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असम को मत्स्य और डेयरी हब बनाने की राह: CM हिमंत सरमा की केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से अहम बैठक

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असम को मत्स्य और डेयरी हब बनाने की राह: CM हिमंत सरमा की केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से अहम बैठक

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से मिलकर राज्य को देश का प्रमुख मत्स्य और डेयरी हब बनाने की योजना पर विचार-विमर्श किया — वैल्यू चेन, प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सहकारी समितियों को मजबूत करना एजेंडे में रहा।

मुख्य बातें

असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह से मुलाकात कर मत्स्य व डेयरी क्षेत्र पर चर्चा की।
असम को देश का प्रमुख मछली उत्पादन और निर्यात केंद्र बनाने के लिए वैल्यू चेन और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर।
डेयरी क्षेत्र में टेट्रापैक (UHT) एवं मिल्क पाउडर संयंत्र , पशु औषधि केंद्र और कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम की योजना।
डेयरी सहकारी समितियों को सशक्त बनाने और पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर सहमति।
द्विवेदी (अतिरिक्त मुख्य सचिव) और रेजिडेंट कमिश्नर कविता पद्मनाभन भी उपस्थित रहे।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह से मुलाकात की और असम को देश का प्रमुख मत्स्य उत्पादन एवं डेयरी केंद्र बनाने की दिशा में विस्तृत रणनीति पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच राज्य में मछली उत्पादन, निर्यात संवर्धन और डेयरी अवसंरचना के विकास से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर विचार-विमर्श हुआ।

मत्स्य क्षेत्र: वैल्यू चेन और निर्यात पर जोर

बैठक में असम के मत्स्य क्षेत्र की संभावनाओं को साकार करने के लिए वैल्यू चेन मजबूत करने, प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, "आने वाले दिनों में इन विचारों को ठोस परिणामों में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि असम देश का प्रमुख मछली उत्पादन और निर्यात केंद्र बन सके।" यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के राज्य कृषि-आधारित निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

डेयरी क्षेत्र: सहकारी समितियों से लेकर आधुनिक संयंत्र तक

डेयरी क्षेत्र में दोनों नेताओं ने डेयरी सहकारी समितियों को सशक्त बनाने, पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, पशु औषधि केंद्र स्थापित करने और टेट्रापैक (UHT) एवं मिल्क पाउडर संयंत्र लगाने पर चर्चा की। इसके अलावा कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से पशुधन की गुणवत्ता सुधारने की योजना पर भी विचार हुआ। गौरतलब है कि असम में दुग्ध उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन आधुनिक प्रसंस्करण ढांचे की कमी एक बड़ी चुनौती रही है।

केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने बैठक को "सौहार्दपूर्ण और सार्थक" बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से असम के मत्स्य और डेयरी क्षेत्रों का तेजी से विकास होगा, जिससे किसानों, उद्यमियों और ग्रामीण आजीविका के लिए नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने प्रोसेसिंग ढांचे के विस्तार और मछली निर्यात को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता भी जताई।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद

नई दिल्ली में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के.के. द्विवेदी, असम भवन की रेजिडेंट कमिश्नर कविता पद्मनाभन तथा संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह बैठक केंद्र-राज्य समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आगे क्या होगा

दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा के आधार पर आने वाले हफ्तों में ठोस कार्ययोजना तैयार किए जाने की उम्मीद है। यदि प्रस्तावित अवसंरचना परियोजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो असम न केवल घरेलू बाजार में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मत्स्य निर्यात में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दशकों से प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी इन्हें निर्यात योग्य नहीं बना पाई। यह बैठक नीतिगत इच्छाशक्ति का संकेत है, पर असली परीक्षा यह है कि क्या केंद्रीय योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीण मछुआरों और पशुपालकों तक पहुंचेगा या यह महज अवसंरचना अनुबंधों तक सिमट जाएगा। पूर्वोत्तर में पिछली कई 'हब' परियोजनाएं क्रियान्वयन की कमजोरियों के कारण लक्ष्य से पीछे रही हैं — इस बार ठोस समयसीमा और जवाबदेही तंत्र की घोषणा जरूरी होगी।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम को मत्स्य और डेयरी हब बनाने की योजना क्या है?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के साथ बैठक में राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने, निर्यात को प्रोत्साहित करने, वैल्यू चेन मजबूत करने और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना पर चर्चा की। डेयरी क्षेत्र में सहकारी समितियों को सशक्त बनाने और आधुनिक संयंत्र लगाने की भी बात हुई।
इस बैठक में डेयरी क्षेत्र के लिए क्या प्रस्ताव रखे गए?
बैठक में टेट्रापैक (UHT) और मिल्क पाउडर संयंत्र स्थापित करने, पशु औषधि केंद्र खोलने, पशु चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने और कृत्रिम गर्भाधान के जरिए पशुधन की गुणवत्ता सुधारने पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस योजना से असम के किसानों और ग्रामीणों को क्या फायदा होगा?
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के अनुसार, केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से किसानों, उद्यमियों और ग्रामीण आजीविका के लिए नए अवसर पैदा होंगे। मत्स्य निर्यात और डेयरी प्रसंस्करण में वृद्धि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
बैठक में कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे?
नई दिल्ली में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के.के. द्विवेदी, असम भवन की रेजिडेंट कमिश्नर कविता पद्मनाभन और संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
असम में मत्स्य पालन क्षेत्र की क्या संभावनाएं हैं?
असम अपनी नदियों, जलाशयों और अनुकूल जलवायु के कारण मत्स्य उत्पादन की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। हालांकि, प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार तक पहुंच की कमी के कारण यह क्षेत्र अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाया है, जिसे अब विकसित करने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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