14 अगस्त 2026
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चमोली टनल हादसा: 7 मजदूरों की मौत, 14 घायल; CM धामी आज पीपलकोटी पहुँचेंगे

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चमोली टनल हादसा: 7 मजदूरों की मौत, 14 घायल; CM धामी आज पीपलकोटी पहुँचेंगे

सारांश

उत्तराखंड के चमोली में पीपलकोटी रेलवे टनल में पानी और मलबा घुसने से 7 मजदूरों की जान गई, 14 घायल हैं। सेना, NDRF, ITBP और SDRF का संयुक्त बचाव अभियान जारी है। CM धामी आज घटनास्थल पहुँचकर राहत कार्यों का जायजा लेंगे।

मुख्य बातें

चमोली जिले के पीपलकोटी में निर्माणाधीन रेलवे टनल में 14 अगस्त, गुरुवार शाम 6:30 बजे पानी और मलबा घुसा।
हादसे में 7 मजदूरों की मौत हो चुकी है; 14 घायल जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में भर्ती।
हादसे के समय 20 से 25 मजदूर टनल के अंदर काम कर रहे थे।
भारतीय सेना (HARD), ITBP, NDRF, SDRF और जिला प्रशासन का संयुक्त बचाव अभियान जारी।
CM पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार सुबह घटनास्थल और गोपेश्वर अस्पताल का दौरा करेंगे।

उत्तराखंड के चमोली जिले में पीपलकोटी स्थित निर्माणाधीन रेलवे टनल में गुरुवार, 14 अगस्त की शाम अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव घुस जाने से भीषण हादसा हो गया, जिसमें अब तक 7 मजदूरों की मौत हो चुकी है और 14 अन्य घायल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार सुबह घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुँचेंगे और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे।

हादसे का घटनाक्रम

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि गुरुवार शाम लगभग 6:30 बजे टनल में निर्माण कार्य जारी था, तभी बड़ी मात्रा में पानी और मलबा भीतर घुस गया। उस समय 20 से 25 मजदूर टनल के अंदर काम कर रहे थे, जो इस अचानक आई आपदा में फँस गए। बचाव दल के पहुँचने तक कई मजदूर बाहर नहीं निकल पाए।

घायलों की स्थिति

जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में अब तक 14 घायलों को भर्ती कराया गया है। इनमें सुनील दीवान, हाबिल गुडिया, निस्तर भिगंरा, विनोद रावना, दीना बेगरा, खेला राम बिसरा, छबेग सिंह, तिलक राज, चन्दन कुमार, अवधेश, नन्दलाल, रोहित पाण्डे, पेन सिंह और गोविंद शामिल हैं। सभी घायलों का उपचार जारी है।

CM धामी का दौरा और निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार सुबह पीपलकोटी टनल हादसा स्थल पहुँचकर राहत-बचाव कार्यों का जायजा लेंगे। इसके बाद वह गोपेश्वर जिला अस्पताल जाकर भर्ती घायलों से मिलेंगे और उपचार व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। धामी ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि वह वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार रियल-टाइम अपडेट लेकर स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। दोपहर 12:30 बजे मुख्यमंत्री हरिद्वार में प्रेमनगर आश्रम में आयोजित 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।

राहत-बचाव में जुटी एजेंसियाँ

भारतीय सेना की मानवीय सहायता और आपदा राहत (HARD) टीम तथा मेडिकल दल जोशीमठ से घटनास्थल पर पहुँच चुके हैं। उनके साथ ITBP, NDRF, SDRF, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें भी बचाव अभियान में जुटी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में मानसून के कारण पहले से ही भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएँ बढ़ी हुई हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधि की प्रतिक्रिया

स्थानीय विधायक लखपत बुटोला ने इस घटना को 'गहरा दुखद हादसा' बताया। उन्होंने कहा, 'प्रशासन की पूरी टीम और मेरे सभी साथी मौके पर पहुँच चुके हैं। हमारी प्राथमिकता बचाव कार्य में लगे लोगों को हर संभव सहयोग देना है।' गौरतलब है कि पहाड़ी इलाकों में निर्माणाधीन टनलों में इस तरह के हादसे पहले भी हो चुके हैं — 2023 में उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में 41 मजदूर 17 दिनों तक फँसे रहे थे। राहत-बचाव अभियान अभी जारी है और स्थिति पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जवाबदेही यह होगी कि क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ था — यह जाँच का विषय बनना चाहिए, न केवल शोक का।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चमोली टनल हादसा कब और कैसे हुआ?
यह हादसा 14 अगस्त 2026 को गुरुवार शाम लगभग 6:30 बजे हुआ, जब पीपलकोटी में निर्माणाधीन रेलवे टनल के अंदर अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबा घुस गया। उस समय 20 से 25 मजदूर टनल के भीतर काम कर रहे थे।
चमोली टनल हादसे में कितने लोगों की मौत हुई और कितने घायल हैं?
अब तक 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 14 घायलों को जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में भर्ती कराया गया है। बचाव अभियान अभी जारी है।
CM धामी चमोली कब पहुँचेंगे और क्या करेंगे?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार सुबह पीपलकोटी टनल हादसा स्थल पहुँचेंगे और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लेंगे। इसके बाद वह गोपेश्वर जिला अस्पताल में भर्ती घायलों से मिलेंगे और उपचार व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
भारतीय सेना की HARD और मेडिकल टीमें जोशीमठ से घटनास्थल पर पहुँच चुकी हैं। इनके साथ ITBP, NDRF, SDRF, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मिलकर राहत-बचाव कार्य चला रही हैं।
क्या उत्तराखंड में पहले भी टनल हादसे हो चुके हैं?
हाँ, 2023 में उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में 41 मजदूर 17 दिनों तक फँसे रहे थे। चमोली का यह हादसा पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठाता है।
राष्ट्र प्रेस
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