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मिजोरम को मछली निर्यातक राज्य बनाएगी केंद्र सरकार: मंत्री ललन सिंह का ऐलान

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मिजोरम को मछली निर्यातक राज्य बनाएगी केंद्र सरकार: मंत्री ललन सिंह का ऐलान

सारांश

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने आइजोल में मुख्यमंत्री लालदुहोमा से मुलाकात कर मिजोरम को मछली निर्यातक राज्य बनाने का संकल्प दोहराया। पीएमएमएसवाई 2.0, एकीकृत एक्वा पार्क और 90:10 डेयरी वित्तपोषण जैसे प्रस्तावों पर केंद्र के समर्थन का आश्वासन मिला।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने 24 मई को आइजोल में मुख्यमंत्री लालदुहोमा से मुलाकात की।
केंद्र का लक्ष्य मिजोरम को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ मछली निर्यातक राज्य बनाना है।
थोक मछली बाजार , एकीकृत एक्वा पार्क और धान-सह-मछली पालन समूहों के विस्तार को मंजूरी दिलाने की दिशा में काम जारी।
आगामी पीएमएमएसवाई 2.0 में नए तालाब निर्माण, जीर्णोद्धार और मछली पालकों को बेहतर सहायता का प्रावधान।
दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों के लिए वित्तपोषण अनुपात 90:10 (केंद्र:राज्य) करने का प्रस्ताव।
मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों और पशु आहार परिवहन सब्सिडी पर भी केंद्र आगे विचार करेगा।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने रविवार, 24 मई को आइजोल में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य मिजोरम को केवल मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने तक सीमित नहीं है — बल्कि आगे चलकर इसे एक मछली निर्यातक राज्य के रूप में स्थापित करना भी है। मंत्री ने मिजोरम सरकार द्वारा प्रस्तावित विकास परियोजनाओं को पूर्ण केंद्रीय समर्थन का आश्वासन भी दिया।

मुख्यमंत्री से मुलाकात और प्रमुख घोषणाएँ

लेंगपुई हवाई अड्डे पर पहुँचने के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री सिंह ने मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा से मुलाकात की। इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मंत्री का स्वागत राज्य के मंत्री सी. लालसाविवुंगा और लालथांसांगा ने किया।

बैठक में मंत्री सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार मिजोरम की कई महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। इनमें थोक मछली बाजार की स्थापना, एकीकृत एक्वा पार्क और धान-सह-मछली पालन समूहों का अधिक जिलों में विस्तार शामिल है।

पीएमएमएसवाई 2.0 से मिजोरम को मिलेगा लाभ

मंत्री सिंह ने जानकारी दी कि आगामी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) 2.0 में नए मछली तालाबों के निर्माण, मौजूदा तालाबों के जीर्णोद्धार एवं नवीनीकरण और मछली पालकों के लिए उन्नत सहायता प्रावधान शामिल होंगे। उन्होंने मिजोरम सरकार को प्रोत्साहित किया कि वह इस योजना के तहत अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए सुविचारित और ठोस प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रखे।

गौरतलब है कि मिजोरम एक भूमि-रुद्ध (landlocked) पूर्वोत्तर राज्य है, जहाँ मछली पालन की व्यापक संभावना होने के बावजूद अब तक निर्यात क्षमता विकसित नहीं हो पाई है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर राज्यों के कृषि और मत्स्य क्षेत्र को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर दे रही है।

डेयरी विकास: 90:10 वित्तपोषण का प्रस्ताव

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना के लिए तैयार की जा रही नई केंद्रीय योजना में वित्तपोषण अनुपात को संशोधित कर 90:10 (केंद्र:राज्य) के अधिक अनुकूल ढाँचे में लाने का प्रस्ताव है। यह बदलाव छोटे और पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष रूप से राहतकारी होगा।

मंत्री सिंह ने आश्वासन दिया कि मिजोरम द्वारा माँगी गई मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के लिए एक और मंजूरी पर विचार किया जाएगा। साथ ही उन्होंने राज्य को सलाह दी कि आगे की स्वीकृतियों की प्रतीक्षा के दौरान पहले से स्वीकृत इकाइयों को प्राथमिकता से लागू किया जाए।

पशु आहार और दीर्घकालिक स्थिरता

मंत्री ने पशु आहार के लिए परिवहन सब्सिडी के मुद्दे पर आगे काम करने का संकेत दिया। उन्होंने दीर्घकालिक स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि मिजोरम में पशु आहार की स्थानीय खेती को बढ़ावा देना सबसे व्यावहारिक और लाभकारी उपाय होगा, और केंद्र इस दिशा में राज्य की पहलों को पूरा समर्थन देगा।

यह दौरा मिजोरम के मत्स्य और पशुपालन क्षेत्र के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रस्तावित परियोजनाओं को केंद्र की औपचारिक स्वीकृति कब तक मिलती है और पीएमएमएसवाई 2.0 के तहत राज्य कितनी तेज़ी से प्रस्ताव तैयार कर पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्वोत्तर की भूमि-रुद्ध भौगोलिक स्थिति और कोल्ड चेन अवसंरचना की कमी को देखते हुए यह लक्ष्य महत्त्वाकांक्षी भी है। पिछले वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कई कृषि-आधारित योजनाएँ घोषित हुईं, पर क्रियान्वयन की गति अपेक्षाओं से पीछे रही। असली परीक्षा यह होगी कि पीएमएमएसवाई 2.0 के तहत मिजोरम के प्रस्तावों को कितनी जल्दी औपचारिक स्वीकृति मिलती है और निर्यात के लिए आवश्यक प्रसंस्करण व लॉजिस्टिक्स ढाँचा वास्तव में खड़ा होता है या नहीं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार मिजोरम को मछली निर्यातक राज्य कैसे बनाएगी?
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के अनुसार, थोक मछली बाजार, एकीकृत एक्वा पार्क और धान-सह-मछली पालन समूहों के विस्तार जैसी परियोजनाओं को मंजूरी देकर मिजोरम की मत्स्य उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाएगी। पीएमएमएसवाई 2.0 के तहत नए तालाब निर्माण और मछली पालकों को बेहतर सहायता भी इस दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।
पीएमएमएसवाई 2.0 में मिजोरम के लिए क्या नया है?
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) 2.0 में नए मछली तालाबों का निर्माण, मौजूदा तालाबों का जीर्णोद्धार एवं नवीनीकरण और मछली पालकों के लिए उन्नत सहायता प्रावधान शामिल होंगे। मंत्री ने मिजोरम सरकार को इस योजना के तहत सुविचारित प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
मिजोरम में डेयरी विकास के लिए 90:10 वित्तपोषण प्रस्ताव क्या है?
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने बताया कि दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों के लिए नई केंद्रीय योजना में वित्तपोषण अनुपात को मौजूदा स्तर से बदलकर 90:10 (केंद्र:राज्य) करने का प्रस्ताव है। यह छोटे पहाड़ी राज्यों के लिए आर्थिक रूप से अधिक व्यावहारिक होगा।
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की आइजोल यात्रा का उद्देश्य क्या था?
24 मई को आइजोल पहुँचे केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने मुख्यमंत्री लालदुहोमा से मुलाकात कर मत्स्य पालन, डेयरी और पशुपालन क्षेत्र की विकास परियोजनाओं पर चर्चा की। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
मिजोरम में पशु आहार और पशु चिकित्सा सेवाओं पर केंद्र क्या करेगा?
मंत्री सिंह ने आश्वासन दिया कि मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के लिए अतिरिक्त मंजूरी पर विचार किया जाएगा और पशु आहार परिवहन सब्सिडी के मुद्दे पर आगे काम होगा। दीर्घकालिक समाधान के रूप में उन्होंने राज्य में पशु आहार की स्थानीय खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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