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असम में डेयरी क्रांति: CM हिमंत सरमा का प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य, 25,000 किसानों को सब्सिडी

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असम में डेयरी क्रांति: CM हिमंत सरमा का प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य, 25,000 किसानों को सब्सिडी

सारांश

असम सरकार ने डेयरी क्षेत्र में बड़ा दांव लगाया है — प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य और 25,000 से अधिक किसानों को सब्सिडी। CM सरमा का यह कदम राज्य को दूध आयात से आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने और ग्रामीण रोज़गार को नई दिशा देने का प्रयास है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 2 जुलाई 2026 को राज्य में प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य घोषित किया।
राज्य सरकार 25,000 से अधिक डेयरी किसानों को सब्सिडी दे रही है ताकि उत्पादन और आय दोनों बढ़ें।
वित्तीय सहायता के साथ-साथ वैज्ञानिक प्रजनन तकनीक, बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएँ और संगठित डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
दूध उत्पादन बढ़ने से अन्य राज्यों से दूध के आयात पर निर्भरता घटेगी और प्रसंस्करण, परिवहन, विपणन क्षेत्रों में नए रोज़गार मिलेंगे।
सरकार ने डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन को असम के समग्र विकास की रणनीति का प्रमुख आधार बताया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 2 जुलाई 2026 को राज्य के डेयरी क्षेत्र को नई ऊँचाई देने का संकल्प दोहराया और घोषणा की कि सरकार का लक्ष्य प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन हासिल करना है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के केंद्र में 25,000 से अधिक डेयरी किसानों को सब्सिडी देकर ग्रामीण परिवारों की आय और पोषण स्तर दोनों को सुधारना है।

मुख्यमंत्री का संदेश और लक्ष्य

मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'दूध का हर गिलास एक परिवार का पोषण करता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है।' उन्होंने स्पष्ट किया, 'हमारा मिशन प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध का उत्पादन करना है।'

यह ऐसे समय में आया है जब असम अन्य राज्यों से दूध के आयात पर निर्भर रहा है और ग्रामीण रोज़गार को टिकाऊ आधार देने की माँग लगातार उठती रही है। गौरतलब है कि डेयरी क्षेत्र पहले से ही राज्य के छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय का एक अहम स्रोत बन चुका है।

सरकार की योजनाएँ और हस्तक्षेप

राज्य सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है। इनमें वित्तीय सहायता, पशुधन प्रबंधन में सुधार, वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों का उपयोग और बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएँ शामिल हैं। सब्सिडी योजना के तहत किसानों को आधुनिक डेयरी तकनीक अपनाने, उन्नत नस्ल के पशु खरीदने और डेयरी संचालन के आधुनिकीकरण में सहायता दी जा रही है।

इसके अलावा, चारा उपलब्धता बढ़ाने, दूध संग्रहण की बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने और संगठित डेयरी फार्मिंग को प्रोत्साहन देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

आम जनता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

अधिकारियों के अनुसार, दूध उत्पादन में वृद्धि से दूसरे राज्यों से दूध के आयात पर निर्भरता घटेगी और ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए रास्ते खुलेंगे। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि बढ़े हुए उत्पादन से न केवल पोषण सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि डेयरी मूल्य श्रृंखला के अंतर्गत प्रसंस्करण, परिवहन और विपणन जैसे क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

कृषि के साथ-साथ पशुपालन से होने वाली अतिरिक्त आमदनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व प्रदान कर रही है। राज्य सरकार ने डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन को असम के समग्र विकास की रणनीति का अहम स्तंभ घोषित किया है।

आगे की राह

अधिकारियों ने विश्वास जताया है कि सरकार की निरंतर नीतिगत सहायता और किसानों की सक्रिय भागीदारी से असम प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन के लक्ष्य की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो असम पूर्वोत्तर भारत में डेयरी उत्पादन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — पूर्वोत्तर राज्यों में कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और दूरदराज़ के क्षेत्रों में संग्रहण की चुनौतियाँ पुरानी हैं। 25,000 किसानों को सब्सिडी देना शुरुआत है, लेकिन बिना मज़बूत मूल्य श्रृंखला और सुनिश्चित खरीद व्यवस्था के, किसान बाज़ार की अनिश्चितता के सामने कमज़ोर रह सकते हैं। राज्य सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि उत्पादन लक्ष्य किस समय-सीमा में हासिल किया जाएगा और इसकी निगरानी का तंत्र क्या होगा।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम सरकार का डेयरी क्षेत्र में प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य क्या है?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 2 जुलाई 2026 को घोषणा की कि असम सरकार का लक्ष्य राज्य में प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन हासिल करना है। इसके लिए 25,000 से अधिक डेयरी किसानों को सब्सिडी दी जा रही है और वैज्ञानिक प्रजनन तकनीक व बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
असम में डेयरी किसानों को सरकार से क्या सहायता मिल रही है?
राज्य सरकार 25,000 से अधिक डेयरी किसानों को सब्सिडी दे रही है जिसमें आधुनिक डेयरी तकनीक अपनाने, उन्नत नस्ल के पशु खरीदने और डेयरी संचालन के आधुनिकीकरण में मदद शामिल है। इसके साथ ही चारा उपलब्धता, दूध संग्रहण की बुनियादी सुविधाएँ और बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएँ भी प्रदान की जा रही हैं।
असम में दूध उत्पादन बढ़ाने से ग्रामीण परिवारों को क्या फायदा होगा?
अधिकारियों के अनुसार, दूध उत्पादन बढ़ने से अन्य राज्यों से दूध के आयात पर निर्भरता घटेगी और ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए अवसर खुलेंगे। प्रसंस्करण, परिवहन और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी रोज़गार के नए मौके पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी।
CM सरमा ने डेयरी क्षेत्र को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'दूध का हर गिलास एक परिवार का पोषण करता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण आय बढ़ाने और परिवारों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
असम की डेयरी विकास रणनीति में और क्या शामिल है?
असम सरकार ने डेयरी के साथ-साथ मत्स्य पालन और पशुपालन को राज्य के समग्र विकास की रणनीति का प्रमुख स्तंभ बताया है। संगठित डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने के अलावा, कृषि और पशुपालन के संयुक्त मॉडल से ग्रामीण परिवारों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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