राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत बोले — सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो एसआईटी जांच
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने 3 जुलाई 2026 को लखनऊ में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए माँग की कि इस पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा एसआईटी जांच महज़ लीपापोती है और असली दोषियों को बचाने का प्रयास हो रहा है।
एसआईटी जांच पर गंभीर सवाल
सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि एसआईटी का गठन ही बड़े दोषियों को संरक्षण देने के उद्देश्य से किया गया है। उनके अनुसार, 8 लोगों को फंसाकर असली ज़िम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जब तक इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नहीं होती, दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो पाएगा।'
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी से न तो पूछताछ की जा रही है और न ही उनकी जांच हो रही है, जबकि कोष से गड़बड़ी के मामले में सबसे पहली जवाबदेही कोषाध्यक्ष की बनती है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा पर आरोप
राजपूत ने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा इस मामले में छोटे किरदार हैं और पैसा इनसे कहीं आगे तक गया है। उन्होंने आंदोलन के दौर का हवाला देते हुए कहा कि निर्मोही अखाड़े की ओर से ₹1,500 करोड़ की लूट का आरोप पहले ही लगाया जा चुका था। उनके अनुसार, भगवान राम के नाम पर वोट लूटे गए, सत्ता हासिल की गई और अब चढ़ावे में भी अनियमितता सामने आई है।
धीरेंद्र शास्त्री से राजपूत की अपील
कांग्रेस नेता ने धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने किसी नाम का खुलासा करने से परहेज़ किया था। राजपूत ने कहा कि यदि धीरेंद्र शास्त्री वास्तव में आस्थावान हैं और उन्हें ईश्वर पर भरोसा है, तो उन्हें निडर होकर दोषी का नाम सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जो ईश्वर की इच्छा से चलता है, उसे किसी का भय नहीं होता।
मदरसा जांच पर निष्पक्षता की माँग
मदरसों की जांच के मुद्दे पर राजपूत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में आने के बाद से मदरसों को राजनीतिक निशाना बनाती रही है। उन्होंने माँग की कि यदि किसी संस्था में अनियमितता की जांच होनी है तो वह सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए — चाहे वह शिशु मंदिर हो, क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल हों या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विद्यालय। उनका कहना था कि जहाँ भी अनियमितता मिले, वहाँ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और न्यायिक बहस का केंद्र बन चुका है। विपक्ष की माँग है कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में स्वतः संज्ञान ले या न्यायिक निगरानी सुनिश्चित करे। एसआईटी की जांच रिपोर्ट और न्यायालय का रुख आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगा।