किसान आय और कृषि विविधीकरण पर बड़ा फैसला: शिवराज सिंह चौहान का लखनऊ में ऐलान
सारांश
Key Takeaways
- शिवराज सिंह चौहान ने 24 अप्रैल 2025 को लखनऊ में उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित किया।
- कृषि नीति अब एकरूप नहीं, बल्कि क्षेत्रीय जलवायु और फसल पैटर्न के अनुसार तैयार होगी।
- दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित की गई।
- फार्मर आईडी के जरिए कृषि लाभों का पारदर्शी और लक्षित वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
- नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों पर सख्त कानून लाने की तैयारी की जा रही है।
- प्राकृतिक खेती और कृषि प्रसंस्करण-निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समन्वित रणनीति बनाई जा रही है।
लखनऊ, 24 अप्रैल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में स्पष्ट किया कि देश की कृषि नीति अब एकरूप नहीं बल्कि क्षेत्रीय जलवायु, जल उपलब्धता और फसल पैटर्न के अनुसार तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान आय में वृद्धि, खाद्य सुरक्षा और कृषि विविधीकरण इस नई रणनीति के तीन मुख्य स्तंभ होंगे।
क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों की श्रृंखला: नई नीति की नींव
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देश को विभिन्न कृषि क्षेत्रों में विभाजित कर क्षेत्रीय सम्मेलनों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य हर राज्य की स्थानीय जरूरतों को समझकर उसी के अनुरूप कार्ययोजना बनाना है।
उन्होंने कहा कि दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना अब सर्वोच्च प्राथमिकता है, क्योंकि खाद्यान्न में भले ही उत्पादन बढ़ा हो, इन दोनों फसलों में भारत अभी भी आयात पर निर्भर है। यह एक महत्वपूर्ण विरोधाभास है — एक तरफ भारत कृषि महाशक्ति होने का दावा करता है, दूसरी तरफ हर साल अरबों रुपये के दलहन और खाद्य तेल का आयात होता है।
किसान आय बढ़ाने की पंचसूत्री रणनीति
केंद्रीय मंत्री ने किसान आय बढ़ाने के लिए पाँच प्रमुख प्राथमिकताएं गिनाईं — उत्पादन में वृद्धि, लागत में कमी, उचित मूल्य की गारंटी, नुकसान की भरपाई और कृषि को बाजार से जोड़ना।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए एकीकृत खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसमें फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन को जोड़ा जाएगा, ताकि कम जोत में भी आय के कई स्रोत बन सकें।
गौरतलब है कि भारत में लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं। ऐसे में यह एकीकृत मॉडल यदि जमीन पर सफलतापूर्वक लागू हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।
फार्मर आईडी, किसान क्रेडिट कार्ड और डिजिटल पारदर्शिता
शिवराज सिंह चौहान ने 'फार्मर आईडी' को कृषि लाभों के पारदर्शी और लक्षित वितरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे सब्सिडी और योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुँचेगा और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत पात्र किसानों को सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चलाने की घोषणा की गई। साथ ही 'प्रयोगशाला से खेत तक' की अवधारणा के तहत वैज्ञानिकों को गाँवों में जाकर किसानों से सीधा संवाद करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
नकली खाद-बीज पर सख्त कानून और उर्वरक मूल्य नियंत्रण
केंद्रीय मंत्री ने नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इसके खिलाफ सख्त कानून लाने की तैयारी है। यह मुद्दा किसानों के लिए अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि नकली आदान सीधे फसल उत्पादन और किसानों की आजीविका को प्रभावित करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की बढ़ती कीमतों का बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा — इसके लिए केंद्र सरकार आवश्यक वित्तीय सब्सिडी जारी रखेगी। यह निर्णय ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे माल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
प्राकृतिक खेती और निर्यात को बढ़ावा
प्राकृतिक खेती को टिकाऊ कृषि की दिशा में प्रमुख विकल्प बताते हुए चौहान ने कहा कि किसानों को इसके लिए प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता दी जाएगी। उत्तर भारत में कृषि प्रसंस्करण और निर्यात बढ़ाने के लिए समन्वित रणनीति पर काम किया जा रहा है।
इस सम्मेलन से प्राप्त सुझाव आगामी खरीफ और रबी सत्र की तैयारियों के साथ-साथ दीर्घकालिक कृषि विकास नीति का आधार बनेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये नीतियाँ समयबद्ध तरीके से लागू हों, तो 2027 तक किसानों की औसत आय में उल्लेखनीय सुधार संभव है।