एयर इंडिया CEO कैंपबेल विल्सन से फुकेत-दिल्ली टर्बुलेंस घटना पर सरकार की पूछताछ, 17 यात्री हुए थे घायल
सारांश
मुख्य बातें
नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने मंगलवार, 11 अगस्त को एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। यह बैठक 4 अगस्त को थाईलैंड के फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में आई गंभीर टर्बुलेंस की घटना के संदर्भ में बुलाई गई थी, जिसमें 17 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह टाटा ग्रुप की एयरलाइन के लिए एक बड़ा सुरक्षा संकट बनकर उभरी है।
मुख्य घटनाक्रम
36,000 फीट की ऊँचाई पर उड़ रहा एयरबस A320neo विमान (पंजीकरण: VT-EXO) अचानक 300 फीट नीचे आ गया, जिससे केबिन में अफरातफरी मच गई। सूत्रों के अनुसार, इस घटना में केवल टर्बुलेंस ही नहीं, बल्कि हाइड्रोलिक फेलियर और उड़ान के दौरान ऑटोपायलट का अचानक डिस्कनेक्ट होना भी शामिल था — जो इसे एक साधारण मौसमी झटके से कहीं अधिक गंभीर बनाता है।
बैठक में नागरिक उड्डयन महानिदेशक वीर विक्रम यादव और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) के महानिदेशक जी.वी.जी. युगांधर भी उपस्थित रहे। एयर इंडिया की ओर से कैंपबेल विल्सन के साथ फ्लाइट सेफ्टी हेड दीपक जोशी और टाटा संस के चेयरमैन के कार्यकारी सलाहकार एवं पूर्व नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला भी शामिल हुए।
जाँच का दायरा
AAIB ने इस घटना को औपचारिक रूप से 'गंभीर घटना' (Serious Incident) की श्रेणी में वर्गीकृत किया है। जाँच में विमान की ऊँचाई में अचानक बदलाव की परिस्थितियों और फ्लाइट क्रू की उस दौरान की गई कार्रवाई की भी पड़ताल की जा रही है। विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) को सुरक्षित कर लिया गया है, जो जाँचकर्ताओं को घटना का पूरा चित्र समझने में मदद करेंगे।
विमान निर्माता कंपनी एयरबस और फ्रांस की विमान दुर्घटना जाँच एजेंसी BEA भी इस जाँच में शामिल होंगी। अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के एनेक्स 13 के तहत, विमान निर्माता के रूप में एयरबस जाँचकर्ताओं को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी — जिसमें विमान प्रणालियों की व्याख्या और उड़ान डेटा का विश्लेषण शामिल है।
पायलटों पर कार्रवाई
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने जाँच पूरी होने तक दोनों पायलटों को रोस्टर से हटा दिया है। दिल्ली पहुँचने के बाद दोनों पायलटों की साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग की गई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रविवार को बताया कि पायलट-इन-कमांड की प्रारंभिक स्क्रीनिंग रिपोर्ट 'नेगेटिव नहीं' आई है और सैंपल को पुष्टिकारक परीक्षण के लिए भेजा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि अंतिम परिणामों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय विमानन क्षेत्र में यात्री संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और सुरक्षा मानकों पर नज़र रखने वाली संस्थाएँ पहले से ही सतर्क हैं। एक तकनीकी खराबी, ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट और गंभीर टर्बुलेंस का एक साथ होना विशेषज्ञों के अनुसार बहुत असामान्य है और इसकी गहन जाँच ज़रूरी है।
आगे क्या होगा
FDR और CVR के विश्लेषण के बाद AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट आने की उम्मीद है। पायलट की पुष्टिकारक स्क्रीनिंग के नतीजे भी निर्णायक भूमिका निभाएँगे। एयर इंडिया और सरकार दोनों पर यह दबाव है कि वे न केवल इस घटना का कारण स्पष्ट करें, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचाव के लिए ठोस कदम भी उठाएँ।