चमोली टनल हादसा: THDC सुरंग में 7 की मौत, 19 बचाए गए, 3 की तलाश जारी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के चमोली जिले में मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी (THDC) की निर्माणाधीन सुरंग में 14 अगस्त को भूधंसाव के कारण मलबा और पानी भर जाने से 22 मजदूर अंदर फंस गए। रातभर चले राहत एवं बचाव अभियान में अब तक 19 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि 7 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है और 3 लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
हादसे का घटनाक्रम
टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के टीआरटी टनल की कुल लंबाई लगभग 3 किलोमीटर है। भूधंसाव के कारण टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में मलबा और पानी आ गया, जिससे उस समय सुरंग के भीतर कार्यरत मजदूर फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल राहत अभियान शुरू किया।
गोपेश्वर के जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आयुष ने बताया, 'अब तक टीएचडीसी से कुल 19 लोगों को हमारे पास लाया गया था। इनमें से 7 लोगों को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि 13 लोग अभी भर्ती हैं और उनकी हालत काफी हद तक स्थिर है।'
बचाव दल की त्वरित कार्रवाई
एनडीआरएफ के टीम कमांडर अमृत लाल मीणा ने बताया कि उनकी टीम गौचर से रवाना हुई। उन्होंने कहा, 'जैसे ही हमें जानकारी मिली, हमने 5 मिनट के अंदर टीम को रवाना कर दिया। हमें शाम 7.15 बजे सूचना मिली, हम रात 8.45 बजे घटनास्थल पर पहुँचे और 8.55 बजे ऑपरेशन शुरू किया।' उन्होंने बताया कि 6 बचावकर्मियों की क्विक रिस्पॉन्स टीम सबसे पहले सुरंग के अंदर गई, जहाँ पानी का स्तर छाती से ऊपर था। बचाव अभियान के दौरान टीम ने 4 लोगों के शव भी बाहर निकाले।
उल्लेखनीय है कि राहत कार्यों में सहयोग के लिए सुरंग के भीतर गए 6 बचावकर्मी सुरक्षित हैं।
प्रशासन और बहु-एजेंसी समन्वय
जिलाधिकारी गौरव कुमार स्वयं रातभर घटनास्थल पर उपस्थित रहकर बचाव अभियान की निगरानी करते रहे। उन्होंने अधिकारियों को शेष फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सभी आवश्यक संसाधनों और तकनीकी सहायता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बचाव अभियान में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), आईटीबीपी (ITBP), पुलिस और अन्य तकनीकी एवं विशेषज्ञ टीमें मौके पर तैनात हैं। मलबे और पानी की दोहरी चुनौती के बीच बचाव दल अत्यंत सावधानी और समन्वय के साथ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
घायलों का उपचार
बचाए गए घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय, गोपेश्वर में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार उनकी निगरानी कर रही हैं। भर्ती 13 मरीजों की स्थिति अभी स्थिर बताई जा रही है।
आगे क्या
अभी भी सुरंग के भीतर 3 लोगों का पता नहीं चल पाया है। बचाव दल मलबे और पानी के बीच उन्हें खोजने का अभियान जारी रखे हुए है। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के चलते भूधंसाव की घटनाएँ बढ़ी हुई हैं और निर्माणाधीन सुरंगों में सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं।