अयोध्या राम मंदिर दान विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट-केंद्र-यूपी सरकार को नोटिस, SIT से मांगी सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 13 जुलाई 2026 को अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किए। इसके साथ ही कोर्ट ने जांच में लगी उत्तर प्रदेश एसआईटी को सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई अगले सोमवार के लिए सूचीबद्ध की।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण अयोध्या राम मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित नकद और कीमती वस्तुओं के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। अब तक इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का घटनाक्रम
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को कई जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। ये याचिकाएँ न्यायालय की निगरानी में जांच की माँग करती हैं।
सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने पीठ के समक्ष कहा कि 123 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद अब एक नई लड़ाई शुरू हो गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए और कोर्ट को सूचित किया कि एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाएगी।
याचिकाकर्ता कौन हैं
सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर इन जनहित याचिकाओं में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह, अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, वकील अजय कुमार राय, दिनेश कुमार यादव और हिन्दू धर्म परिषद शामिल हैं। सभी ने एक स्वर में कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की माँग की है।
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या राम मंदिर में देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन और दान के लिए आते हैं। कथित हेराफेरी की खबरों ने मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गौरतलब है कि ट्रस्ट के दो शीर्ष पदाधिकारियों का इस्तीफा इस विवाद की गंभीरता को रेखांकित करता है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को अगले सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया है, जब एसआईटी की सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट और नोटिस के जवाब सामने आने की उम्मीद है। न्यायालय की निगरानी में जांच की माँग पर अंतिम निर्णय आगामी सुनवाइयों में होगा। यह देखना अहम होगा कि क्या कोर्ट एसआईटी जांच को अपनी देखरेख में लेता है या राज्य सरकार को स्वतंत्र रूप से जांच जारी रखने देता है।