रेणुकास्वामी हत्याकांड: दर्शन ने कर्नाटक हाईकोर्ट में दी प्रदोष को अप्रूवर बनाने के फैसले को चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
कन्नड़ अभिनेता दर्शन ने रेणुकास्वामी हत्याकांड में कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है और ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें मामले के आरोपी नंबर 14 प्रदोष को सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की अनुमति दी गई थी। बेंगलुरु की 59वीं सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट ने 25 अगस्त को प्रदोष की याचिका स्वीकार करते हुए उसे कुछ शर्तों के साथ माफी देकर अप्रूवर का दर्जा दिया था। दर्शन फिलहाल इसी हत्याकांड में न्यायिक हिरासत में हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जून 2024 में 33 वर्षीय रेणुकास्वामी का शव बेंगलुरु में एक नाले के पास मिला था। जाँच के अनुसार, चित्तरदुर्गा निवासी रेणुकास्वामी को कथित तौर पर अगवा किया गया, उसके साथ मारपीट और यातना की गई और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। जाँच में अभिनेता दर्शन और अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा समेत कई लोगों के नाम सामने आए, जिसके बाद पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया।
25 अगस्त को ट्रायल कोर्ट ने प्रदोष की उस याचिका को मंजूरी दी जिसमें उसने मामले में अप्रूवर बनने की इच्छा जताई थी। इसके बाद कोर्ट ने प्रदोष को गवाह के तौर पर बयान दर्ज कराने के लिए समन भी जारी किया।
दर्शन की याचिका में उठाए गए सवाल
दर्शन ने अपनी याचिका में प्रदोष को अप्रूवर बनाए जाने की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि इस फैसले पर पहुँचने से पहले अपनाई गई तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया की जाँच होनी चाहिए। अभिनेता ने हाईकोर्ट से पूरे फैसले पर रोक लगाने की माँग की है।
गौरतलब है कि कर्नाटक हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट दोनों पहले यह स्पष्ट कर चुके हैं कि सह-आरोपियों को माफी की कार्यवाही में शामिल होने या उसका विरोध करने का कानूनी अधिकार नहीं है। अदालतों के अनुसार, सह-आरोपी का अधिकार तब सामने आता है जब अप्रूवर का बयान दर्ज हो जाए और उससे क्रॉस एग्जामिनेशन की प्रक्रिया शुरू हो।
कानूनी पेचीदगी
यह मामला इस लिहाज से पेचीदा है कि दर्शन उसी प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं जिसे अदालतें पहले ही वैध ठहरा चुकी हैं। कानूनी जानकारों के अनुसार, अप्रूवर प्रक्रिया में सह-आरोपी की भूमिका सीमित होती है और उसका हस्तक्षेप केवल क्रॉस एग्जामिनेशन के चरण में संभव है।
यह ऐसे समय में आया है जब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में सक्रिय रूप से जारी है और प्रदोष के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
मामले की पृष्ठभूमि
रेणुकास्वामी हत्याकांड उस समय और ज़्यादा चर्चा में आया जब जाँच में कन्नड़ फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता दर्शन और अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा के नाम सामने आए। दर्शन को इस मामले में मुख्य आरोपियों में से एक माना जाता है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
आगे क्या होगा
अब कर्नाटक हाईकोर्ट यह तय करेगा कि दर्शन की याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं और क्या प्रदोष को अप्रूवर बनाने की प्रक्रिया पर कोई अंतरिम रोक लगाई जाए। इस फैसले का सीधा असर ट्रायल कोर्ट में जारी सुनवाई की गति और दिशा पर पड़ सकता है।