4 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: गिरिराज सिंह ने कांग्रेस-सपा को बताया 'नकली सनातनी', दिग्विजय सिंह ने दान वापसी की दी धमकी

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: गिरिराज सिंह ने कांग्रेस-सपा को बताया 'नकली सनातनी', दिग्विजय सिंह ने दान वापसी की दी धमकी

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब सीधे चुनावी अखाड़े में उतर गया है। गिरिराज सिंह ने कांग्रेस और अखिलेश यादव को '2027 के वोट के लिए रामभक्त बनने वाले नकली सनातनी' कहा, तो दिग्विजय सिंह ने ₹1.11 लाख के दान की वापसी के लिए अयोध्या में मुकदमे की धमकी देकर विवाद को नई दिशा दे दी।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 4 जुलाई को पटना में कांग्रेस और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को 'नकली सनातनी' करार दिया।
गिरिराज सिंह का आरोप — विपक्षी नेताओं ने अदालत में भगवान राम को 'काल्पनिक' और रामसेतु को 'झूठा' बताया था।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में मुकदमा दायर करने और मंदिर ट्रस्ट से ₹1 लाख 11 हजार की दान-राशि वापस माँगने की घोषणा की।
दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राशि ट्रस्ट में जमा कराने का अनुरोध किया था और रसीद भी ली थी।
गिरिराज सिंह ने कहा कि सरकार चढ़ावा मामले को गंभीरता से ले रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 4 जुलाई को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव को 'नकली सनातनी' करार दिया। उन्होंने देश के सनातनियों से आग्रह किया कि वे ऐसे नेताओं की राजनीतिक मंशा को पहचानें और उनसे सतर्क रहें।

गिरिराज सिंह के प्रमुख आरोप

गिरिराज सिंह ने कहा, 'ये वही लोग हैं, चाहे कांग्रेस हो या अखिलेश यादव, जिन्होंने कभी भगवान राम के अस्तित्व को ही स्वीकार नहीं किया। इन्होंने अदालत में कहा था कि रामसेतु झूठा है और भगवान राम काल्पनिक हैं। आज वही लोग खुद को रामभक्त बताने की कोशिश कर रहे हैं।' उनके अनुसार, विपक्ष के ये नेता 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर हिंदू भावनाओं का दोहन करने की कोशिश कर रहे हैं।

चढ़ावा मामले पर सरकार का रुख

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर गिरिराज सिंह ने स्पष्ट किया कि इस घटना से हिंदू समाज आहत हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर निर्मित हो चुका है और उसकी भव्य प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हो चुकी है — यह दुनिया भर के सनातनियों की अटूट आस्था का प्रतीक है।

दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान और मुकदमे की धमकी

इस विवाद को और हवा देते हुए मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे अयोध्या में मुकदमा दायर करेंगे और मांग करेंगे कि मंदिर निर्माण के लिए उनके द्वारा दिया गया चंदा वापस किया जाए, क्योंकि उनके अनुसार उस धन का गबन हुआ है। दिग्विजय सिंह ने बताया कि जब तत्कालीन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंदिर निर्माण के लिए ₹1 लाख का दान दिया था, तो उन्होंने उससे अधिक देने का निर्णय लिया और ₹1 लाख 11 हजार का दान किया था।

प्रधानमंत्री को पत्र और रसीद का दावा

दिग्विजय सिंह के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि यह राशि ट्रस्ट में जमा कराई जाए। उन्होंने स्वयं राशि जमा कराई और उसकी रसीद भी ली। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह दान उन्होंने भगवान राम में आस्था और भव्य मंदिर निर्माण की भावना से दिया था, लेकिन अब सामने आ रही शिकायतें उनके अनुसार बेहद चिंताजनक हैं।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में और गहरा गया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और राम मंदिर हिंदुत्व की राजनीति का केंद्रबिंदु बना हुआ है। गौरतलब है कि चढ़ावा प्रबंधन और ट्रस्ट की पारदर्शिता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब दिग्विजय सिंह के मुकदमे की घोषणा और गिरिराज सिंह के पलटवार के बाद यह मामला न्यायिक और राजनीतिक — दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दिग्विजय सिंह का मुकदमे का ऐलान ट्रस्ट की पारदर्शिता पर असली सवाल उठाता है — लेकिन यह भी उतना ही राजनीतिक है जितना नैतिक। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावा प्रबंधन की स्वतंत्र लेखापरीक्षा (ऑडिट) की माँग अब तक किसी भी दल ने औपचारिक रूप से संसद में नहीं उठाई — जो इस पूरी बहस की सबसे बड़ी खामी है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट में जमा दान-राशि के कथित गबन से जुड़ा है। इस मामले ने राजनीतिक रंग तब लिया जब विपक्षी नेताओं ने ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठाए और BJP ने उन पर राजनीतिक मंशा का आरोप लगाया।
गिरिराज सिंह ने 'नकली सनातनी' किसे कहा और क्यों?
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को 'नकली सनातनी' कहा। उनका तर्क था कि इन नेताओं ने अदालत में भगवान राम को काल्पनिक और रामसेतु को झूठा बताया था, और अब 2027 के चुनावों से पहले खुद को रामभक्त के रूप में पेश कर रहे हैं।
दिग्विजय सिंह ने कितना दान दिया था और वे उसे वापस क्यों माँग रहे हैं?
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए ₹1 लाख 11 हजार का दान दिया था। उनका कहना है कि यह राशि भगवान राम में आस्था से दी गई थी, लेकिन अब ट्रस्ट में धन के गबन की शिकायतें सामने आने के बाद वे अयोध्या में मुकदमा दायर कर दान-राशि की वापसी की माँग करेंगे।
क्या सरकार राम मंदिर चढ़ावा मामले की जाँच कर रही है?
गिरिराज सिंह के अनुसार, सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। हालाँकि, किसी औपचारिक जाँच एजेंसी या विशेष जाँच दल (SIT) के गठन की अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इस विवाद का 2027 के चुनावों से क्या संबंध है?
गिरिराज सिंह ने सीधे कहा कि कुछ नेता केवल 2027 के विधानसभा चुनावों के वोटों पर नज़र रखते हुए राम मंदिर विवाद को हवा दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में हिंदू मतदाताओं की निर्णायक भूमिका को देखते हुए राम मंदिर का मुद्दा दोनों पक्षों के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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