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पेपर लीक पर केंद्र की जवाबदेही नहीं, युवाओं की अनदेखी: प्रियंका चतुर्वेदी का हमला

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पेपर लीक पर केंद्र की जवाबदेही नहीं, युवाओं की अनदेखी: प्रियंका चतुर्वेदी का हमला

सारांश

पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर एक साथ कई मोर्चों पर निशाना साधा — नीट पेपर लीक, राम मंदिर चंदा जांच, बाधित मानसून सत्र और प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी धरना। उनका सीधा सवाल: जब छात्र आत्महत्या कर रहे हैं, तो सरकार जवाबदेही से क्यों भाग रही है?

मुख्य बातें

प्रियंका चतुर्वेदी ने 21 जुलाई को केंद्र सरकार पर पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद और मानसून सत्र के मुद्दों पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।
राम मंदिर चंदा मामले में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद उन्होंने सीबीआई या न्यायिक निगरानी में जांच की माँग की।
नीट पेपर लीक के दो महीने बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं; कुछ छात्रों ने आत्महत्या की, कई ने पढ़ाई छोड़ी।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे।
विपक्ष की एकजुट माँग: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और स्वतंत्र जांच।

शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 21 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद और संसद के मानसून सत्र जैसे अहम मुद्दों पर जवाबदेही से भाग रही है। उन्होंने कहा कि देशभर के युवाओं और छात्रों की चिंताओं को सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है।

राम मंदिर चंदा मामला: जांच पर सवाल

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि मौजूदा एसआईटी जांच पर ही गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौजूदा जांच की विश्वसनीयता संदिग्ध है तो मामले की जांच सीबीआई या सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में क्यों नहीं कराई जा रही। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राम मंदिर को आस्था से अधिक चुनावी अवसर के रूप में इस्तेमाल किया, जिसके कारण निष्पक्ष जांच आगे नहीं बढ़ पा रही और आरोपियों को कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।

पेपर लीक और छात्र आंदोलन

पूर्व सांसद ने कहा कि नीट पेपर लीक मामला सामने आए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी केंद्र सरकार ने ऐसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जिससे छात्रों का भरोसा बहाल हो सके। उन्होंने बताया कि हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं — कई ने पुनर्परीक्षा नहीं दी, कुछ ने पढ़ाई छोड़ दी और कुछ छात्रों ने आत्महत्या तक की। महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के पेपर लीक की कड़ियाँ भी उसी कथित नेटवर्क से जुड़ने की बात कही जा रही है। जंतर-मंतर पर अभिभावकों का धरना इस संकट की गहराई को दर्शाता है।

संसद का मानसून सत्र और विपक्ष का विरोध

चतुर्वेदी ने कहा कि संसद का मानसून सत्र सुचारु रूप से चल सकता था, लेकिन सरकार ने संवाद की जगह अहंकार का रास्ता अपनाया। उनके अनुसार, यदि सरकार समय रहते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेती तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। कांग्रेस, उसके युवा संगठन एनएसयूआई और अन्य छात्र संगठन लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी लंबे समय से छात्रों की आवाज बुलंद करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना

लोकतांत्रिक इतिहास में एक असाधारण दृश्य का जिक्र करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि दो मौजूदा मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने को मजबूर हुए क्योंकि सरकार तक छात्रों की आवाज नहीं पहुँच रही। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसके कई वीडियो सामने आए हैं। इसी के विरोध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेता धरने पर बैठे।

आगे क्या

विपक्ष की एकजुट माँग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और पूरे पेपर लीक मामले में स्वतंत्र एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए। चतुर्वेदी के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों का सड़क पर उतरना इस बात का संकेत है कि जनता का सरकार पर भरोसा कमज़ोर हो रहा है — और जब तक ठोस जवाबदेही नहीं होती, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका समय महत्वपूर्ण है — जब छात्र आत्महत्या की खबरें आ रही हों और अभिभावक जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हों, तब सरकार की चुप्पी महज राजनीतिक विफलता नहीं, नैतिक विफलता भी बन जाती है। राम मंदिर चंदा विवाद में सीबीआई जांच की माँग और नीट लीक में स्वतंत्र निगरानी की जरूरत — दोनों मुद्दे एक ही बड़े सवाल की ओर इशारा करते हैं: क्या सत्ता में रहते हुए जवाबदेही संभव है? मानसून सत्र का बाधित होना और प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना — ये लोकतंत्र के संकट के लक्षण हैं, जिन्हें केवल इस्तीफे से नहीं, संस्थागत सुधार से ही ठीक किया जा सकता है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद और मानसून सत्र जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के बजाय उनसे बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों की चिंताओं को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही।
राम मंदिर चंदा विवाद में विपक्ष क्या माँग कर रहा है?
चतुर्वेदी ने माँग की कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच सीबीआई या सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा एसआईटी जांच पर ही सर्वोच्च न्यायालय ने सवाल उठाए हैं, इसलिए नई एसआईटी से काम नहीं चलेगा।
नीट पेपर लीक मामले में अब तक क्या हुआ?
नीट पेपर लीक मामला सामने आए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान कई छात्रों ने पुनर्परीक्षा नहीं दी, कुछ ने पढ़ाई छोड़ दी और कुछ ने आत्महत्या की। महाराष्ट्र में TET पेपर लीक की कड़ियाँ भी उसी कथित नेटवर्क से जुड़ने की बात कही जा रही है।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्ष ने धरना क्यों दिया?
विपक्षी नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक मामले में जवाबदेही की माँग को लेकर प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत नेताओं ने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा छात्र प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद यह कदम जरूरी हो गया।
संसद का मानसून सत्र क्यों बाधित हो रहा है?
चतुर्वेदी के अनुसार, सरकार ने संवाद की जगह अहंकार का रास्ता अपनाया और समय पर जवाबदेही नहीं तय की, जिससे विपक्ष को सड़क पर उतरने और सदन में हंगामा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। पेपर लीक और TET विवाद पर सरकार की निष्क्रियता को मानसून सत्र बाधित होने की मुख्य वजह बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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