15 जुलाई 2026
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असम CM हिमंता बिस्वा सरमा का आह्वान: हर निर्वाचन क्षेत्र बने 'आत्मनिर्भर', सिंडिकेट कल्चर खत्म होगा

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असम CM हिमंता बिस्वा सरमा का आह्वान: हर निर्वाचन क्षेत्र बने 'आत्मनिर्भर', सिंडिकेट कल्चर खत्म होगा

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विधायकों को एक नई ज़िम्मेदारी सौंपी — हर विधानसभा क्षेत्र को दूध, मछली और सब्जियों में आत्मनिर्भर बनाओ। उनका तर्क है कि यही असम से 'सिंडिकेट कल्चर' को जड़ से उखाड़ने का एकमात्र रास्ता है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 15 जुलाई 2026 को विधानसभा में विधायकों से हर निर्वाचन क्षेत्र को 'आत्मनिर्भर निर्वाचन क्षेत्र' बनाने का आह्वान किया।
दूध, मछली, सब्जियाँ, आलू और अंडे जैसी आवश्यक वस्तुएँ स्थानीय स्तर पर उत्पादित करने पर ज़ोर दिया गया।
सरमा ने कहा कि आत्मनिर्भरता ही असम में सिंडिकेट कल्चर समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
अमूल के 80 लाख से 1 करोड़ लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन का हवाला देते हुए असम में दुग्ध सहकारी समितियाँ बढ़ाने पर बल दिया।
राज्य के प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराई गई।
अगले पाँच वर्षों को असम के विकास के लिए निर्णायक बताया गया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को गुवाहाटी में राज्य विधानसभा को संबोधित करते हुए सभी विधायकों से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों को स्वतंत्र आर्थिक इकाइयों में तब्दील करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दूध, मछली, मांस, सब्जियाँ और कृषि उत्पादों के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता समाप्त कर असम को खाद्य उत्पादन में पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाना होगा।

सिंडिकेट कल्चर पर सीधा प्रहार

सरमा ने विधानसभा में राज्य सरकार के विकास एजेंडे पर चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि 'सिंडिकेट कल्चर' को समाप्त करने का सबसे कारगर उपाय आत्मनिर्भरता ही है। उन्होंने कहा, 'सिंडिकेट प्रणाली को खत्म करने का जवाब आत्मनिर्भरता है। एक बार असम आत्मनिर्भर हो जाए, तो राज्य के बाहर से संसाधन मँगाने की ज़रूरत ही नहीं रहेगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम में बाहरी राज्यों से आने वाली आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापारिक गुटों के नियंत्रण को लेकर लंबे समय से चिंताएँ जताई जाती रही हैं।

आत्मनिर्भर निर्वाचन क्षेत्र: मुख्यमंत्री का विज़न

मुख्यमंत्री ने विधायकों से डेयरी, मत्स्य पालन, पशुधन और कृषि क्षेत्रों में निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा, 'प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को आत्मनिर्भर निर्वाचन क्षेत्र बनने का लक्ष्य रखना चाहिए — जहाँ दूध, मछली, सब्जियाँ, आलू और अंडे जैसी ज़रूरी चीज़ें पड़ोसी क्षेत्रों या राज्य के बाहर से मँगाने की बजाय स्थानीय स्तर पर उत्पादित हों।' सरमा ने यह भी जोड़ा कि 'आत्मनिर्भर भारत' और 'आत्मनिर्भर असम' के बाद अब 'आत्मनिर्भर निर्वाचन क्षेत्र' की दिशा में काम करना होगा।

अमूल से प्रेरणा, असम में दुग्ध क्रांति का लक्ष्य

डेयरी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी अमूल का उदाहरण देते हुए सरमा ने कहा कि यदि अमूल प्रतिदिन 80 लाख से 1 करोड़ लीटर से अधिक दूध का उत्पादन कर सकती है, तो असम भी दर्जनों सफल दुग्ध सहकारी समितियाँ स्थापित कर अग्रणी दूध उत्पादक राज्य के रूप में उभर सकता है। उन्होंने विधायकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत दुग्ध सहकारी समितियों, मछली पालन, सुअर पालन और मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। गौरतलब है कि असम वर्तमान में दूध और मछली की महत्त्वपूर्ण मात्रा पड़ोसी राज्यों से आयात करता है।

भूमि अधिग्रहण और जन भागीदारी

मुख्यमंत्री सरमा ने विधायकों से सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में जनता का सहयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया, विशेषकर उन मामलों में जहाँ भूमि अधिग्रहण आवश्यक हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूस्वामियों को उचित मुआवज़ा और विकास प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी मिलनी चाहिए।

अगले पाँच वर्ष निर्णायक, हर जिले में मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य

सरमा ने असम के विकास के लिए अगले पाँच वर्षों को निर्णायक बताया और कहा कि पिछले कार्यकाल में रखी गई मज़बूत नींव पर अब विकास को तेज़ गति देने की ज़रूरत है। स्वास्थ्य सेवा के मोर्चे पर उन्होंने दोहराया कि राज्य की दीर्घकालिक रणनीति के तहत असम के प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब राज्य के दूरदराज़ के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी व्यावहारिक चुनौतियाँ कम नहीं हैं — असम की भौगोलिक विविधता, बाढ़ की मार और कृषि अवसंरचना की कमज़ोरियाँ इसे जटिल बनाती हैं। सिंडिकेट कल्चर की जड़ें केवल आपूर्ति श्रृंखला में नहीं, बल्कि ठेकेदारी और वितरण तंत्र में भी हैं — जिन्हें उत्पादन बढ़ाने भर से नहीं तोड़ा जा सकता। अमूल का मॉडल गुजरात की सहकारी परंपरा और दशकों की संस्थागत मेहनत पर खड़ा है; असम में वैसी ज़मीन तैयार करने के लिए विधायकों के भाषणों से परे ठोस निवेश और नीतिगत निरंतरता चाहिए। असली कसौटी यह होगी कि सरमा सरकार विधायकों की जवाबदेही के लिए कोई मापन ढाँचा तय करती है या नहीं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमंता बिस्वा सरमा के 'आत्मनिर्भर निर्वाचन क्षेत्र' से क्या मतलब है?
इसका अर्थ है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र दूध, मछली, सब्जियाँ, आलू और अंडे जैसी आवश्यक वस्तुएँ स्थानीय स्तर पर उत्पादित करे और अन्य राज्यों या पड़ोसी क्षेत्रों से आयात पर निर्भरता समाप्त करे। मुख्यमंत्री सरमा ने 15 जुलाई 2026 को विधानसभा में यह अवधारणा रखी।
सरमा ने सिंडिकेट कल्चर और आत्मनिर्भरता को कैसे जोड़ा?
सरमा के अनुसार, असम में बाहरी राज्यों से आने वाली खाद्य आपूर्ति पर व्यापारिक गुटों का नियंत्रण 'सिंडिकेट कल्चर' को बढ़ावा देता है। जब राज्य स्थानीय उत्पादन से आत्मनिर्भर हो जाएगा, तो बाहरी संसाधनों पर निर्भरता खत्म होगी और सिंडिकेट की पकड़ कमज़ोर पड़ेगी।
असम के दूध उत्पादन को लेकर मुख्यमंत्री ने क्या लक्ष्य रखा?
सरमा ने अमूल का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि अमूल प्रतिदिन 80 लाख से 1 करोड़ लीटर से अधिक दूध का उत्पादन कर सकती है, तो असम में भी दर्जनों सफल दुग्ध सहकारी समितियाँ स्थापित कर राज्य को अग्रणी दूध उत्पादक बनाया जा सकता है। इसके लिए विधायकों से सहकारी समितियाँ बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।
असम में स्वास्थ्य सेवा के विस्तार को लेकर क्या घोषणा हुई?
मुख्यमंत्री सरमा ने असम के प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराई। यह राज्य की दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है।
इस पहल से असम के किसानों और ग्रामीण समुदायों पर क्या असर पड़ेगा?
मुख्यमंत्री के अनुसार, डेयरी, मत्स्य पालन, सुअर पालन और मुर्गी पालन को बढ़ावा देने से ग्रामीण आजीविका मज़बूत होगी और स्थानीय उत्पादन में वृद्धि होगी। सरकारी योजनाओं के तहत विधायकों को इन क्षेत्रों में निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर अभियान चलाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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