राम मंदिर दान विवाद: सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह की मांग — ट्रस्ट भंग करो, चंपत राय पर FIR दर्ज करो
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने 2 जुलाई 2026 को राम मंदिर दान चोरी विवाद पर उत्तर प्रदेश सरकार को सीधे घेरते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग करने और चंपत राय, गोपाल राव तथा अनिल मिश्रा के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की माँग की। यह बयान ऐसे समय आया जब अयोध्या में गुरुवार को बड़ी संख्या में वकीलों ने मार्च निकालकर इन्हीं माँगों को दोहराया।
वकीलों का मार्च और सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
अयोध्या में एकत्र हुए वकीलों ने चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज न होने पर कड़ा विरोध जताया। वकीलों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन तीनों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएँगे। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर दान प्रबंधन को लेकर सार्वजनिक आक्रोश पहले से बढ़ा हुआ है।
सपा का सरकार पर सीधा हमला
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा, 'यह बेहद घृणित अपराध है। राम के नाम पर जमा चंदे की चोरी हो रही है, फिर भी सरकार कार्रवाई नहीं कर रही — यह साफ दिखाता है कि सरकार कितनी पक्षपाती है।' उन्होंने आरोप लगाया कि घोटाले में 'बड़े-बड़े लोग' शामिल हैं, इसीलिए प्रशासन उन्हें संरक्षण दे रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, 'या तो मुख्यमंत्री इनके साथ साझेदार हैं, या फिर इनकी ताकत के आगे घुटने टेक चुके हैं।' सिंह ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री में सच्ची राम भक्ति होती, तो दान चोरी की खबर आते ही उसी दिन FIR दर्ज हो जाती और अब तक सारा चंदा-चढ़ावा वसूल भी हो चुका होता।
ट्रस्ट भंग करने की माँग
सपा प्रवक्ता ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि जिस ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों पर ही चोरी के आरोप हों, उस ट्रस्ट की बैठकें बुलाने का कोई औचित्य नहीं। उनके अनुसार, इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता के बाद ट्रस्ट की विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और इसे सबसे पहले भंग किया जाना चाहिए।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
उदयवीर सिंह ने इस मामले को भाजपा की कथित नीतिगत विफलताओं की व्यापक श्रृंखला से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी किसान, मज़दूर और युवाओं के मुद्दों पर हमेशा गलत नीतियाँ अपनाती रही है। उन्होंने मनरेगा कार्यान्वयन से लेकर पेपर लीक कांड तक की घटनाओं को इसी मानसिकता का परिणाम बताया। गौरतलब है कि यह मामला उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के लिए एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।
आगे क्या होगा
वकीलों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय जाने की चेतावनी के बाद अब सबकी नज़रें उत्तर प्रदेश पुलिस और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि FIR दर्ज नहीं होती, तो यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप की दिशा में आगे बढ़ सकता है, जो सरकार के लिए और अधिक राजनीतिक दबाव पैदा करेगा।