30 अगस्त 2026
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रूस बना भारत का बड़ा पेट्रोल खरीदार, दो महीने में करीब 10 लाख बैरल की शिपमेंट

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रूस बना भारत का बड़ा पेट्रोल खरीदार, दो महीने में करीब 10 लाख बैरल की शिपमेंट

सारांश

यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की रिफाइनरियों को इस कदर तबाह किया कि मॉस्को को भारत से पेट्रोल खरीदना पड़ा। दो महीनों में करीब 10 लाख बैरल की शिपमेंट और रूसी घरेलू उत्पादन में 70% की गिरावट — यह युद्ध का वह आर्थिक पहलू है जो सुर्खियों से अक्सर छूट जाता है।

मुख्य बातें

शिप-ट्रैकिंग फर्म वोर्टेक्सा के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2026 में भारत से रूस को करीब 10 लाख बैरल पेट्रोल निर्यात हुआ।
यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूसी ईंधन उत्पादन में 70% तक की गिरावट; जुलाई-अगस्त में रिफाइनरियों पर 32 हमले दर्ज।
अगस्त 2026 में रूस का समुद्री पेट्रोल आयात रिकॉर्ड 4,70,000 टन पर पहुँचा।
भारत की अधिकांश आपूर्ति गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी (नायरा एनर्जी/रोजनेफ्ट) से हुई।
अगस्त 2026 में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात लगभग 21 लाख बैरल प्रति दिन रहा; भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 40% से अधिक ।
भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता 272 एमएमटीपीए से बढ़ाकर 300 एमएमटीपीए करने की योजना पर काम कर रहा है।

यूक्रेन के ड्रोन हमलों से बुरी तरह प्रभावित रूसी रिफाइनरियों की भरपाई के लिए रूस ने भारत को अपने प्रमुख पेट्रोल आपूर्तिकर्ता के रूप में चुना है। शिप-ट्रैकिंग फर्म वोर्टेक्सा की रिपोर्ट के अनुसार, बीते दो महीनों — जुलाई और अगस्त 2026 — में भारत से रूस को करीब 10 लाख बैरल पेट्रोल की शिपमेंट हुई है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब रूस में घरेलू ईंधन उत्पादन में 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

वोर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में रूस का समुद्री रास्ते से होने वाला पेट्रोल आयात बढ़कर रिकॉर्ड 4,70,000 टन हो गया। जुलाई और अगस्त के दौरान रूसी रिफाइनरियों पर 32 हमले हुए, जिनसे उत्पादन ठप पड़ गया और स्थानीय फिलिंग स्टेशनों पर कारों की लंबी कतारें लग गईं। इस संकट से निपटने के लिए रूस ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर अस्थायी रोक भी लगा दी है।

व्यापार सूत्रों के अनुसार, भारत की अधिकांश आपूर्ति गुजरात के तट पर स्थित नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी से की गई, जिसमें रूसी तेल कंपनी रोजनेफ्ट की हिस्सेदारी है। रूस को पेट्रोल आपूर्ति करने वाले अन्य प्रमुख देशों में तुर्की और मोरक्को भी शामिल हैं।

होर्मुज संकट और भारत की ऊर्जा रणनीति

यह ऊर्जा समीकरण तब और जटिल हो गया जब ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गई। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात इसी जलमार्ग से होता है। इस व्यवधान के बाद भारत ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों का दायरा तेज़ी से बढ़ाया।

शिपिंग रिसर्च फर्म केप्लर के ताज़ा अनुमानों के अनुसार, अगस्त 2026 में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात लगभग 21 लाख बैरल प्रति दिन रहा। हालाँकि यह जून और जुलाई में दर्ज रिकॉर्ड 26 लाख बैरल प्रति दिन से कम है, फिर भी रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

भारत के आयात में रूस की हिस्सेदारी

जुलाई 2026 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही, जिससे वह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब को पीछे छोड़कर शीर्ष पर पहुँच गया। अगस्त में गिरावट के बावजूद भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक बनी रही।

केप्लर के आंकड़ों के अनुसार अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं की स्थिति इस प्रकार है: UAE — 6,11,000 बैरल प्रति दिन, सऊदी अरब — 3,85,000 बैरल प्रति दिन, वेनेजुएला — 3,83,000 बैरल प्रति दिन, नाइजीरिया — 1,29,000 बैरल प्रति दिन और ब्राजील — 1,20,000 बैरल प्रति दिन

भारत की रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस महीने की शुरुआत में कहा कि वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता को लेकर अनिश्चितता के बावजूद, भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े रिफाइनर के रूप में अपनी स्थिति और मज़बूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि देश अपनी रिफाइनिंग क्षमता को 272 एमएमटीपीए से बढ़ाकर 300 एमएमटीपीए करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत एक साथ दो भूमिकाएँ निभा रहा है — रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार और अब रूस को ही परिष्कृत पेट्रोल का निर्यातक। आने वाले महीनों में होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और रूसी रिफाइनरियों की पुनर्बहाली की गति यह तय करेगी कि यह व्यापार संतुलन कितना टिकाऊ साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक रणनीतिक विरोधाभास है। वाडिनार रिफाइनरी में रोजनेफ्ट की हिस्सेदारी इस पूरे लेनदेन को और पेचीदा बनाती है, क्योंकि भारत तकनीकी रूप से एक रूसी-नियंत्रित संपत्ति के ज़रिए रूस को ही ईंधन लौटा रहा है। होर्मुज संकट ने भारत को अल्पकालिक ऊर्जा सुरक्षा तो दी है, लेकिन रूस पर बढ़ती निर्भरता — जो अब कुल आयात के 40% से अधिक है — एक दीर्घकालिक भू-राजनीतिक जोखिम बन सकती है, जिस पर नीति-निर्माताओं को गंभीरता से विचार करना होगा।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत रूस को पेट्रोल क्यों निर्यात कर रहा है?
यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूसी रिफाइनरियों को भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे घरेलू ईंधन उत्पादन में 70% तक की गिरावट आई है। इस कमी को पूरा करने के लिए रूस ने भारत, तुर्की और मोरक्को से पेट्रोल आयात करना शुरू किया है।
भारत ने रूस को कितना पेट्रोल निर्यात किया?
वोर्टेक्सा की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान भारत ने रूस को करीब 10 लाख बैरल पेट्रोल की शिपमेंट की। अगस्त में रूस का समुद्री पेट्रोल आयात रिकॉर्ड 4,70,000 टन तक पहुँच गया।
भारत से पेट्रोल की आपूर्ति किस रिफाइनरी से हो रही है?
व्यापार सूत्रों के अनुसार, अधिकांश आपूर्ति गुजरात के तट पर स्थित नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी से हुई, जिसमें रूसी तेल कंपनी रोजनेफ्ट की हिस्सेदारी है।
भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी कितनी है?
केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात लगभग 21 लाख बैरल प्रति दिन रहा और भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 40% से अधिक बनी हुई है। जुलाई में यह हिस्सेदारी 50% से भी अधिक थी।
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने का भारत के तेल आयात पर क्या असर पड़ा?
ईरान युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों का दायरा बढ़ाया और रूस से आयात में तेज़ वृद्धि हुई। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के 20% तेल और गैस का निर्यात इसी जलमार्ग से होता है।
राष्ट्र प्रेस
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