राहुल गांधी का लक्ष्य संवाद नहीं, अराजकता है: जेपी नड्डा का कांग्रेस पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार, 10 अगस्त को नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संसद को जानबूझकर बाधित करने और झारखंड के छात्र आंदोलन पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। नड्डा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राहुल गांधी का उद्देश्य संवाद नहीं, बल्कि अराजकता फैलाना है।
मुख्य घटनाक्रम
नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पिछले 15 दिनों से सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं और हर बार नया मुद्दा उठाकर 'गोलपोस्ट बदल' रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले नीट पर चर्चा की मांग की गई, जब सरकार तैयार हुई तो राम मंदिर न्यास का विषय उठाया गया, और फिर जंतर-मंतर घटनाक्रम पर गृह मंत्री के बयान की जिद पकड़ी गई।
नड्डा के अनुसार, आज जब जंतर-मंतर पर चर्चा का निर्णय हो गया, तो राहुल गांधी यह भ्रम फैलाने लगे कि 'संसद में जंतर-मंतर में गोली चली।' नड्डा ने स्पष्ट किया कि 'जंतर-मंतर में न कोई गोली चली है, न गोली चलाने का कोई आदेश दिया गया है।'
सरकार की चुनौती
गृह मंत्री अमित शाह के हवाले से नड्डा ने कहा कि शाह केवल वक्तव्य नहीं, बल्कि पूरी बहस और चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने राहुल गांधी को सीधे चुनौती दी — 'सदन में आएं, चर्चा से मत भागें, मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।'
रिजिजू ने बताया कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में भी सरकार ने छात्र आंदोलन पर पूर्ण चर्चा की तैयारी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों के आपसी मतभेद उन्हें खुद सुलझाने चाहिए।
झारखंड छात्र आंदोलन पर निशाना
नड्डा ने राहुल गांधी से पूछा कि झारखंड में छात्रों के आंदोलन पर वह चुप क्यों हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां राहुल गांधी के इशारे पर चलने वाली सरकार ने छात्रों के खिलाफ कंटीली तारें लगाईं। नड्डा ने इसे 'डबल स्टैंडर्ड' करार दिया और कहा कि कांग्रेस का यही इतिहास रहा है — चर्चा मांगो, जवाब आने पर सदन से निकल जाओ।
कांग्रेस के रिकॉर्ड पर सवाल
नड्डा ने याद दिलाया कि एसआईआर और मूल्य वृद्धि जैसे विषयों पर भी कांग्रेस ने चर्चा की मांग की थी, लेकिन जब सरकार जवाब देने उठी तो कांग्रेस सदन में बैठने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। उन्होंने कहा, 'यह इनका इतिहास है, यह इनका रिकॉर्ड है।'
यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का मानसून सत्र लगातार व्यवधान की भेंट चढ़ रहा है और सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच बहस के मुद्दे तेज़ी से बदल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या जंतर-मंतर पर प्रस्तावित चर्चा वास्तव में सदन में हो पाती है।