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बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने रामासी गांव को बनाया भारत का पहला 'सिंदूर ग्राम', 100 महिला किसानों को मिला लाभ

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बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने रामासी गांव को बनाया भारत का पहला 'सिंदूर ग्राम', 100 महिला किसानों को मिला लाभ

सारांश

भागलपुर के रामासी गांव को भारत का पहला 'सिंदूर ग्राम' बनाकर बीएयू सबौर ने एक नई मिसाल कायम की है — जहाँ धार्मिक परंपरा, वैज्ञानिक अनुसंधान और महिला सशक्तिकरण एक साथ मिलते हैं। डॉ. शाजीदा बानो के तीन साल के शोध और जीआई टैग की उपलब्धि इसे महज़ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ठोस आर्थिक पहल बनाती है।

मुख्य बातें

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने 18 जुलाई 2025 को भागलपुर के रामासी गांव को भारत का पहला 'सिंदूर ग्राम' घोषित किया।
एक एकड़ भूमि में 250 सीता सिंदूर पौधों का रोपण; 100 महिला किसानों को पौधे व कृषि उपकरण वितरित।
विश्वविद्यालय ने सिंदूर प्रौद्योगिकी का पेटेंट और सीता सिंदूर का जीआई टैग हासिल किया।
शाजीदा बानो के तीन वर्षों के शोध से यह तकनीक प्रयोगशाला से खेत तक पहुँची।
भविष्य में दानापुर कैंटोनमेंट में विश्व का पहला 'सिंदूर पार्क' विकसित करने की योजना।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने 18 जुलाई 2025 को भागलपुर जिले के रामासी गांव को भारत का पहला 'सिंदूर ग्राम' घोषित कर इसे औपचारिक रूप से गोद लिया। विश्वविद्यालय ने इस पहल को ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और कृषि आधारित रोज़गार सृजन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

कार्यक्रम का मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम की अगुवाई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने की, जिसमें जनप्रतिनिधि, वैज्ञानिक, महिला किसान और ग्रामीण शामिल हुए। इस अवसर पर एक एकड़ भूमि में 7 से 8 माह आयु के 250 सीता सिंदूर पौधों का रोपण किया गया। इसके साथ ही 100 महिला किसानों को सिंदूर के पौधे वितरित किए गए तथा उन्हें हॉर्टिकल्चर टूल किट, पावर नैपसैक स्प्रेयर और स्वीपिंग मशीन भी प्रदान की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. रवि केशरी ने सीता सिंदूर के धार्मिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए की। उन्होंने रेखांकित किया कि सिंदूर केवल सुहाग का प्रतीक नहीं, बल्कि प्राकृतिक रंग और विविध औद्योगिक उत्पादों के रूप में भी इसकी व्यापक उपयोगिता है।

तीन वर्षों की वैज्ञानिक मेहनत का परिणाम

कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक डॉ. वी. शाजीदा बानो के तीन वर्षों के अनुसंधान प्रयासों से सीता सिंदूर की तकनीक को प्रयोगशाला से सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाया गया है। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय ने सिंदूर प्रौद्योगिकी का पेटेंट तथा सीता सिंदूर का जीआई टैग हासिल कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्राकृतिक और हर्बल उत्पादों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। गौरतलब है कि एनाट्टो (Annatto) का उपयोग अमूल सहित खाद्य उद्योगों में प्राकृतिक रंग के रूप में किया जाता है, जबकि बिक्सिन ऑयल के औद्योगिक उपयोग भी व्यापक हैं।

जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

मुख्य अतिथि, सन्हौला के विधायक सुभानंद मुकेश और रामासी पंचायत की मुखिया शोभा देवी ने इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। दोनों ने कहा कि इस तरह की थीम-आधारित ग्राम विकास योजनाएँ स्थानीय महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में सहायक सिद्ध होंगी।

भविष्य की योजनाएँ

कुलपति ने बताया कि रामासी में आगे सिंदूर नर्सरी, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन और कुक्कुट पालन जैसी एकीकृत कृषि गतिविधियाँ शुरू की जाएंगी। किसानों को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से बाज़ार से जोड़ा जाएगा और गांव में सिंदूर प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जाएगी, जहाँ बीज से शुद्ध सिंदूर पाउडर तैयार किया जाएगा।

इसके अलावा जरदालू गांव और कमलम गांव जैसी थीम-आधारित ग्राम विकास योजनाओं पर भी काम होगा। सबसे महत्वाकांक्षी योजना के तहत दानापुर कैंटोनमेंट क्षेत्र में विश्व का पहला 'सिंदूर पार्क' विकसित करने की भी घोषणा की गई है। रामासी गांव की यह पहल भारत में कृषि-आधारित ग्रामीण पुनरुत्थान के एक नए मॉडल की नींव रख सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि भारत में ऐसी कई थीम-आधारित ग्राम योजनाएँ घोषणा के बाद क्रियान्वयन में पिछड़ गई हैं। महिला किसानों को उपकरण और पौधे देना स्वागतयोग्य है, लेकिन दीर्घकालिक आजीविका तभी सुनिश्चित होगी जब सिंदूर उत्पाद की माँग और मूल्य-श्रृंखला टिकाऊ हो।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का पहला 'सिंदूर ग्राम' कहाँ और कैसे बना?
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने 18 जुलाई 2025 को भागलपुर जिले के रामासी गांव को भारत का पहला 'सिंदूर ग्राम' घोषित कर इसे गोद लिया। इस अवसर पर एक एकड़ भूमि में 250 सीता सिंदूर पौधे लगाए गए और 100 महिला किसानों को पौधे व कृषि उपकरण वितरित किए गए।
सीता सिंदूर क्या है और इसका औद्योगिक महत्व क्या है?
सीता सिंदूर एक पौधा है जिसके बीजों से प्राकृतिक सिंदूर पाउडर तैयार किया जाता है। इसका उपयोग धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ खाद्य उद्योग में प्राकृतिक रंग (एनाट्टो) और बिक्सिन ऑयल के रूप में भी होता है; अमूल जैसी कंपनियाँ भी इसका उपयोग करती हैं।
बीएयू ने सिंदूर तकनीक के लिए क्या उपलब्धियाँ हासिल की हैं?
विश्वविद्यालय ने सिंदूर प्रौद्योगिकी का पेटेंट और सीता सिंदूर का भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग हासिल किया है। यह तकनीक वैज्ञानिक डॉ. वी. शाजीदा बानो के तीन वर्षों के शोध के बाद प्रयोगशाला से किसानों के खेतों तक पहुँची है।
रामासी गांव में आगे क्या विकास कार्य होंगे?
रामासी में सिंदूर नर्सरी, सिंदूर प्रसंस्करण इकाई, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन और कुक्कुट पालन जैसी एकीकृत गतिविधियाँ शुरू की जाएंगी। किसानों को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से बाज़ार से जोड़ा जाएगा।
विश्व का पहला 'सिंदूर पार्क' कहाँ बनेगा?
बीएयू के कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने दानापुर कैंटोनमेंट क्षेत्र में विश्व का पहला 'सिंदूर पार्क' विकसित करने की योजना की जानकारी दी है। यह पार्क सिंदूर से जुड़े कृषि, सांस्कृतिक और औद्योगिक पहलुओं को एक स्थान पर प्रदर्शित करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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