ऑपरेशन सिंदूर में महिला पायलटों की अहम भूमिका, राजनाथ सिंह ने लखनऊ में किया खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 30 अगस्त 2026 को लखनऊ में वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा के अनावरण समारोह में स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महिला पायलटों और महिला सैनिकों ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकवाद के विरुद्ध अभियान में निर्णायक भूमिका निभाई। यह पहली बार है जब किसी वरिष्ठ सरकारी मंत्री ने सार्वजनिक मंच पर इस ऑपरेशन में महिला सैन्यकर्मियों की भागीदारी की स्पष्ट पुष्टि की है।
महिला सैनिकों की ऐतिहासिक भागीदारी
राजनाथ सिंह ने कहा, 'हमारे देश की वीरांगनाओं ने रणभूमि में भी अपना शौर्य दिखाया है और राजपाट में भी सुशासन के नए कीर्तिमान लिखे हैं।' उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की महिलाएँ आज सेना, पुलिस, विज्ञान, खेल, शिक्षा और प्रशासन — हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का परिचय दे रही हैं। उनके अनुसार, महिला सैनिक सियाचिन की ऊँचाइयों से लेकर समुद्र की गहराइयों तक देश की सुरक्षा को सुदृढ़ कर रही हैं।
सरकारी पहलों से महिला सशक्तीकरण
रक्षा मंत्री ने बताया कि सैनिक स्कूलों के द्वार अब लड़कियों के लिए खोल दिए गए हैं। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना और 'लखपति दीदी' जैसी पहलों के ज़रिये महिलाओं को क्रमशः शैक्षणिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नारी शक्ति को अधिकार, अवसर, सुरक्षा और सम्मान देने का काम किया है।
वीरांगना अवंतीबाई लोधी को श्रद्धांजलि
राजनाथ सिंह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना अवंतीबाई लोधी के साहस को भारतीय इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि बदायूँ में रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर पीएसी की एक नई बटालियन का गठन किया जा रहा है। इससे पूर्व लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी और गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई कोरी के नाम पर पीएसी की बटालियनों का नामकरण हो चुका है।
राष्ट्रीय नायकों को पहचान देने का संकल्प
रक्षा मंत्री ने कहा, 'हमारे आदर्श और प्रेरणास्रोत बाहर से आयात नहीं होने चाहिए।' उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे राष्ट्रनिर्माताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि अतीत की वीरता की कहानियाँ वर्तमान को आत्मविश्वास और भविष्य को मार्गदर्शन देती हैं।
आगे की दिशा
ऑपरेशन सिंदूर में महिला सैन्यकर्मियों की भागीदारी की यह स्वीकृति भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह ऐसे समय में आई है जब सेना में महिलाओं की स्थायी कमीशन और लड़ाकू भूमिकाओं पर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।