GDP 7.8% वृद्धि पर पंकज चौधरी का विपक्ष पर पलटवार, बोले — आंकड़ों ने बदली 'डेड इकॉनमी' वाली स्क्रिप्ट
सारांश
मुख्य बातें
वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार, 1 सितंबर को विपक्ष की आर्थिक आलोचनाओं पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है — और यह आँकड़ा विपक्ष की 'बदहाल अर्थव्यवस्था' वाली पूरी राजनीतिक कथा को खारिज करता है। लखनऊ से एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि जीडीपी का स्कोरबोर्ड खुद बोलता है।
मुख्य घटनाक्रम
चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की देखरेख में भारत की अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक मजबूती और निरंतर विकास का ठोस प्रमाण बताया।
उन्होंने विस्तार से बताया कि विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। उनके अनुसार ये संख्याएँ दर्शाती हैं कि भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अपनी स्थिति लगातार सुदृढ़ कर रहा है।
विपक्ष पर सीधा निशाना
वित्त राज्यमंत्री ने कहा कि जो नेता भारत को 'डेड इकॉनमी' बताते थे, उन्हें अब देश की आर्थिक प्रगति से परेशानी होगी। उन्होंने कहा, 'विपक्ष की राजनीति निराशा पर चलती है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार विकास पर चलती है।'
चौधरी ने यह भी कहा कि विपक्ष आँकड़ों से नाराज हो सकता है, लेकिन देश की जनता बढ़ती अर्थव्यवस्था से संतुष्ट है। गौरतलब है कि विपक्षी दल पिछले कई महीनों से महँगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक असमानता को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं।
सरकार की प्राथमिकताएँ
चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान विकास, रोज़गार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को गति देने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि मजबूत जीडीपी वृद्धि न केवल अर्थव्यवस्था की रफ्तार को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी साख मज़बूत कर रहा है।
व्यापक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ भारत को दुनिया की सबसे तेज़ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक मानती हैं। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि उच्च जीडीपी वृद्धि के बावजूद रोज़गार की गुणवत्ता और असंगठित क्षेत्र की स्थिति पर अलग से ध्यान देने की ज़रूरत है।
आगामी तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की यह रफ्तार टिकाऊ रहती है या नहीं, और क्या इसका लाभ आम नागरिकों तक पहुँचता है।