3 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत बोले — सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो एसआईटी जांच

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत बोले — सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो एसआईटी जांच

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने एसआईटी जांच को अपर्याप्त बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की माँग की। उन्होंने कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी से पूछताछ न होने और ₹1,500 करोड़ के पुराने आरोपों का हवाला देते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने 3 जुलाई 2026 को लखनऊ में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर एसआईटी जांच को 'लीपापोती' करार दिया।
राजपूत ने माँग की कि जांच सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में हो, अन्यथा असली दोषी बच जाएंगे।
उन्होंने कहा कि कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी से अब तक न कोई पूछताछ हुई है और न जांच — जो संदेहास्पद है।
निर्मोही अखाड़े की ओर से पहले ही ₹1,500 करोड़ की लूट का आरोप लग चुका था, जिसका राजपूत ने हवाला दिया।
मदरसा जांच पर राजपूत ने कहा कि शिशु मंदिर, क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल और RSS से जुड़े विद्यालयों की भी समान रूप से जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने 3 जुलाई 2026 को लखनऊ में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए माँग की कि इस पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा एसआईटी जांच महज़ लीपापोती है और असली दोषियों को बचाने का प्रयास हो रहा है।

एसआईटी जांच पर गंभीर सवाल

सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि एसआईटी का गठन ही बड़े दोषियों को संरक्षण देने के उद्देश्य से किया गया है। उनके अनुसार, 8 लोगों को फंसाकर असली ज़िम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जब तक इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नहीं होती, दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो पाएगा।'

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी से न तो पूछताछ की जा रही है और न ही उनकी जांच हो रही है, जबकि कोष से गड़बड़ी के मामले में सबसे पहली जवाबदेही कोषाध्यक्ष की बनती है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा पर आरोप

राजपूत ने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा इस मामले में छोटे किरदार हैं और पैसा इनसे कहीं आगे तक गया है। उन्होंने आंदोलन के दौर का हवाला देते हुए कहा कि निर्मोही अखाड़े की ओर से ₹1,500 करोड़ की लूट का आरोप पहले ही लगाया जा चुका था। उनके अनुसार, भगवान राम के नाम पर वोट लूटे गए, सत्ता हासिल की गई और अब चढ़ावे में भी अनियमितता सामने आई है।

धीरेंद्र शास्त्री से राजपूत की अपील

कांग्रेस नेता ने धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने किसी नाम का खुलासा करने से परहेज़ किया था। राजपूत ने कहा कि यदि धीरेंद्र शास्त्री वास्तव में आस्थावान हैं और उन्हें ईश्वर पर भरोसा है, तो उन्हें निडर होकर दोषी का नाम सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जो ईश्वर की इच्छा से चलता है, उसे किसी का भय नहीं होता।

मदरसा जांच पर निष्पक्षता की माँग

मदरसों की जांच के मुद्दे पर राजपूत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में आने के बाद से मदरसों को राजनीतिक निशाना बनाती रही है। उन्होंने माँग की कि यदि किसी संस्था में अनियमितता की जांच होनी है तो वह सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए — चाहे वह शिशु मंदिर हो, क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल हों या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विद्यालय। उनका कहना था कि जहाँ भी अनियमितता मिले, वहाँ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

आगे क्या होगा

राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और न्यायिक बहस का केंद्र बन चुका है। विपक्ष की माँग है कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में स्वतः संज्ञान ले या न्यायिक निगरानी सुनिश्चित करे। एसआईटी की जांच रिपोर्ट और न्यायालय का रुख आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका मूल सवाल — कोषाध्यक्ष से पूछताछ क्यों नहीं — जांच की प्राथमिकताओं पर एक वैध उँगली उठाता है। एसआईटी जांच तब विश्वसनीय होती है जब वह सत्ता के करीबी लोगों तक भी बराबर पहुँचे; अभी तक सार्वजनिक रूप से ऐसा होता नहीं दिख रहा। मदरसा जांच पर उनकी 'सबकी जांच हो' वाली माँग सैद्धांतिक रूप से सही है, पर यह बयान खुद कांग्रेस की उस चुप्पी को भी उजागर करता है जो वर्षों तक धार्मिक संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता पर रही। असली परीक्षा यह है कि क्या विपक्ष इस मुद्दे को न्यायालय तक ले जाने की ठोस कोशिश करता है या यह बयान महज़ प्रेस-वार्ता तक सीमित रहता है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। इस मामले में एसआईटी जांच चल रही है, जिस पर विपक्ष ने लीपापोती का आरोप लगाया है।
कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच क्यों चाहती है?
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत का कहना है कि एसआईटी सत्ताधारी दल के करीबी लोगों को बचाने के लिए बनाई गई है और छोटे लोगों को फंसाया जा रहा है। उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी के बिना निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
गोविंद गिरी कौन हैं और उनका नाम इस विवाद में क्यों आया?
गोविंद गिरी राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं। कांग्रेस नेता राजपूत ने आरोप लगाया है कि कोष से गड़बड़ी के मामले में सबसे पहले कोषाध्यक्ष की जवाबदेही बनती है, लेकिन उनसे अब तक कोई पूछताछ नहीं हुई है।
धीरेंद्र शास्त्री का इस विवाद से क्या संबंध है?
धीरेंद्र शास्त्री ने कथित तौर पर किसी दोषी का नाम सार्वजनिक करने से परहेज़ किया था। कांग्रेस नेता राजपूत ने उनसे अपील की है कि यदि वे वास्तव में आस्थावान हैं तो उन्हें निडर होकर नाम का खुलासा करना चाहिए।
निर्मोही अखाड़े ने ₹1,500 करोड़ की लूट का आरोप कब लगाया था?
सुरेंद्र राजपूत के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन के दौरान निर्मोही अखाड़े की ओर से ₹1,500 करोड़ की लूट का आरोप लगाया गया था। उन्होंने इस पुराने आरोप का हवाला देते हुए वर्तमान चढ़ावा विवाद को एक लंबे सिलसिले का हिस्सा बताया।
राष्ट्र प्रेस
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