प्रियंका गांधी की राम मंदिर चंदा चोरी मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, दिग्विजय सिंह ने FIR की माँगी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 27 जून को अयोध्या के राम मंदिर के लिए एकत्रित चंदे में कथित चोरी को 'दुखद और शर्मनाक' करार देते हुए सरकार से गहन एवं निष्पक्ष जांच की माँग की। उन्होंने कहा कि जवाबदेही केवल कथित चोरों तक सीमित न रहे, बल्कि उन लोगों पर भी लागू हो जिन्हें भक्तों के दान की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।
प्रियंका गांधी का बयान
वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि देश भर के लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था और त्याग के साथ राम मंदिर के निर्माण के लिए योगदान दिया है। उनके अनुसार, 'महिलाओं, गरीबों और आम भक्तों' ने जो राशि दान की, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना फंड प्रबंधकों का दायित्व था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले को कोई मामूली घटना कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। प्रियंका ने कहा, 'जनता के भरोसे से कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए — दान इकट्ठा करने और उसका प्रबंधन करने वालों की लोगों के प्रति पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही बनती है।'
दिग्विजय सिंह की FIR की माँग
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंदिर से जुड़े दान और ज़मीन के लेन-देन में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और दोनों को गिरफ्तार करने की माँग की।
मामले की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर विपक्षी दलों की नज़र पहले से तेज़ है। गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर में व्यापक जन-अभियान चलाकर चंदा जुटाया गया था, जिसमें करोड़ों आम श्रद्धालुओं ने भागीदारी की थी। कथित तौर पर इस चंदे के एक हिस्से के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार और ट्रस्ट से जवाब माँगा है।
प्रियंका गांधी ने यह भी रेखांकित किया कि जांच की परिधि में यह भी शामिल होना चाहिए कि दान की सुरक्षा के लिए बने तंत्र में कहीं संस्थागत लापरवाही तो नहीं हुई।
आगे क्या होगा
अभी तक सरकार या ट्रस्ट की ओर से इन माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्ष के इस हमले के बाद यह मामला संसद के आगामी सत्र में भी उठ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आस्था से जुड़े वित्तीय मामलों में पारदर्शिता की यह माँग व्यापक जनभावना को भी प्रतिबिंबित करती है।