27 जून 2026
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दिग्विजय सिंह की मांग: चंपत राय और अनिल मिश्रा पर FIR दर्ज हो, राम मंदिर दान में गड़बड़ी के आरोप

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दिग्विजय सिंह की मांग: चंपत राय और अनिल मिश्रा पर FIR दर्ज हो, राम मंदिर दान में गड़बड़ी के आरोप

सारांश

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में राम मंदिर ट्रस्ट पर दान और भूमि लेन-देन में गड़बड़ी के आरोप लगाए और चंपत राय व अनिल मिश्रा की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की। उनका दावा है कि 200 किलो चांदी सहित दानों की कोई रसीद नहीं दी गई। कांग्रेस अब इस मुद्दे को पंचायत स्तर तक ले जाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

दिग्विजय सिंह ने 27 जून 2026 को उज्जैन में राम मंदिर ट्रस्ट पर दान एवं भूमि लेन-देन में अनियमितता के आरोप लगाए।
ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की माँग की गई।
आरोप है कि सिंधी समुदाय द्वारा दान की गई 200 किलो चांदी की ईंटों सहित नगद, आभूषण और विदेशी दान की कोई रसीद नहीं दी गई।
सिंह ने RSS और VHP पर धार्मिक आस्था का राजनीतिक दुरुपयोग करने और संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस मध्य प्रदेश में पंचायत-स्तरीय जनसंपर्क अभियान चलाएगी; सिंह ने कहा कि और दस्तावेज़ जल्द सार्वजनिक होंगे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 27 जून 2026 को उज्जैन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज करने और दोनों की गिरफ्तारी की मांग की। सिंह के अनुसार, मंदिर के दान एवं भूमि लेन-देन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं।

आरोपों का विवरण

दिग्विजय सिंह ने कहा कि मंदिर को प्राप्त दान — जिसमें नगद राशि, आभूषण, सिंधी समुदाय द्वारा दान की गई 200 किलो चांदी की ईंटें, एक महिला द्वारा दिए गए गहने और विदेशों से मिला योगदान शामिल है — के प्रबंधन में पारदर्शिता का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से किसी के लिए भी दानकर्ताओं को रसीद नहीं दी गई।

उन्होंने कहा, 'इन आरोपों की जांच होनी चाहिए और सच्चाई लोगों के सामने आनी चाहिए। भगवान राम के नाम पर दान देने वाले लोग अपने योगदान के इस्तेमाल के बारे में जवाब और पूरी पारदर्शिता पाने के हकदार हैं।' इसके अलावा, ट्रस्ट से जुड़ी भूमि की खरीद में भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्होंने निष्पक्ष जांच की माँग की।

RSS और VHP पर तीखा प्रहार

सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर भी निशाना साधा। उनका आरोप था कि ये संगठन धार्मिक आस्था का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि इन संगठनों का कोई औपचारिक पंजीकरण नहीं है, कोई नियमित सदस्यता प्रणाली नहीं है और ये 'गुरु दक्षिणा' के रूप में एकत्र राशि पर कर भी नहीं देते। सिंह ने प्रश्न उठाया कि राज्य ने इन्हें इतना शक्तिशाली कैसे बनने दिया कि ये विभिन्न संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने की स्थिति में आ गए।

महाकाल मंदिर और साधु-संतों की अनदेखी के आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने उज्जैन के महाकाल मंदिर प्रबंधन की भी आलोचना की। उनका कहना था कि मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है और निर्णय प्रक्रिया में साधु-संतों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य सहित कई धार्मिक नेताओं को पहले ही इस खतरे के प्रति आगाह किया था।

दस्तावेज़ और जन-अभियान की घोषणा

सिंह ने बताया कि उनके पास कथित अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज़ हैं और रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद अतिरिक्त जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि कांग्रेस मध्य प्रदेश के गाँवों में अपनी पंचायत-स्तरीय समितियों के माध्यम से इस मुद्दे को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाएगी।

आगे क्या होगा

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर विपक्षी दलों की ओर से सवाल पहले भी उठाए जाते रहे हैं। गौरतलब है कि ट्रस्ट की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। दिग्विजय सिंह के इस कदम से मध्य प्रदेश में राजनीतिक तापमान बढ़ने की संभावना है, और आने वाले दिनों में कांग्रेस के जनसंपर्क अभियान की दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार उन्होंने दस्तावेज़ों का हवाला देकर दावे को ठोस आधार देने की कोशिश की है। असली परीक्षा यह है कि क्या ये आरोप न्यायिक या जांच एजेंसी के दायरे तक पहुँचते हैं, या महज राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाते हैं। ट्रस्ट की ओर से चुप्पी और कांग्रेस के पंचायत-स्तरीय अभियान की योजना यह संकेत देती है कि यह विवाद मध्य प्रदेश में आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि धार्मिक ट्रस्टों की वित्तीय जवाबदेही का कोई स्वतंत्र सत्यापन तंत्र अभी तक स्थापित नहीं हुआ है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट पर क्या आरोप लगाए हैं?
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर ट्रस्ट को मिले दान — जिसमें नगद, आभूषण, 200 किलो चांदी की ईंटें और विदेशी योगदान शामिल हैं — के प्रबंधन में अनियमितता हुई है और दानकर्ताओं को कोई रसीद नहीं दी गई। उन्होंने भूमि खरीद में भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा कौन हैं?
चंपत राय राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव हैं और अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य हैं। दिग्विजय सिंह ने इन दोनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की माँग की है।
कांग्रेस इस मुद्दे पर आगे क्या करेगी?
कांग्रेस मध्य प्रदेश के गाँवों में अपनी पंचायत-स्तरीय समितियों के ज़रिए जनसंपर्क अभियान चलाएगी। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा है कि रिकॉर्ड की जांच के बाद और दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएँगे।
RSS और VHP पर दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?
सिंह ने आरोप लगाया कि RSS और VHP का धर्म से कोई वास्तविक संबंध नहीं है और ये संगठन राजनीतिक उद्देश्यों के लिए धार्मिक आस्था का दोहन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये संगठन पंजीकृत नहीं हैं और 'गुरु दक्षिणा' पर कर भी नहीं देते।
महाकाल मंदिर को लेकर क्या आरोप लगाए गए?
दिग्विजय सिंह ने उज्जैन के महाकाल मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाया और कहा कि निर्णय प्रक्रिया में साधु-संतों को दरकिनार किया जा रहा है। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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