कृषि में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता: शिवराज सिंह चौहान का इंदौर में ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 जून 2025 को इंदौर में कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं, युवाओं और छोटे किसानों की भागीदारी बढ़ाना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार खेती को परंपरागत गतिविधि की बजाय एक तकनीक-आधारित और लाभकारी क्षेत्र के रूप में स्थापित करना चाहती है।
कृषि में महिलाओं की भूमिका
चौहान ने कहा कि गाँवों और खेतों में महिलाएँ पहले से ही कृषि की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी यह भूमिका अब केवल सहायक कार्यों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार नई नीतियों और तकनीकी सहायता के ज़रिए महिलाओं को कृषि निर्णय-प्रक्रिया और उत्पादन में सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में काम कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में महिला किसानों की ज़मीन पर स्वामित्व और ऋण सुविधाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
छोटे किसानों की आय और आधुनिक तकनीक
मंत्री ने छोटे किसानों की आय वृद्धि को केंद्र में रखते हुए कहा कि सटीक खेती (Precision Farming), ड्रोन तकनीक और डेटा-आधारित कृषि प्रबंधन से उत्पादन लागत घटाई जा सकती है और उपज बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने डिजिटल कृषि को भविष्य की खेती का आधार बताया। गौरतलब है कि भारत में 86% से अधिक किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं, जिनके लिए तकनीकी पहुँच अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
युवाओं को कृषि से जोड़ने की पहल
चौहान ने युवाओं से आग्रह किया कि वे कृषि को नवाचार और स्टार्टअप के नज़रिए से देखें। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से कृषि-उद्यमिता को प्रोत्साहन दे रही है। यह क्षेत्र रोज़गार और उद्यमिता के बड़े अवसर प्रदान कर सकता है, बशर्ते युवा इसे पेशेवर दृष्टि से अपनाएँ।
जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ खेती
मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया। अनियमित वर्षा, बदलते मौसम-चक्र और पर्यावरणीय दबाव के कारण खेती के पारंपरिक तरीके अब पर्याप्त नहीं रहे। उन्होंने जलवायु-संवेदनशील कृषि तकनीकों और टिकाऊ खेती को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
ब्रिक्स बैठक और वैश्विक खाद्य सुरक्षा
चौहान ने बताया कि आगामी ब्रिक्स कृषि बैठक में खाद्य सुरक्षा, किसानों के बीज-अधिकार और छोटे किसानों के हित जैसे विषयों को घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। उन्होंने इस एजेंडे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक कृषि विजन के अनुरूप बताया। बैठक के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों को मांडू और मांडवगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा, जिससे भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा सके। आने वाले समय में इन नीतियों के क्रियान्वयन की दिशा और गति ही तय करेगी कि कृषि क्षेत्र में समावेशिता का यह संकल्प ज़मीनी हकीकत बन पाता है या नहीं।