6 अगस्त 2026
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दर्शन मर्डर केस: आरोपी प्रदोष ने माँगा सरकारी गवाह का दर्जा, 59वीं CCH कोर्ट में अर्जी दाखिल

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दर्शन मर्डर केस: आरोपी प्रदोष ने माँगा सरकारी गवाह का दर्जा, 59वीं CCH कोर्ट में अर्जी दाखिल

सारांश

रेणुकास्वामी हत्याकांड में आरोपी प्रदोष ने कोर्ट से सरकारी गवाह बनने की माँग की है — एक ऐसा कदम जो दर्शन थूगुदीपा और अन्य 16 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की दिशा पलट सकता है। अभियोजन पक्ष का जवाब ही तय करेगा कि यह केस किस मोड़ पर जाएगा।

मुख्य बातें

आरोपी प्रदोष ने 6 अगस्त को बेंगलुरु की 59वीं CCH कोर्ट में अप्रूवर (सरकारी गवाह) बनने की अर्जी दाखिल की।
प्रदोष ने दूसरी अर्जी में माँग की कि उसे दर्शन थूगुदीपा और अन्य आरोपियों से अलग कमरे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर पेश होने की अनुमति दी जाए।
कोर्ट ने अर्जी पर संज्ञान लेते हुए अभियोजन पक्ष से जवाब तलब किया; अगली सुनवाई में रुख स्पष्ट होगा।
33 वर्षीय रेणुकास्वामी की जून 2024 में बेंगलुरु के एक शेड में बंधक बनाकर पिटाई से मृत्यु हुई थी; शव नाले के पास मिला था।
इस मामले में दर्शन थूगुदीपा , पवित्रा गौड़ा सहित कुल 17 लोग गिरफ्तार हैं; सर्वोच्च न्यायालय ने दर्शन की जमानत रद्द कर वीआईपी सुविधा देने से मना किया था।

बेंगलुरु की 59वीं सीसीएच (सर्टिफिकेट इन कम्युनिटी हेल्थ) कोर्ट में गुरुवार, 6 अगस्त को कन्नड़ अभिनेता दर्शन थूगुदीपा उर्फ 'डी-बॉस' से जुड़े रेणुकास्वामी हत्याकांड में एक अहम मोड़ आया। इस मामले के आरोपी प्रदोष ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सरकारी गवाह यानी 'अप्रूवर' का दर्जा माँगा है और हत्याकांड की पूरी सच्चाई उजागर करने की इच्छा जताई है। कोर्ट ने इस अर्जी पर संज्ञान लेते हुए अभियोजन पक्ष से जवाब तलब किया है।

प्रदोष की अर्जी में क्या है

प्रदोष ने कोर्ट के समक्ष दो अलग-अलग अर्जियाँ दाखिल कीं। पहली अर्जी में उसने माफी माँगते हुए अप्रूवर बनने की गुहार लगाई, जिसका अर्थ है कि वह अपना अपराध स्वीकार कर शेष आरोपियों के विरुद्ध गवाही देने को तैयार है। दूसरी अर्जी में उसने माँग की कि उसे दर्शन थूगुदीपा और अन्य आरोपियों से अलग कमरे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पेश होने की अनुमति दी जाए। फिलहाल प्रदोष को दर्शन और अन्य आरोपियों के साथ एक ही कमरे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर पेश किया जा रहा है।

कानूनी महत्व और केस पर संभावित असर

कानूनी दृष्टि से, सरकारी गवाह बनने की प्रक्रिया में आरोपी अपना जुर्म स्वीकार करता है और बाकी आरोपियों के विरुद्ध अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करता है। यदि कोर्ट प्रदोष की अर्जी स्वीकार करती है, तो उसका बयान इस हत्याकांड की दिशा बदलने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। रेणुकास्वामी की हत्या के पीछे की पूरी घटनाक्रम को लेकर महत्त्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। अगली सुनवाई में अभियोजन पक्ष को यह स्पष्ट करना होगा कि वह इस माँग पर क्या रुख अपनाता है।

रेणुकास्वामी हत्याकांड: पृष्ठभूमि

33 वर्षीय रेणुकास्वामी चित्रदुर्ग के निवासी थे और दर्शन के प्रशंसक थे। आरोप है कि जून 2024 में उन्होंने दर्शन की साथी पवित्रा गौड़ा को आपत्तिजनक संदेश भेजे थे। इसी कारण उन्हें बेंगलुरु बुलाया गया, जहाँ एक शेड में बंधक बनाकर उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। अधिक चोट लगने से उनकी मृत्यु हो गई और बाद में शव को एक नाले के पास फेंक दिया गया। इस मामले में दर्शन थूगुदीपा, पवित्रा गौड़ा सहित कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप

सर्वोच्च न्यायालय ने दर्शन को मिली जमानत बाद में रद्द कर दी और उन्हें तत्काल पुनः गिरफ्तार करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि जेल में उन्हें किसी प्रकार की वीआईपी सुविधा न दी जाए। यह मामला इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय है कि यह लगातार न्यायिक निगरानी में रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस मामले को लेकर कर्नाटक में दर्शन के प्रशंसकों का आक्रोश भी सामने आया है। हाल ही में रामनगर में श्री चामुंडेश्वरी देवी करागा महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाषण में दर्शन के समर्थकों ने 'डी-बॉस' के नारे लगाकर व्यवधान डाला और सीएम से मामले में हस्तक्षेप की माँग की। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने भीड़ को शांत करते हुए कहा कि वे लोगों की भावनाएँ समझते हैं, लेकिन मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण सब कुछ कानून के दायरे में ही होगा। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें अभियोजन पक्ष का रुख तय करेगा कि प्रदोष सरकारी गवाह बनेगा या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि न्यायपालिका इस मामले को साधारण नहीं मान रही। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि अप्रूवर का बयान अकेले दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकता — उसे अन्य साक्ष्यों से पुष्टि आवश्यक है। रामनगर में प्रशंसकों का विरोध और सीएम से हस्तक्षेप की माँग यह संकेत देती है कि यह केस अब केवल न्यायालय कक्ष तक सीमित नहीं रहा — इसके सामाजिक और राजनीतिक आयाम भी उतने ही जटिल हैं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेणुकास्वामी हत्याकांड में आरोपी प्रदोष ने क्या माँग की है?
प्रदोष ने बेंगलुरु की 59वीं CCH कोर्ट में अप्रूवर यानी सरकारी गवाह बनने की अर्जी दाखिल की है। इसका अर्थ है कि वह अपना अपराध स्वीकार कर दर्शन थूगुदीपा और अन्य आरोपियों के विरुद्ध गवाही देने को तैयार है।
अप्रूवर बनने से इस केस पर क्या असर पड़ेगा?
यदि कोर्ट प्रदोष की अर्जी मंजूर करती है, तो उसका बयान हत्याकांड की पूरी घटनाक्रम उजागर कर सकता है और मुकदमे की दिशा बदल सकता है। हालाँकि कानूनी तौर पर अप्रूवर का बयान अकेले दोषसिद्धि का आधार नहीं बनता, उसे अन्य साक्ष्यों से पुष्टि ज़रूरी होती है।
रेणुकास्वामी की हत्या कैसे हुई थी?
आरोप है कि जून 2024 में 33 वर्षीय रेणुकास्वामी को बेंगलुरु बुलाकर एक शेड में बंधक बनाया गया और बुरी तरह पीटा गया, जिससे उनकी मौत हो गई। बाद में उनका शव एक नाले के पास फेंक दिया गया था।
दर्शन थूगुदीपा की जमानत क्यों रद्द हुई?
सर्वोच्च न्यायालय ने दर्शन की जमानत रद्द कर उन्हें तत्काल पुनः गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जेल में उन्हें कोई वीआईपी सुविधा न दी जाए।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हैं और अगली सुनवाई कब है?
इस मामले में दर्शन थूगुदीपा, पवित्रा गौड़ा सहित कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अगली सुनवाई में अभियोजन पक्ष को प्रदोष की अप्रूवर अर्जी पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा, जिसके बाद कोर्ट अंतिम निर्णय लेगी।
राष्ट्र प्रेस
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