राम मंदिर चढ़ावा विवाद: गिरिराज सिंह ने कांग्रेस-सपा को बताया 'नकली सनातनी', दिग्विजय सिंह ने दान वापसी की दी धमकी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 4 जुलाई को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव को 'नकली सनातनी' करार दिया। उन्होंने देश के सनातनियों से आग्रह किया कि वे ऐसे नेताओं की राजनीतिक मंशा को पहचानें और उनसे सतर्क रहें।
गिरिराज सिंह के प्रमुख आरोप
गिरिराज सिंह ने कहा, 'ये वही लोग हैं, चाहे कांग्रेस हो या अखिलेश यादव, जिन्होंने कभी भगवान राम के अस्तित्व को ही स्वीकार नहीं किया। इन्होंने अदालत में कहा था कि रामसेतु झूठा है और भगवान राम काल्पनिक हैं। आज वही लोग खुद को रामभक्त बताने की कोशिश कर रहे हैं।' उनके अनुसार, विपक्ष के ये नेता 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर हिंदू भावनाओं का दोहन करने की कोशिश कर रहे हैं।
चढ़ावा मामले पर सरकार का रुख
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर गिरिराज सिंह ने स्पष्ट किया कि इस घटना से हिंदू समाज आहत हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर निर्मित हो चुका है और उसकी भव्य प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हो चुकी है — यह दुनिया भर के सनातनियों की अटूट आस्था का प्रतीक है।
दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान और मुकदमे की धमकी
इस विवाद को और हवा देते हुए मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे अयोध्या में मुकदमा दायर करेंगे और मांग करेंगे कि मंदिर निर्माण के लिए उनके द्वारा दिया गया चंदा वापस किया जाए, क्योंकि उनके अनुसार उस धन का गबन हुआ है। दिग्विजय सिंह ने बताया कि जब तत्कालीन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंदिर निर्माण के लिए ₹1 लाख का दान दिया था, तो उन्होंने उससे अधिक देने का निर्णय लिया और ₹1 लाख 11 हजार का दान किया था।
प्रधानमंत्री को पत्र और रसीद का दावा
दिग्विजय सिंह के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि यह राशि ट्रस्ट में जमा कराई जाए। उन्होंने स्वयं राशि जमा कराई और उसकी रसीद भी ली। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह दान उन्होंने भगवान राम में आस्था और भव्य मंदिर निर्माण की भावना से दिया था, लेकिन अब सामने आ रही शिकायतें उनके अनुसार बेहद चिंताजनक हैं।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में और गहरा गया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और राम मंदिर हिंदुत्व की राजनीति का केंद्रबिंदु बना हुआ है। गौरतलब है कि चढ़ावा प्रबंधन और ट्रस्ट की पारदर्शिता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब दिग्विजय सिंह के मुकदमे की घोषणा और गिरिराज सिंह के पलटवार के बाद यह मामला न्यायिक और राजनीतिक — दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ सकता है।