी है, और इसके प्रवाह में बाधा ही मौजूदा संकट की मुख्य वजह बताई जा रही है।

त्रिशूली नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान के पार

जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के अंतर्गत आने वाले बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के अनुसार, धाडिंग जिले के गल्छी क्षेत्र में, जो भोटेकोसी नदी के निचले प्रवाह पर स्थित है, त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य से तीन मीटर ऊपर पहुँच गया है। अधिकारियों के अनुसार, त्रिशूली में यह उफान सीधे तौर पर रसुवा के भोटेकोसी क्षेत्र से आए बाढ़ के पानी के कारण है।

गौरतलब है कि 26 अगस्त को धाडिंग में बाढ़ का स्तर 14 मीटर से अधिक दर्ज किया गया था — जो इस मौसम का अब तक का सबसे ऊँचा स्तर रहा।

प्रभावित जिलों में सतर्कता की अपील

NDRRMA ने रविवार सुबह जारी सूचना में कहा, "रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिलों सहित प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में लगे सभी लोग, नदियों के किनारे रहने वाले नागरिक और अन्य संबंधित लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें।" अथॉरिटी लगातार इस बात को लेकर आगाह करती रही है कि एक और बड़ी बाढ़ की आशंका बनी हुई है।

जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल ज़्यादा तात्कालिक खतरा नहीं है, क्योंकि नदी किनारे के अधिकांश लोग पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुँच चुके हैं। हालाँकि, झील फटने की स्थिति में स्थिति तेज़ी से बदल सकती है।

26 अगस्त की बाढ़ में 675 मौतें, 2,498 अब भी लापता

NDRRMA के अनुसार, 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,498 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून सीज़न अपने चरम पर है और पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का जोखिम हर साल बढ़ता जा रहा है।

बचाव और राहत अभियान जारी है, लेकिन नई झील के फटने की आशंका ने राहतकर्मियों के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अगले कुछ घंटों में सैटेलाइट निगरानी और जमीनी आकलन के आधार पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे दशकों से नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है। 0.11 वर्ग किलोमीटर की नई झील और संभावित अतिरिक्त झीलों का बनना बताता है कि एकल आपदा प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं है — दीर्घकालिक GLOF निगरानी और पूर्व-चेतावनी तंत्र की सख्त ज़रूरत है। 589 लापता विदेशी नागरिकों की संख्या यह भी दर्शाती है कि ट्रेकिंग और पर्यटन क्षेत्रों में आपदा-जोखिम संचार की गंभीर कमी है। जब तक क्षेत्रीय सहयोग और वास्तविक समय की सैटेलाइट निगरानी को नीतिगत प्राथमिकता नहीं मिलती, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल में भोटेकोसी नदी के पास नई झील फटने का खतरा क्यों है?
रसुवागढ़ी सीमा बिंदु से लगभग 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह बाधित हो गया है, जिससे 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक प्राकृतिक झील बन गई है। NDRRMA के अनुसार, इस झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध कभी भी टूट सकता है, जिससे निचले इलाकों में भीषण बाढ़ आ सकती है।
26 अगस्त 2026 की नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
NDRRMA के अनुसार, 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,498 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाल के किन जिलों को बाढ़ चेतावनी जारी की गई है?
NDRRMA ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिलों में नदी किनारे रहने वाले नागरिकों और राहतकर्मियों को सतर्क रहने की अपील की है। ये सभी जिले भोटेकोसी और त्रिशूली नदी के प्रवाह क्षेत्र में आते हैं।
त्रिशूली नदी का जलस्तर इतना क्यों बढ़ा?
बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के अनुसार, धाडिंग के गल्छी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य से 3 मीटर ऊपर पहुँच गया है। अधिकारियों ने बताया कि इसका मुख्य कारण रसुवा के भोटेकोसी क्षेत्र से आया बाढ़ का पानी है।
क्या नेपाल में और झीलें बनने का खतरा है?
NDRRMA के शुरुआती आकलन से संकेत मिले हैं कि ल्हेंडे खोला के आसपास के क्षेत्र में कुछ और झीलें भी बनी हो सकती हैं। अथॉरिटी सैटेलाइट तस्वीरों के ज़रिए लगातार निगरानी कर रही है और स्थिति की विस्तृत जानकारी आने वाले घंटों में अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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