जमशेदपुर हिमांशु सिंह हत्याकांड: चार और गिरफ्तार, कुल 9 आरोपी दबोचे; मुख्य आरोपी पर ₹2 लाख का इनाम
सारांश
मुख्य बातें
जमशेदपुर में करणी सेना के युवा नेता हिमांशु सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने 7 जुलाई को चार और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिससे इस मामले में अब तक पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या 9 हो गई है। मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा अभी भी फरार है और उसकी गिरफ्तारी पर ₹2 लाख का इनाम घोषित किया गया है।
ताज़ा गिरफ्तारियाँ और बरामदगी
ताज़ा कार्रवाई में पुलिस ने लखींद्र लोहार, जगदीश मंडल और विजय महानंद को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। जाँच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज में लखींद्र लोहार की घटना में सक्रिय भूमिका दिखाई दी, जिसके बाद उसे दबोचा गया।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से चापड़, कुल्हाड़ी, भुजाली और चाकू बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल हत्या में किए जाने का आरोप है। इससे पहले रविवार की शाम डबल डाउन बार के मालिक नीरज सिंह को राजस्थान के खाटूश्यामजी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर लाया जा रहा है।
छह SIT का गठन, बहु-राज्य छापेमारी
मामले की जाँच के लिए नवनियुक्त वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर छह विशेष जाँच दल (SIT) गठित किए गए हैं। ये टीमें तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर झारखंड के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस ने आम जनता से मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा के बारे में सूचना देने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
27 जून की रात जमशेदपुर के बिष्टूपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह पर धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जाँच में महिलाओं से कथित छेड़खानी का विरोध करने के बाद विवाद बढ़ने की बात सामने आई थी।
पुलिस कार्यप्रणाली पर उठे सवाल और सरकारी कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर तीखे सवाल उठे थे। इसके जवाब में झारखंड की राज्य सरकार ने तत्कालीन SSP समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले से ही सियासी विमर्श के केंद्र में है। गौरतलब है कि यह मामला अब केवल एक हत्याकांड नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की भी परीक्षा बन चुका है।
जाँच एजेंसियाँ मुख्य आरोपी की तलाश जारी रखे हुए हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।