7 जुलाई 2026
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बारुईपुर कांड पर दिलीप घोष का ममता पर हमला: 'कैंडल मार्च सिर्फ राजनीतिक ड्रामा, TMC राज में ज़्यादा अपराध हुए'

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बारुईपुर कांड पर दिलीप घोष का ममता पर हमला: 'कैंडल मार्च सिर्फ राजनीतिक ड्रामा, TMC राज में ज़्यादा अपराध हुए'

सारांश

बारुईपुर में नाबालिग की कथित हत्या और बलात्कार पर ममता बनर्जी के कैंडल मार्च को मंत्री दिलीप घोष ने 'राजनीतिक ड्रामा' कहा। TMC राज में हज़ारों अपराध का आरोप लगाते हुए उन्होंने सिंगूर, बीरभूम और तमन्ना कांड का हवाला दिया — यह विवाद पश्चिम बंगाल में सत्ता-विपक्ष के बीच गहरी खाई को उजागर करता है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में नाबालिग लड़की के कथित बलात्कार और हत्या मामले ने राज्य की राजनीति गरमाई।
मंत्री दिलीप घोष ने ममता बनर्जी के कालीघाट कैंडल मार्च को 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया।
घोष ने सिंगूर तापसी मलिक केस , बीरभूम हिंसा (कथित तौर पर 10 लोग जिंदा जलाए ) और 6 वर्षीय तमन्ना की मौत का हवाला देते हुए TMC सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाया।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल और भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने 7 जुलाई को पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
घोष ने आश्वासन दिया कि छह महीनों में राज्य के हालात बदलेंगे।

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की के कथित बलात्कार और हत्या के मामले ने राज्य की राजनीति को तीखे विवाद में बदल दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कालीघाट में निकाले गए कैंडल लाइट मार्च को राज्य सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने 7 जुलाई को सीधे तौर पर 'राजनीतिक दिखावा' करार दिया और आरोप लगाया कि TMC के शासनकाल में अपराध की दर कहीं अधिक थी।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी जीवन भर विरोध की राजनीति करती रही हैं, लेकिन विकास के मुद्दों पर उनका रिकॉर्ड खाली है। उन्होंने सवाल उठाया कि TMC के शासनकाल में बलात्कार और हत्या की हज़ारों घटनाएँ हुईं, फिर भी ममता बनर्जी को कभी किसी पीड़ित परिवार के पास जाकर संवेदना व्यक्त करते नहीं देखा गया। घोष के अनुसार, यदि विपक्ष वास्तव में जनता के प्रति संवेदनशील है तो उसे हर पीड़ित के लिए समान रूप से आवाज़ उठानी चाहिए, न कि चुनिंदा मामलों पर राजनीति।

पुराने मामलों का हवाला

घोष ने अपने बयान में कई पुरानी घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने सिंगूर में तापसी मलिक के कथित बलात्कार और हत्या मामले का ज़िक्र करते हुए पूछा कि उस समय कितने वामपंथी नेता पीड़ित परिवार के पास पहुँचे थे। इसके अलावा उन्होंने बीरभूम हिंसा का हवाला दिया, जिसमें उनके अनुसार दस लोगों को जिंदा जला दिया गया था, परंतु प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने छह वर्षीय बच्ची तमन्ना की कथित बमबारी में मौत का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि उस मामले में भी कोई बड़ा नेता पीड़ित परिवार से मिलने नहीं गया।

सरकार की प्रतिक्रिया

घोष ने स्पष्ट किया कि राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं बारुईपुर पीड़ित परिवार से मिलने जाएँगे, क्योंकि वह जमीनी स्तर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले छह महीनों में हालात बदलेंगे। उनके अनुसार जनता ने ममता बनर्जी को विपक्ष में बैठने का अवसर दिया है और वह उसी भूमिका को निभा रही हैं।

BJP नेताओं का पीड़ित परिवार से मिलना

इस बीच, राज्य मंत्री अग्निमित्रा पॉल और भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने बारुईपुर पीड़िता के परिवार से मुलाकात की। पॉल ने कहा, 'हम पीड़िता के चाचा के घर आए हैं, जहाँ उनके पिता और माँ रह रहे हैं। यह बहुत दुखद है — मेरे पास शब्द नहीं हैं। हम महिला और बाल विकास विभाग की ओर से और मुख्यमंत्री के प्रतिनिधियों के तौर पर आए हैं। न्याय ज़रूर मिलेगा — यह पिछली सरकारों जैसा नहीं है, जहाँ ऐसी घटनाएँ रोज़ होती थीं और कोई न्याय नहीं मिलता था।' लॉकेट चटर्जी ने कहा, 'जो भी मांग की जाएगी, वह पूरी की जाएगी।'

आगे क्या

बारुईपुर कांड को लेकर राज्य में राजनीतिक तनाव बना हुआ है। घोष ने माना कि राजनीतिक हिंसा की संस्कृति अभी भी जारी है, लेकिन आश्वस्त किया कि स्थिति में सुधार आएगा। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की माँग अब विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए राजनीतिक परीक्षा बन गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का विषय बन चुके हैं। दिलीप घोष का 'ड्रामा' वाला बयान सत्ता पक्ष की रक्षात्मक रणनीति को दर्शाता है — पीड़ित के लिए न्याय की माँग को विपक्ष की 'चुनिंदा राजनीति' बताकर नकारना। विडंबना यह है कि जिस बीरभूम हिंसा और तमन्ना कांड का घोष हवाला दे रहे हैं, वे घटनाएँ भी उस दौर की हैं जब राज्य में अलग-अलग दलों का शासन था — यानी जवाबदेही का सवाल सभी पर उठता है। असली कसौटी यह है कि बारुईपुर पीड़िता के परिवार को समयबद्ध न्याय मिलता है या नहीं — राजनीतिक बयानबाज़ी से परे।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बारुईपुर रेप और मर्डर केस क्या है?
पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की के कथित बलात्कार और हत्या का मामला सामने आया, जिसने राज्य में राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। इस घटना के बाद TMC और भाजपा दोनों दलों ने पीड़ित परिवार से मिलकर न्याय का आश्वासन दिया।
दिलीप घोष ने ममता बनर्जी के कैंडल मार्च को 'ड्रामा' क्यों कहा?
मंत्री दिलीप घोष का आरोप है कि ममता बनर्जी TMC के शासनकाल में हुए बलात्कार और हत्या के मामलों में पीड़ित परिवारों से कभी नहीं मिलीं, इसलिए अब उनका कैंडल मार्च चुनिंदा राजनीतिक दिखावा है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में संवेदनशील है, तो उसे हर पीड़ित के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।
घोष ने किन पुराने मामलों का हवाला दिया?
घोष ने सिंगूर में तापसी मलिक के कथित बलात्कार और हत्या, बीरभूम हिंसा (जिसमें कथित तौर पर 10 लोगों को जिंदा जलाया गया), और छह वर्षीय बच्ची तमन्ना की कथित बमबारी में मौत का उल्लेख किया। उनका तर्क था कि इन मामलों में भी किसी बड़े नेता ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात नहीं की।
भाजपा नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात में क्या कहा?
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि वे मुख्यमंत्री के प्रतिनिधियों के तौर पर आई हैं और न्याय ज़रूर मिलेगा। भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने आश्वासन दिया कि परिवार की जो भी माँग होगी, वह पूरी की जाएगी।
पश्चिम बंगाल में इस मामले का राजनीतिक असर क्या है?
यह मामला सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी TMC के बीच तीखी राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बन गया है। घोष ने कहा कि राज्य में राजनीतिक हिंसा की संस्कृति जारी है, लेकिन छह महीनों में हालात बदलेंगे — यह बयान सरकार के लिए एक अघोषित समयसीमा भी बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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