ईडी ने अवैध कोयला खनन मामले में 159.51 करोड़ रुपए की संपत्ति को किया जब्त

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ईडी ने अवैध कोयला खनन मामले में 159.51 करोड़ रुपए की संपत्ति को किया जब्त

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध कोयला खनन और चोरी के मामले में 159.51 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई है। जानें इस गिरोह के बारे में और कैसे यह अवैध गतिविधियाँ चलाते थे।

Key Takeaways

  • ईडी ने अवैध कोयला खनन में 159.51 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की।
  • जांच में अनुप माजी उर्फ 'लाला' का नाम सामने आया।
  • संपत्तियों में कॉरपोरेट बॉंड और वैकल्पिक निवेश फंड शामिल हैं।
  • गिरोह ने फर्जी ट्रांसपोर्ट चालान का उपयोग किया।
  • हवाला प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा था।

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध कोयला खनन और चोरी के एक बड़े मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए 159.51 करोड़ रुपए की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।

जांच में पता चला है कि यह अवैध खनन एक गिरोह द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसका मुख्य नेतृत्व अनुप माजी उर्फ 'लाला' कर रहा था। पश्चिम बंगाल की कुछ कंपनियों ने जानबूझकर नकद में अवैध कोयला खरीदा, जिससे काले धन को वैध बनाने में सहायता मिली।

जब्त की गई संपत्तियों में वित्तीय निवेश शामिल हैं, जैसे कॉरपोरेट बॉंड और वैकल्पिक निवेश फंड। ये निवेश श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड और श्याम फेरो अलॉयज लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम पर पाए गए, जो श्याम समूह से संबंधित हैं। इस समूह का संचालन संजय अग्रवाल और बृज भूषण अग्रवाल करते हैं।

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि यह गिरोह बड़े पैमाने पर अवैध खनन और कोयले की चोरी कर रहा था, जिसे पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में पहुंचाया जा रहा था। इसमें कुछ स्थानीय प्रशासनिक व्यक्तियों की भी मदद ली जा रही थी।

इस गिरोह का एक प्रमुख तरीका 'लाला पैड' नामक फर्जी ट्रांसपोर्ट चालान था, जिसे नकली कंपनियों के नाम पर जारी किया जाता था। इसके साथ ट्रांसपोर्टर को 10 या 20 रुपए का नोट दिया जाता था। ट्रांसपोर्टर उस नोट को ट्रक के नंबर प्लेट के साथ पकड़कर फोटो खींचता था और गिरोह के संचालकों को भेजता था।

इसके बाद यह फोटो व्हाट्सएप के माध्यम से रास्ते में मौजूद पुलिस और अन्य अधिकारियों को भेजी जाती थी, ताकि ट्रक को रोका न जाए या रोके जाने पर तुरंत छोड़ दिया जाए। जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में हवाला का उपयोग किया जा रहा था। नकद लेन-देन बिना बैंक के माध्यम से किया जाता था और पैसे की पहचान के लिए नोट के नंबर का उपयोग किया जाता था, जिससे पैसे आसानी से और बिना रिकॉर्ड के पहुंचाए जा सकें।

इस नई कार्रवाई के बाद अब तक कुल 482.22 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। ईडी का कहना है कि यह मामला कई जटिल वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है, जिनका उद्देश्य अवैध धन के असली स्रोत को छिपाना है। एजेंसी आगे भी जांच जारी रखे हुए है और इसमें शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

Point of View

बल्कि न्याय प्रणाली में विश्वास भी बढ़ाएगा।
NationPress
15/04/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने यह कार्रवाई क्यों की?
ईडी ने अवैध कोयला खनन और धन शोधन के मामले में कार्रवाई की है, जिससे 159.51 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई।
क्या गिरोह में कोई उच्च अधिकारी शामिल था?
जांच में पाया गया है कि कुछ स्थानीय प्रशासनिक व्यक्तियों ने गिरोह की मदद की थी।
हवाला का क्या संबंध है?
इस गिरोह के नेटवर्क में हवाला का उपयोग किया जा रहा था, जिससे नकद लेन-देन बिना बैंक के माध्यम से किया जा सके।
ईडी की अगली कार्रवाई क्या होगी?
ईडी आगे भी जांच जारी रखे हुए है और इसमें शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
इस मामले में अब तक कितनी संपत्ति जब्त की गई है?
इस मामले में अब तक कुल 482.22 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।
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