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ईरान युद्ध के बीच भारत के पास ऊर्जा भंडार है: सरकार का दावा

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ईरान युद्ध के बीच भारत के पास ऊर्जा भंडार है: सरकार का दावा

सारांश

ईरान युद्ध से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभावों के बीच, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। सरकार ने कहा है कि देश में कच्चे तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे उपभोक्ताओं को किसी भी कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मुख्य बातें

भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है।
भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना बढ़ा दिया है।
सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
मध्य पूर्व में तनाव के बावजूद, भारत सुरक्षित स्थिति में है।
उपभोक्ताओं को कोई कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभावों के बीच, भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। इसके साथ ही, तेल कंपनियां खाड़ी क्षेत्र के बाहर से आयात बढ़ाकर आपूर्ति में कमी को पूरा कर रही हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत इस समय ऊर्जा आपूर्ति के मामले में एक मजबूत स्थिति में है। उन्होंने बताया कि हमारे पास होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भंडार से कहीं अधिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में कच्चे तेल, तेल उत्पादों और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य देशों से आयात बढ़ाकर आपूर्ति को सुनिश्चित किया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि भारत 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। उस समय भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 0.2 प्रतिशत थी, लेकिन अब यह तेजी से बढ़ी है।

फरवरी में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20 प्रतिशत रूस से खरीदा। इस महीने में, भारत ने रूस से करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (1.04 मिलियन बैरल प्रति दिन) कच्चा तेल आयात किया।

सरकारी अधिकारी ने यह भी कहा कि एमआरपीएल रिफाइनरी बंद होने की खबरें गलत हैं। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी में पर्याप्त स्टॉक है और एलपीजी बनाने वाली सभी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि देश में एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अधिकारी ने कहा कि सरकार आवश्यकतानुसार पेट्रोकेमिकल उत्पादों का इस्तेमाल भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए करेगी, ताकि कोई कमी न हो।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन अधिकतम करें और घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें।

इसके अंतर्गत रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी महत्वपूर्ण गैसों का इस्तेमाल प्राथमिकता से एलपीजी उत्पादन में करने के लिए कहा गया है, ताकि घरों में रसोई गैस की कोई कमी न हो।

मध्य पूर्व में युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग मार्गों पर असर पड़ा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (तेल और गैस के वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग) से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

इस युद्ध के कारण दुनिया के दूसरे सबसे बड़े एलएनजी निर्यातक कतर से भी गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालाँकि, भारत सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति में देश के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार है और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सरकार ने आवश्यक कदम उठाए हैं ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच महत्वपूर्ण है, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में ऊर्जा भंडार कितना है?
भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है, जिससे उपभोक्ताओं को किसी कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
क्या भारत रूस से तेल खरीद रहा है?
हाँ, भारत 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है और फरवरी में लगभग 20 प्रतिशत आयात रूस से किया गया।
क्या एमआरपीएल रिफाइनरी बंद हो रही है?
नहीं, एमआरपीएल रिफाइनरी में पर्याप्त स्टॉक है और बंद होने की खबरें गलत हैं।
सरकार ने घरेलू आपूर्ति के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उपयोग करने की योजना बनाई है ताकि घरेलू मांग को पूरा किया जा सके।
क्या ईरान युद्ध का असर भारत पर पड़ेगा?
ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है, लेकिन भारत सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त ऊर्जा भंडार है।
राष्ट्र प्रेस
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