ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में स्वदेशी तकनीक और वायुसेना का साहस निर्णायक: राजनाथ सिंह
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 जून 2026 को हैदराबाद स्थित भारतीय वायुसेना अकादमी (AFA) में आयोजित संयुक्त स्नातक परेड में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के पीछे भारत की स्वदेशी तकनीक और वायुसेना के प्रशिक्षित, साहसी एवं अनुशासित अधिकारियों का निर्णायक योगदान रहा। इस अवसर पर भारतीय नौसेना के 9 अधिकारियों, भारतीय तट रक्षक के 3 अधिकारियों और सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम के 2 प्रशिक्षुओं को उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर 'विंग्स' प्रदान किए गए, जबकि नेविगेशन प्रशिक्षण पूरा करने वाले तीन अधिकारियों को 'ब्रेवेट्स' से सम्मानित किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर पर रक्षा मंत्री का बयान
राजनाथ सिंह ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा, 'हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में भी, हमने यही भावना देखी है। हमारी एयर फोर्स ने स्पष्टता और शुद्धता के साथ, आतंकी ठिकानों को नेस्तानाबूद कर दिया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इतना बड़ा अभियान सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सका, तो उसके पीछे स्वदेशी तकनीक के साथ-साथ वायुसेना के दक्ष अधिकारियों की भूमिका अहम थी। रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि भविष्य के अभियानों में भी वायुसेना की यही भूमिका दिखेगी।
नवनियुक्त अधिकारियों को संदेश
राजनाथ सिंह ने नए अधिकारियों से कहा, 'आपके कंधों पर सजे विंग्स केवल एक बैज भर नहीं हैं — यह करोड़ों भारतीयों के भरोसे का प्रतीक हैं।' उन्होंने कहा कि पेशेवर सैनिक के रूप में उभरती चुनौतियों के प्रति सदैव सजग रहना और आवश्यकता के अनुसार अपनी प्रतिक्रिया को पुनः अंशांकित करना उनका दायित्व है। उन्होंने युवा अधिकारियों को नई युद्ध प्रणालियों और रणनीतियों को समझने, उनमें नवाचार करने और उन्हें सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने की सीख दी।
महिला पायलटों और अंतरिक्ष में वायुसेना की उड़ान
रक्षा मंत्री ने विशेष रूप से इस परेड में कमीशन हो रही महिला पायलटों को बधाई दी और कहा कि नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी से वायुसेना और अधिक संतुलित एवं सशक्त बन रही है। उन्होंने भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का उल्लेख करते हुए कहा कि वे भारत की ओर से अंतरिक्ष तक पहुँचे, और इस परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब इन नए अधिकारियों की है।
वैश्विक मानवीय अभियानों में वायुसेना की भूमिका
राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि भारतीय वायुसेना ने न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी अपनी छाप छोड़ी है। कई बचाव अभियानों में वायुसेना ने विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद की, जो भारतीय संस्कृति की उस भावना को प्रतिबिंबित करता है जो राष्ट्रीयता और सीमाओं से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता की सहायता में विश्वास रखती है।
विकसित भारत 2047 का विजन
समारोह के समापन में रक्षा मंत्री ने कहा कि नए अधिकारियों का विजन और समर्पण ही भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देगा। उन्होंने कहा, 'आकाश ही सीमा है' — लेकिन वायुसेना के लिए यह सिर्फ एक मुहावरा नहीं, एक जीवंत वास्तविकता है।