मिजोरम को मछली निर्यातक राज्य बनाएगी केंद्र सरकार: मंत्री ललन सिंह का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने रविवार, 24 मई को आइजोल में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य मिजोरम को केवल मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने तक सीमित नहीं है — बल्कि आगे चलकर इसे एक मछली निर्यातक राज्य के रूप में स्थापित करना भी है। मंत्री ने मिजोरम सरकार द्वारा प्रस्तावित विकास परियोजनाओं को पूर्ण केंद्रीय समर्थन का आश्वासन भी दिया।
मुख्यमंत्री से मुलाकात और प्रमुख घोषणाएँ
लेंगपुई हवाई अड्डे पर पहुँचने के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री सिंह ने मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा से मुलाकात की। इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मंत्री का स्वागत राज्य के मंत्री सी. लालसाविवुंगा और लालथांसांगा ने किया।
बैठक में मंत्री सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार मिजोरम की कई महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। इनमें थोक मछली बाजार की स्थापना, एकीकृत एक्वा पार्क और धान-सह-मछली पालन समूहों का अधिक जिलों में विस्तार शामिल है।
पीएमएमएसवाई 2.0 से मिजोरम को मिलेगा लाभ
मंत्री सिंह ने जानकारी दी कि आगामी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) 2.0 में नए मछली तालाबों के निर्माण, मौजूदा तालाबों के जीर्णोद्धार एवं नवीनीकरण और मछली पालकों के लिए उन्नत सहायता प्रावधान शामिल होंगे। उन्होंने मिजोरम सरकार को प्रोत्साहित किया कि वह इस योजना के तहत अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए सुविचारित और ठोस प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रखे।
गौरतलब है कि मिजोरम एक भूमि-रुद्ध (landlocked) पूर्वोत्तर राज्य है, जहाँ मछली पालन की व्यापक संभावना होने के बावजूद अब तक निर्यात क्षमता विकसित नहीं हो पाई है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर राज्यों के कृषि और मत्स्य क्षेत्र को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर दे रही है।
डेयरी विकास: 90:10 वित्तपोषण का प्रस्ताव
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना के लिए तैयार की जा रही नई केंद्रीय योजना में वित्तपोषण अनुपात को संशोधित कर 90:10 (केंद्र:राज्य) के अधिक अनुकूल ढाँचे में लाने का प्रस्ताव है। यह बदलाव छोटे और पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष रूप से राहतकारी होगा।
मंत्री सिंह ने आश्वासन दिया कि मिजोरम द्वारा माँगी गई मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के लिए एक और मंजूरी पर विचार किया जाएगा। साथ ही उन्होंने राज्य को सलाह दी कि आगे की स्वीकृतियों की प्रतीक्षा के दौरान पहले से स्वीकृत इकाइयों को प्राथमिकता से लागू किया जाए।
पशु आहार और दीर्घकालिक स्थिरता
मंत्री ने पशु आहार के लिए परिवहन सब्सिडी के मुद्दे पर आगे काम करने का संकेत दिया। उन्होंने दीर्घकालिक स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि मिजोरम में पशु आहार की स्थानीय खेती को बढ़ावा देना सबसे व्यावहारिक और लाभकारी उपाय होगा, और केंद्र इस दिशा में राज्य की पहलों को पूरा समर्थन देगा।
यह दौरा मिजोरम के मत्स्य और पशुपालन क्षेत्र के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रस्तावित परियोजनाओं को केंद्र की औपचारिक स्वीकृति कब तक मिलती है और पीएमएमएसवाई 2.0 के तहत राज्य कितनी तेज़ी से प्रस्ताव तैयार कर पाता है।