सीपीआई की 'बदलाव जरूरी है' रैली: रामलीला मैदान में बेरोजगारी-महंगाई पर केंद्र सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने 1 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 'बदलाव जरूरी है' रैली आयोजित की, जिसमें पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार पर बेरोजगारी, महंगाई, खाद्य सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की विफलता के आरोप लगाए। देश के कोने-कोने से एक लाख से अधिक लोगों के जुटने का दावा करते हुए सीपीआई नेताओं ने सरकार परिवर्तन की माँग को जन-समर्थन का प्रतीक बताया।
रैली का मुख्य घटनाक्रम
रामलीला मैदान में आयोजित इस सभा में सीपीआई के वरिष्ठ नेताओं ने एक के बाद एक मंच से केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाली सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पार्टी के राज्यसभा सदस्य पी. संतोष कुमार ने कहा कि 'बदलाव जरूरी है' नारा देश के हर घर और हर नागरिक की ज़ुबान पर है और इस रैली में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इसका प्रमाण है।
नेताओं के आरोप: बेरोजगारी से लेकर परीक्षा भ्रष्टाचार तक
राज्यसभा के पूर्व सदस्य और सीपीआई नेता बिनॉय विश्वम ने कहा कि देश रोजगार, भोजन, आवास और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के संकट से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, 'रोजगार, भोजन, आवास और शिक्षा नहीं है। 70 साल बीत चुके हैं, लेकिन लोग अभी भूखे मर रहे हैं। परीक्षा प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। पूरी परीक्षा प्रणाली भ्रष्टाचार की चपेट में है।'
विश्वम ने यह भी कहा कि 'यह कॉरपोरेट और लुटेरों की सरकार है।' उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार आम लोगों के बजाय अमीरों के हितों की पोषक है और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रही है। उनके अनुसार, 'भारत के कोने-कोने से एक लाख लोग' राजधानी पहुँचे हैं और देश में बदलाव की माँग कर रहे हैं।
एनी राजा का बयान: मजदूर, किसान, युवा सभी प्रभावित
सीपीआई नेता एनी राजा ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियाँ मजदूरों, किसानों, छात्रों, युवाओं और महिलाओं के हितों के विरुद्ध हैं। उन्होंने कहा, 'भारत के लोग केंद्र में फासीवादी भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों और कार्यक्रमों के कारण बहुत मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं।' राजा के अनुसार, सरकार की 'गलत नीतियों' का खामियाजा समाज का हर वर्ग भुगत रहा है।
आम जनता पर असर और विपक्ष की माँग
सीपीआई नेताओं ने रोजगार के बेहतर अवसर, सुलभ शिक्षा, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव की माँग को इस रैली की केंद्रीय धुरी बताया। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों की ओर से केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाने की आवृत्ति बढ़ती जा रही है। गौरतलब है कि परीक्षा प्रणाली में कथित भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के आँकड़े हाल के महीनों में राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में रहे हैं।
आगे की राह
सीपीआई ने इस रैली को व्यापक जन-आंदोलन की शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया है। पार्टी के नेताओं ने संकेत दिया कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। रैली की सफलता और उसमें उठाए गए मुद्दे आने वाले चुनावी मौसम में विपक्षी एकजुटता की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।