नेपाल PM बालेन शाह की ADB अध्यक्ष मासातो कांडा से पहली एकल बैठक, हाइड्रोपावर-डिजिटलाइजेशन पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) ने 7 जुलाई 2026 को काठमांडू में एशियाई विकास बैंक (ADB) के नवनियुक्त अध्यक्ष मासातो कांडा के साथ आमने-सामने बैठक की। 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद संभालने के साढ़े तीन महीने बाद किसी विदेशी गणमान्य व्यक्ति के साथ यह उनकी पहली एकल मुलाकात है, जो उनके राजनयिक प्रोटोकॉल में एक उल्लेखनीय बदलाव के रूप में देखी जा रही है।
बैठक में क्या हुआ
प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, करीब आधे घंटे चली इस बैठक में दोनों पक्षों ने नेपाल और ADB के बीच छह दशक पुरानी विकास साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री शाह की प्रेस एवं शोध सलाहकार दीपा दहल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि नेपाल आने वाले वर्षों में सुशासन और पारदर्शिता के जरिए विकास का एक नया अध्याय लिखेगा।
सचिवालय के बयान के अनुसार, बैठक में हाइड्रोपावर, पर्यटन, डिजिटलाइजेशन और पर्यटन सड़क अवसंरचना में सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ। ये क्षेत्र नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।
ADB अध्यक्ष का रुख
ADB अध्यक्ष मासातो कांडा ने नेपाल को विकास सहायता बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बैंक देश की आर्थिक प्रगति और समृद्धि में दीर्घकालिक साझेदार के रूप में काम करता रहेगा। कांडा ने नेपाल की आर्थिक क्षमता, मजबूत जन-समर्थन और युवा नेतृत्व की सराहना भी की। गौरतलब है कि कांडा जापान के विदेश मामलों के वित्त उप-मंत्री रह चुके हैं और हाल ही में ADB अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए हैं।
प्रधानमंत्री शाह का राजनयिक प्रोटोकॉल
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री शाह ने अब तक विदेशी राजनयिकों से अकेले मिलने की बजाय समूह में मुलाकात करने का चलन बनाए रखा है। उन्होंने 8 अप्रैल को काठमांडू में मौजूद राजनयिकों के साथ सामूहिक बैठक की थी और 26 मई को 23 यूरोपीय संघ के राजदूतों तथा थाईलैंड, रूस, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार, संयुक्त अरब अमीरात, नॉर्वे, फिनलैंड, मलेशिया और ब्राजील के राजदूतों से एक साथ मुलाकात की थी।
यह ऐसे समय में आया है जब शाह ने कथित तौर पर अमेरिकी राज्य विभाग में दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के सहायक सचिव पॉल कपूर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर से अलग मिलने की अपील ठुकरा दी थी। इसके अलावा, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री का नेपाल दौरा भी कुछ हफ्ते पहले स्थगित हो गया था।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विदेश नीति के विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री को राजनयिक मुलाकातों के बारे में निर्णय नेपाल के राष्ट्रीय हितों को केंद्र में रखकर लेना चाहिए, न कि किसी कठोर प्रोटोकॉल के आधार पर। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के सख्त रवैये से नेपाल के द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह संप्रभु राजनयिक स्वायत्तता का प्रतीक है।
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ADB अध्यक्ष के साथ यह एकल बैठक भविष्य में विदेशी मेहमानों से अलग-अलग मुलाकात की दिशा में किसी बड़े नीतिगत बदलाव का संकेत है या नहीं। आने वाले हफ्तों में प्रधानमंत्री शाह की अन्य विदेशी प्रतिनिधियों से मुलाकातों पर नज़र रखना इस सवाल का जवाब दे सकता है।