बिहार सरकार की सख्त नीति: बालू घाटों को छोड़ने वालों को नहीं मिलेगा दोबारा टेंडर
सारांश
Key Takeaways
- बालू घाटों के ठेके छोड़ने पर कार्रवाई
- भविष्य में टेंडर में शामिल नहीं होने की नीति
- अवैध खनन के खिलाफ अभियान
- ट्रांजिट चालान की अनिवार्यता
- राजस्व संग्रह में वृद्धि
पटना, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार ने राज्य में बालू घाटों के ठेके को बीच में छोड़ने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे ठेकेदारों को भविष्य में टेंडर में फिर से शामिल नहीं किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री और खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि ऐसे लगभग 78 कंपनियों को, जो राजस्व में हानि पहुंचाने के लिए जिम्मेदार हैं, ब्लैक लिस्टेड करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि बालू घाटों की बोली पिछले साल की तुलना में तीन से चार गुना अधिक थी, लेकिन कई कंपनियों ने मुनाफा न होने का बहाना बनाकर ठेका छोड़ दिया। कुछ स्थानों पर तो बालू माफियाओं की मिलीभगत भी सामने आई है।
डिप्टी सीएम ने 71 बिहारी योद्धाओं को पुरस्कार वितरित किया, जिन्होंने अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खनिज वाहनों की सूचना देकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इन योद्धाओं के नाम और पते गोपनीय रखे गए हैं।
सिन्हा ने बताया कि जिन घाटों को सरेंडर किया गया है, उनकी समीक्षा के लिए जिलों में डीएम की अध्यक्षता में एक जिला टास्क फोर्स का गठन किया गया है, ताकि उन्हें फिर से टेंडर के लिए प्रस्तुत किया जा सके। सरकार जल्द ही बंद पड़े घाटों का मूल्यांकन करके उनकी निविदा फिर से निकालने की योजना बना रही है।
मंत्री ने यह भी बताया कि अन्य राज्यों से आने वाले खनिज लदे वाहनों के लिए ट्रांजिट चालान लेना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है, जिससे सीमावर्ती जिलों की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
उन्होंने दावा किया कि विभाग में राजस्व संग्रह में निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्ष 2021-22 में 1600 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 3500 करोड़ रुपए तक पहुँच गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3800 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से तीन हजार करोड़ रुपए अब तक प्राप्त हो चुके हैं। मार्च के अंत तक लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है।
सिन्हा ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। राज्यभर में 2025 में अप्रैल से नवंबर तक 31,297 छापेमारी की गई है, जिसमें 1600 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गृह विभाग से छापेमारी के लिए 400 अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की गई है। सभी घाटों की ऑनलाइन निगरानी सीसीटीवी के माध्यम से की जा रही है। इस प्रेस वार्ता में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव दिवेश सेहरा और निदेशक मनेश कुमार मीणा भी उपस्थित थे।