पश्चिम बंगाल में कोयला-बालू की तस्करी रोकने से राजस्व में 33% की बढ़ोतरी: मंत्री दिलीप घोष
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने 16 सितंबर 2026 को न्यूटाउन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य में कोयला, बालू और लकड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की अवैध लूट पर लगाम लगाने से सरकारी राजस्व में 33 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सकारात्मक रुझान आगे भी बना रहेगा।
प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर सख्ती
मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में सालों से कोयला, बालू और लकड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की लूट हो रही थी, जिससे राज्य को कोई राजस्व नहीं मिल रहा था। इस चोरी पर रोक लगाने से सरकारी राजस्व में 33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध खनन और तस्करी पर की गई सख्ती का सीधा लाभ राज्य के खजाने को हुआ है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में कोयला और बालू के अवैध खनन की समस्या लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। राज्य सरकार के इस दावे के अनुसार, प्रशासनिक सख्ती ने राजस्व संग्रह की दिशा बदल दी है।
UPI चार्ज पर सरकार का रुख
₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत यूपीआई चार्ज लगाए जाने के प्रश्न पर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'कोई भी कंपनी जो सेवा देती है, वह फीस लेती है। सरकार की यूपीआई सेवा ने बहुत सुविधा दी है, इसलिए सिस्टम में अनुशासन बनाए रखने और राजस्व पैदा करने के लिए एक न्यूनतम शुल्क लिया जाना चाहिए।'
उन्होंने जोड़ा कि यूपीआई ने लोगों को बड़ी सहूलियत दी है और इसके रखरखाव के लिए मामूली शुल्क आवश्यक है। यह ऐसे समय में आया है जब यूपीआई चार्ज का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर व्यापारी संगठनों और उपभोक्ता समूहों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
कांग्रेस पर तीखा हमला
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'कांग्रेस ने लोगों को कुछ नहीं दिया, सिर्फ लूटा है। अगर जनता को लगता है कि बहुत ज्यादा हो रहा है, तो वह विरोध करेगी।' उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में विदेशी मेहमानों के भोजन को लेकर उठाए गए विवाद का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी से लेकर पी. चिदंबरम तक सभी को इस पर आपत्ति थी।
उन्होंने कहा, 'जिन्होंने वास्तव में खाना खाया उन्हें कोई समस्या नहीं हुई, वे भारतीय खाने की तारीफ करते हुए घर गए। इसलिए कांग्रेस को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है।' आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार का दावा है कि अवैध खनन पर सख्ती का यह क्रम जारी रहेगा और आने वाले समय में राजस्व वृद्धि के और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। यूपीआई चार्ज के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतिगत स्थिति का इंतजार किया जा रहा है, जो व्यापारियों और डिजिटल भुगतान उपयोगकर्ताओं दोनों को प्रभावित करेगी।