असम को मत्स्य और डेयरी हब बनाने की राह: CM हिमंत सरमा की केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह से मुलाकात की और असम को देश का प्रमुख मत्स्य उत्पादन एवं डेयरी केंद्र बनाने की दिशा में विस्तृत रणनीति पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच राज्य में मछली उत्पादन, निर्यात संवर्धन और डेयरी अवसंरचना के विकास से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर विचार-विमर्श हुआ।
मत्स्य क्षेत्र: वैल्यू चेन और निर्यात पर जोर
बैठक में असम के मत्स्य क्षेत्र की संभावनाओं को साकार करने के लिए वैल्यू चेन मजबूत करने, प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, "आने वाले दिनों में इन विचारों को ठोस परिणामों में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि असम देश का प्रमुख मछली उत्पादन और निर्यात केंद्र बन सके।" यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के राज्य कृषि-आधारित निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
डेयरी क्षेत्र: सहकारी समितियों से लेकर आधुनिक संयंत्र तक
डेयरी क्षेत्र में दोनों नेताओं ने डेयरी सहकारी समितियों को सशक्त बनाने, पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, पशु औषधि केंद्र स्थापित करने और टेट्रापैक (UHT) एवं मिल्क पाउडर संयंत्र लगाने पर चर्चा की। इसके अलावा कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से पशुधन की गुणवत्ता सुधारने की योजना पर भी विचार हुआ। गौरतलब है कि असम में दुग्ध उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन आधुनिक प्रसंस्करण ढांचे की कमी एक बड़ी चुनौती रही है।
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने बैठक को "सौहार्दपूर्ण और सार्थक" बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से असम के मत्स्य और डेयरी क्षेत्रों का तेजी से विकास होगा, जिससे किसानों, उद्यमियों और ग्रामीण आजीविका के लिए नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने प्रोसेसिंग ढांचे के विस्तार और मछली निर्यात को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
नई दिल्ली में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के.के. द्विवेदी, असम भवन की रेजिडेंट कमिश्नर कविता पद्मनाभन तथा संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह बैठक केंद्र-राज्य समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा के आधार पर आने वाले हफ्तों में ठोस कार्ययोजना तैयार किए जाने की उम्मीद है। यदि प्रस्तावित अवसंरचना परियोजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो असम न केवल घरेलू बाजार में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मत्स्य निर्यात में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है।