पेपर लीक पर केंद्र की जवाबदेही नहीं, युवाओं की अनदेखी: प्रियंका चतुर्वेदी का हमला
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 21 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद और संसद के मानसून सत्र जैसे अहम मुद्दों पर जवाबदेही से भाग रही है। उन्होंने कहा कि देशभर के युवाओं और छात्रों की चिंताओं को सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है।
राम मंदिर चंदा मामला: जांच पर सवाल
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि मौजूदा एसआईटी जांच पर ही गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौजूदा जांच की विश्वसनीयता संदिग्ध है तो मामले की जांच सीबीआई या सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में क्यों नहीं कराई जा रही। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राम मंदिर को आस्था से अधिक चुनावी अवसर के रूप में इस्तेमाल किया, जिसके कारण निष्पक्ष जांच आगे नहीं बढ़ पा रही और आरोपियों को कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।
पेपर लीक और छात्र आंदोलन
पूर्व सांसद ने कहा कि नीट पेपर लीक मामला सामने आए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी केंद्र सरकार ने ऐसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जिससे छात्रों का भरोसा बहाल हो सके। उन्होंने बताया कि हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं — कई ने पुनर्परीक्षा नहीं दी, कुछ ने पढ़ाई छोड़ दी और कुछ छात्रों ने आत्महत्या तक की। महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के पेपर लीक की कड़ियाँ भी उसी कथित नेटवर्क से जुड़ने की बात कही जा रही है। जंतर-मंतर पर अभिभावकों का धरना इस संकट की गहराई को दर्शाता है।
संसद का मानसून सत्र और विपक्ष का विरोध
चतुर्वेदी ने कहा कि संसद का मानसून सत्र सुचारु रूप से चल सकता था, लेकिन सरकार ने संवाद की जगह अहंकार का रास्ता अपनाया। उनके अनुसार, यदि सरकार समय रहते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेती तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। कांग्रेस, उसके युवा संगठन एनएसयूआई और अन्य छात्र संगठन लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी लंबे समय से छात्रों की आवाज बुलंद करते रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना
लोकतांत्रिक इतिहास में एक असाधारण दृश्य का जिक्र करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि दो मौजूदा मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने को मजबूर हुए क्योंकि सरकार तक छात्रों की आवाज नहीं पहुँच रही। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसके कई वीडियो सामने आए हैं। इसी के विरोध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेता धरने पर बैठे।
आगे क्या
विपक्ष की एकजुट माँग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और पूरे पेपर लीक मामले में स्वतंत्र एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए। चतुर्वेदी के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों का सड़क पर उतरना इस बात का संकेत है कि जनता का सरकार पर भरोसा कमज़ोर हो रहा है — और जब तक ठोस जवाबदेही नहीं होती, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।