चमोली टनल हादसा: झारखंड CM हेमंत सोरेन ने धामी से की बात, 22 में से 16 मजदूर सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के चमोली जिले में टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में मलबा और पानी भरने से 22 मजदूरों के फंसने की खबर सामने आई है, जिनमें से 16 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। शेष मजदूरों को बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी है। इस हादसे में झारखंड के खूंटी, गुमला सहित अन्य जिलों के श्रमिकों के फंसे होने की सूचना है।
सोरेन-धामी के बीच फोन पर संवाद
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस हादसे का तत्काल संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात की। सोरेन ने बताया कि धामी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि सभी फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। सोरेन ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा कि बार-बार निर्माणाधीन सुरंगों में हादसों और श्रमिकों के फंसने की खबरें मन को व्यथित करती हैं — विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ।
झारखंड सरकार की हेल्पलाइन
मुख्यमंत्री सोरेन ने झारखंड के उन परिजनों से अपील की है जिनके स्वजन इस परियोजना में कार्यरत हैं। उन्होंने राज्य सरकार के निम्न नंबरों पर संपर्क करने का आग्रह किया:
टोल फ्री हेल्पलाइन: 1800-3456-526
व्हाट्सएप नंबर: 9470132591, 9431336472, 9431336427
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह हर श्रमिक की सुरक्षित वापसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
धामी का रात में कमान संभालना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार देर रात सुरंग में मलबा और पानी भरने की सूचना मिलते ही तत्काल राज्य आपदा परिचालन केंद्र, देहरादून पहुँचे। वहाँ से उन्होंने एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और चमोली जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा और पल-पल की स्थिति की जानकारी लेते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए। धामी ने रेस्क्यू किए गए मजदूरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे बात कर उनका हौसला बढ़ाया और उपचार एवं पुनर्वास की समुचित व्यवस्था का भरोसा दिलाया।
बचाव अभियान की स्थिति
ताज़ा जानकारी के अनुसार, सुरंग में कुल 22 व्यक्ति फंसे थे, जिनमें से 16 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। शेष लोगों को बाहर निकालने का अभियान अनवरत जारी है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टनल में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता है और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
पर्यावरण और श्रमिक सुरक्षा पर सवाल
मुख्यमंत्री सोरेन ने इस हादसे को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम हमें बार-बार चेताते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्रों में निर्माण परियोजनाओं में श्रमिक सुरक्षा और पर्यावरणीय जोखिम पर बहस पहले से ही तेज है। गौरतलब है कि 2023 के उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल हादसे के बाद भी सुरंग निर्माण में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की माँग उठी थी। अब यह दूसरा बड़ा मामला उत्तराखंड में सामने आया है।