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रेणुकास्वामी मर्डर केस: बेंगलुरु कोर्ट ने अप्रूवर प्रदोष का बयान 7 सितंबर तक टाला

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रेणुकास्वामी मर्डर केस: बेंगलुरु कोर्ट ने अप्रूवर प्रदोष का बयान 7 सितंबर तक टाला

सारांश

रेणुकास्वामी हत्याकांड में अप्रूवर प्रदोष का बयान एक बार फिर टल गया — इस बार कर्नाटक उच्च न्यायालय में अभिनेता दर्शन की याचिका का इंतज़ार वजह बनी। अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी, और उच्च न्यायालय का फैसला ही तय करेगा कि अभियोजन पक्ष का यह अहम गवाह बयान दे पाएगा या नहीं।

मुख्य बातें

बेंगलुरु की 59वीं सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट ने 2 सितंबर को अप्रूवर प्रदोष का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया 7 सितंबर तक के लिए स्थगित की।
कर्नाटक उच्च न्यायालय में अभिनेता दर्शन की याचिका पर आदेश न आने के कारण कार्यवाही टली।
SPP प्रसन्ना कुमार ने उच्च न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय माँगा।
कोर्ट ने 25 अगस्त को प्रदोष को सशर्त माफी देते हुए उसे सरकारी गवाह का दर्जा दिया था।
रेणुकास्वामी का शव जून 2024 में बेंगलुरु में मिला था; मामले में दर्शन समेत कई आरोपी हैं।

बेंगलुरु की 59वीं सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को रेणुकास्वामी हत्याकांड में 14वें आरोपी प्रदोष का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया 7 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। प्रदोष को इस मामले में 'अप्रूवर' यानी सरकारी गवाह का दर्जा दिया गया है, और उसका बयान अभियोजन पक्ष के लिए अहम माना जा रहा है। कार्यवाही टलने की मुख्य वजह यह है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अभिनेता दर्शन की संबंधित याचिका पर अभी तक अपना आदेश नहीं सुनाया है।

मुख्य घटनाक्रम

जेल प्रशासन प्रदोष को बयान दर्ज कराने के उद्देश्य से पुलिस सुरक्षा के बीच कोर्ट लाया था। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) प्रसन्ना कुमार ने अदालत से अतिरिक्त समय माँगा और बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा अभी जारी है। उनके अनुरोध पर कोर्ट ने कार्यवाही 7 सितंबर तक के लिए टाल दी।

कोर्ट परिसर में प्रदोष ने आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी कीं और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। कोर्ट रूम से बाहर निकलते समय मीडिया के कैमरों को देखकर उसने 'थंब्स-अप' का इशारा किया, जो उपस्थित लोगों के बीच चर्चा का विषय बना।

दर्शन की उच्च न्यायालय याचिका

कन्नड़ अभिनेता दर्शन ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में अपील याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें प्रदोष को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी गई थी। याचिका में प्रदोष को प्रतिवादी बनाया गया है।

दर्शन ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि प्रदोष को अप्रूवर का दर्जा देने की प्रक्रिया में कानूनी और प्रक्रियात्मक खामियाँ हैं, और ट्रायल कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की माँग की है। उच्च न्यायालय का आदेश आने तक निचली अदालत में बयान दर्ज करने की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।

प्रदोष की सशर्त माफी और अप्रूवर का दर्जा

59वीं सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट ने 25 अगस्त को प्रदोष की सरकारी गवाह बनने की अर्जी आधिकारिक रूप से स्वीकार करते हुए उसे सशर्त माफी दे दी थी। इसके बाद कोर्ट ने गवाह के तौर पर उसका बयान दर्ज करने के लिए समन भी जारी किया था।

गौरतलब है कि प्रदोष उन आरोपियों में शामिल है जिन पर रेणुकास्वामी की हत्या का आरोप है। रेणुकास्वामी का शव जून 2024 में बेंगलुरु में मिला था। इस मामले में दर्शन समेत कई अन्य लोगों पर आरोप हैं।

मामले का पृष्ठभूमि संदर्भ

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब जून 2024 में बेंगलुरु में एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान रेणुकास्वामी के रूप में हुई। जाँच में कन्नड़ फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता दर्शन सहित कई लोगों का नाम सामने आया। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सेलिब्रिटी से जुड़े आपराधिक मामलों पर जनता की नज़र बेहद पैनी है।

अब सभी की निगाहें कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि प्रदोष का बयान दर्ज होगा या नहीं — और इसी पर अभियोजन पक्ष की आगे की रणनीति निर्भर करती है।

आगे क्या होगा

अगली सुनवाई 7 सितंबर को निर्धारित है। यदि तब तक उच्च न्यायालय का आदेश नहीं आता, तो कार्यवाही एक बार फिर स्थगित हो सकती है। SPP प्रसन्ना कुमार के अनुसार, उच्च न्यायालय का निर्णय ही आगे की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं दूसरी ओर बचाव पक्ष उच्च न्यायालय के ज़रिए इस प्रक्रिया को रोकने में जुटा है। यह रणनीति — जहाँ आरोपी खुद अप्रूवर के दर्जे को चुनौती दे — भारतीय आपराधिक मुकदमों में असामान्य नहीं है, लेकिन इससे पीड़ित परिवार के लिए न्याय की राह और लंबी होती जा रही है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर सुनवाई की तारीखों पर ही रुक जाती है; असली सवाल यह है कि उच्च न्यायालय का निर्णय ट्रायल की गति और अभियोजन की मज़बूती को किस हद तक प्रभावित करेगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेणुकास्वामी हत्याकांड में प्रदोष कौन है?
प्रदोष इस मामले में 14वाँ आरोपी है, जिसे बेंगलुरु की 59वीं सेशंस कोर्ट ने 25 अगस्त को सशर्त माफी देकर सरकारी गवाह (अप्रूवर) का दर्जा दिया है। अभियोजन पक्ष उसके बयान को अन्य आरोपियों के खिलाफ मामले के लिए अहम मानता है।
प्रदोष का बयान 7 सितंबर तक क्यों टाला गया?
कर्नाटक उच्च न्यायालय में अभिनेता दर्शन की याचिका पर अभी आदेश नहीं आया है, इसलिए SPP प्रसन्ना कुमार ने कोर्ट से अतिरिक्त समय माँगा। कोर्ट ने उनके अनुरोध पर कार्यवाही 7 सितंबर तक स्थगित कर दी।
दर्शन ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में क्या याचिका दायर की है?
दर्शन ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें प्रदोष को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने इस फैसले की कानूनी और प्रक्रियात्मक आधारों पर समीक्षा की माँग करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध भी किया है।
रेणुकास्वामी हत्याकांड क्या है?
रेणुकास्वामी का शव जून 2024 में बेंगलुरु में मिला था। इस मामले में कन्नड़ अभिनेता दर्शन समेत कई लोगों पर हत्या का आरोप है और पुलिस जाँच जारी है। यह मामला 'फैन मर्डर केस' के नाम से भी जाना जाता है।
अगली सुनवाई में क्या होने की उम्मीद है?
7 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में यदि कर्नाटक उच्च न्यायालय का आदेश आ जाता है, तो प्रदोष का बयान दर्ज किया जा सकता है। यदि उच्च न्यायालय का निर्णय तब भी लंबित रहा, तो कार्यवाही एक बार फिर स्थगित हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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