7 अगस्त 2026
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राम मंदिर चंदा विवाद: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद बोले — 'यह चोरी नहीं, डकैती है'

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राम मंदिर चंदा विवाद: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद बोले — 'यह चोरी नहीं, डकैती है'

सारांश

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एक साथ तीन मोर्चों पर सरकार को घेरा — राम मंदिर चंदे को 'डकैती', ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को 'संपत्ति बिक्री' और नीट पेपर लीक को छात्रों की मौत का जिम्मेदार बताया। यह बयान विपक्ष की उस रणनीति का हिस्सा है जो धर्म, विकास और शिक्षा — तीनों मुद्दों पर सरकार को एक साथ घेरने की कोशिश कर रही है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 21 जून को राम मंदिर चंदे में कथित अनियमितताओं को 'डकैती' करार दिया।
मसूद ने ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर सरकार पर देश की संपत्ति बेचने का आरोप लगाया।
नीट पेपर लीक के चलते छात्रों की आत्महत्या की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाली।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियाँ 90 प्रतिशत गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों को नुकसान पहुँचा रही हैं।
सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 21 जून को नई दिल्ली में राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने इसे महज चोरी नहीं, बल्कि 'डकैती' करार दिया और साथ ही ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट तथा नीट पुनः परीक्षा विवाद पर भी सरकार को घेरा। मसूद ने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों से देश के गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

राम मंदिर चंदा विवाद पर मसूद का तीखा बयान

राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर इमरान मसूद ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'बात चोरी की है, चंदा चोरी हुआ है और यह एक-दो रुपए की चोरी नहीं है — यह डकैती है। राम की माया राम जाने।' गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंदे के आरोप हाल के हफ्तों में राजनीतिक विमर्श का केंद्र बने हुए हैं, और विपक्षी दल लगातार जाँच की माँग कर रहे हैं।

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट और राहुल गांधी विवाद

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के विरोध को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मसूद ने कहा कि सरकार देश की संपत्तियों को बेचने का काम कर रही है। उन्होंने कहा, 'सारी संपत्ति तो बेच दी आपने। अगर ऐसे ही चलता रहा तो देश का आदिवासी, दलित, बैकवर्ड और खासतौर से मुसलमान और अन्य माइनॉरिटी किस हाल में होंगे।' उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था 90 प्रतिशत जनता को हाशिये पर रखकर केवल 10 प्रतिशत के हित में काम कर रही है।

नीट विवाद: पेपर लीक पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया

नीट परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों और पुनः परीक्षा के फैसले पर मसूद ने उम्मीद जताई कि इस बार परीक्षा व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन साथ ही सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'पेपर लीक की वजह से कितने बच्चों ने आत्महत्या कर ली — उनकी मौत की जिम्मेदार यह सरकार है।' यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन और न्यायिक दबाव दोनों बढ़ रहे हैं।

आम जनता पर असर और आगे की राह

मसूद के बयान तीन अलग-अलग मुद्दों को एक साझा राजनीतिक आख्यान में पिरोते हैं — धार्मिक ट्रस्ट की पारदर्शिता, पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में विकास परियोजनाएँ, और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता। आलोचकों का कहना है कि इन तीनों मामलों में सरकार की जवाबदेही तंत्र कमज़ोर रही है। सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी विश्वसनीयता तब तक सीमित रहेगी जब तक कांग्रेस ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य सामने नहीं रखती। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय आरोप नए नहीं हैं — विपक्ष पिछले कई महीनों से इन्हें उठा रहा है, पर स्वतंत्र जाँच की माँग अभी तक संसदीय समिति तक नहीं पहुँची। नीट पेपर लीक पर मसूद की भावनात्मक अपील जायज़ है, क्योंकि यह मुद्दा सीधे लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है — लेकिन विपक्ष को यह भी बताना होगा कि उसके शासनकाल में परीक्षा-तंत्र कितना सुरक्षित था। तीन असंबद्ध मुद्दों को एक ही बयान में समेटने की रणनीति मीडिया में जगह तो दिलाती है, पर गहन जवाबदेही के लिए एकाग्र दबाव ज़्यादा कारगर होता।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इमरान मसूद ने राम मंदिर चंदे को 'डकैती' क्यों कहा?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र चंदे में कथित अनियमितताओं को 'डकैती' बताया, यह कहते हुए कि यह मामूली रकम की बात नहीं है। उन्होंने इसे एक गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला करार दिया और जवाबदेही की माँग की।
ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट विवाद क्या है?
ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट एक बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजना है जिसका पर्यावरणविदों और विपक्षी नेताओं ने विरोध किया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विरोध को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा था, जिसके जवाब में मसूद ने सरकार पर आदिवासी और पर्यावरणीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।
नीट पेपर लीक मामले में कांग्रेस का क्या रुख है?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने नीट पेपर लीक के कारण हुई छात्र आत्महत्याओं की जिम्मेदारी सीधे केंद्र सरकार पर डाली है। उन्होंने पुनः परीक्षा के फैसले का स्वागत करते हुए भी माँग की कि इस बार परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित हो।
इमरान मसूद ने किन वर्गों के प्रभावित होने की बात कही?
मसूद ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियों से देश के गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक — यानी बहुसंख्यक आबादी — सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था केवल 10 प्रतिशत लोगों के हित में काम कर रही है।
क्या सरकार ने इमरान मसूद के आरोपों का जवाब दिया?
21 जून को मसूद के बयान के बाद केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इससे पहले ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के विरोध को लेकर राहुल गांधी पर अलग से टिप्पणी की थी।
राष्ट्र प्रेस
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