राम मंदिर चंदा विवाद: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद बोले — 'यह चोरी नहीं, डकैती है'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 21 जून को नई दिल्ली में राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने इसे महज चोरी नहीं, बल्कि 'डकैती' करार दिया और साथ ही ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट तथा नीट पुनः परीक्षा विवाद पर भी सरकार को घेरा। मसूद ने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों से देश के गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
राम मंदिर चंदा विवाद पर मसूद का तीखा बयान
राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर इमरान मसूद ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'बात चोरी की है, चंदा चोरी हुआ है और यह एक-दो रुपए की चोरी नहीं है — यह डकैती है। राम की माया राम जाने।' गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंदे के आरोप हाल के हफ्तों में राजनीतिक विमर्श का केंद्र बने हुए हैं, और विपक्षी दल लगातार जाँच की माँग कर रहे हैं।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट और राहुल गांधी विवाद
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के विरोध को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मसूद ने कहा कि सरकार देश की संपत्तियों को बेचने का काम कर रही है। उन्होंने कहा, 'सारी संपत्ति तो बेच दी आपने। अगर ऐसे ही चलता रहा तो देश का आदिवासी, दलित, बैकवर्ड और खासतौर से मुसलमान और अन्य माइनॉरिटी किस हाल में होंगे।' उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था 90 प्रतिशत जनता को हाशिये पर रखकर केवल 10 प्रतिशत के हित में काम कर रही है।
नीट विवाद: पेपर लीक पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया
नीट परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों और पुनः परीक्षा के फैसले पर मसूद ने उम्मीद जताई कि इस बार परीक्षा व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन साथ ही सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'पेपर लीक की वजह से कितने बच्चों ने आत्महत्या कर ली — उनकी मौत की जिम्मेदार यह सरकार है।' यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन और न्यायिक दबाव दोनों बढ़ रहे हैं।
आम जनता पर असर और आगे की राह
मसूद के बयान तीन अलग-अलग मुद्दों को एक साझा राजनीतिक आख्यान में पिरोते हैं — धार्मिक ट्रस्ट की पारदर्शिता, पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में विकास परियोजनाएँ, और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता। आलोचकों का कहना है कि इन तीनों मामलों में सरकार की जवाबदेही तंत्र कमज़ोर रही है। सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।