राम मंदिर चंदा विवाद पर सलमान खुर्शीद का सवाल: 'क्या आस्था से बड़ा हो गया धन?'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने 24 जून 2026 को राम मंदिर के कथित चंदा विवाद पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला और सवाल उठाया कि क्या मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों ने भगवान राम के प्रति आस्था को दरकिनार कर धन को प्राथमिकता दी। साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयानों को 'हवाई दावे' करार दिया और उनसे ज़मीनी हकीकत का जवाब माँगा।
राम मंदिर चंदा विवाद पर खुर्शीद का वार
खुर्शीद ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण से जुड़े लोगों को कथित चंदा विवाद पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उनके शब्दों में, 'जो लोग राम मंदिर पर अपना अधिकार जताते हैं और हर जगह इसकी चर्चा करते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या उन्होंने भगवान राम की आस्था से अधिक पैसे को महत्व दिया है।' उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम के प्रति आस्था सभी की है — चाहे वह सनातन धर्म से जुड़े लोग हों या अन्य।
धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना
खुर्शीद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की आलोचना करते हुए कहा कि उनके बयान केवल कागज़ी या हवाई दावों तक सीमित हैं। उन्होंने माँग की कि प्रधान को ज़मीन पर दिख रही असलियत का जवाब देना चाहिए। हालाँकि उन्होंने किसी विशेष नीतिगत मुद्दे का नाम नहीं लिया, उनका इशारा शिक्षा क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियों की ओर था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और भारत-ईरान संबंध
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुले रहने के मुद्दे पर खुर्शीद ने कहा कि इसे खुला रखने के लिए पहल की गई है और भारत की ओर से भी इस संबंध में पेशकश की गई थी। उन्होंने उल्लेख किया कि जब ईरान की एक नौका को डुबोया गया था, तब भारत की ओर से कोई औपचारिक शिकायत नहीं की गई, फिर भी ईरान ने भारत पर कोई आरोप नहीं लगाया। खुर्शीद के अनुसार, 'ईरान काफी उदार देश है और भारत-ईरान के संबंध काफी पुराने हैं — ऐसे में भारत को ईरान का आभार व्यक्त करना चाहिए।'
कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर प्रतिक्रिया
BJP नेता कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए खुर्शीद ने कहा, 'अगर हम सड़क पर न चलें तो कहाँ जाएँ? सड़क हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों — सभी ने मिलकर बनाई है।' उन्होंने यह भी कहा कि देश की आज़ादी की लड़ाई में मुसलमानों सहित सभी समुदायों ने कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया था और उस वक्त किसी को हिंदू या मुसलमान नहीं, बल्कि 'भारतवासी' कहा जाता था।
सामाजिक एकता पर ज़ोर
खुर्शीद ने कहा कि देशवासियों ने मिलकर इस देश का निर्माण किया है, लेकिन आज उन्हें बाँटने की बातें की जा रही हैं। उनका कहना था कि चर्चा सड़क की नहीं, देश की होनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को लेकर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तनातनी बढ़ती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आगामी चुनावों से पहले इस तरह के बयान राजनीतिक विमर्श को और तेज़ कर सकते हैं।