टुल्लू मंडल के घर कैश-सोना बरामद: दिलीप घोष बोले, 'TMC राज में चहेतों ने लूटे जिलों के संसाधन'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 30 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अनुब्रत मंडल के करीबी सहयोगी टुल्लू मंडल के घर से करोड़ों रुपये की नकदी और सोना बरामद होने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। घोष ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती TMC सरकार ने ऐसे बिचौलियों को संरक्षण दिया, जो राज्य के संसाधनों की व्यवस्थित लूट में लगे थे।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस की कार्रवाई में टुल्लू मंडल के आवास से बड़ी मात्रा में नकदी और सोना जब्त किया गया। टुल्लू मंडल को TMC के वरिष्ठ नेता अनुब्रत मंडल का करीबी माना जाता है। यह बरामदगी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और 'कट मनी' कल्चर को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से गर्म है।
दिलीप घोष के आरोप
मीडिया से बात करते हुए मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'तुलु मंडल जैसे कई ब्रोकर हैं। पिछली TMC सरकार ने ऐसे लोगों को तैयार किया था। जो भी संसाधन लूटे गए और जो भी कट मनी इकट्ठा की गई, उसे ऐसे ही कुछ लोगों के ज़रिए पुलिस की मदद से कालीघाट भेजा जाता था। अब सब कुछ सामने आ रहा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'अनुब्रत मंडल एक बड़े नेता थे, इसलिए इसमें कोई हैरानी नहीं कि उनके साथियों ने भी अकूत दौलत जमा कर ली। अगर उनके पास 10-20 करोड़ रुपये या 50-100 करोड़ रुपये थे, तो उनके कई साथियों के पास भी इतनी ही रकम है।'
किन जिलों पर पड़ा असर
घोष ने दावा किया कि इसी लूट की वजह से बीरभूम, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया और बांकुरा जैसे जिलों का विकास अवरुद्ध रहा। उनके अनुसार, इन जिलों के संसाधन सालों तक बिचौलियों की जेब में जाते रहे — न आम जनता को लाभ मिला, न सरकारी खजाने में राशि आई।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
दिलीप घोष ने कहा कि देश भर में पश्चिम बंगाल का 'कट मनी' कल्चर और जबरन वसूली की प्रवृत्ति जानी-पहचानी है। उन्होंने दावा किया कि अब यह सिलसिला थम गया है और राज्य का सरकारी राजस्व बढ़ रहा है। घोष के अनुसार, पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में कई और नामों का खुलासा होगा।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि अनुब्रत मंडल पहले से ही पशु तस्करी घोटाले में न्यायिक जाँच का सामना कर रहे हैं। यह ताज़ा बरामदगी उस व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करती है, जिसमें TMC के नेताओं और उनके सहयोगियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच ज़रूरी है ताकि दोषियों की वास्तविक जवाबदेही तय हो सके।