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चमोली सुरंग हादसा: झारखंड के खूंटी-गुमला के श्रमिक फंसे, CM सोरेन ने धामी से की बात, हेल्पलाइन जारी

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चमोली सुरंग हादसा: झारखंड के खूंटी-गुमला के श्रमिक फंसे, CM सोरेन ने धामी से की बात, हेल्पलाइन जारी

सारांश

उत्तराखंड के चमोली में विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रो प्रोजेक्ट की सुरंग में पानी-मलबा भरने से झारखंड के खूंटी-गुमला के श्रमिक फंस गए। CM सोरेन ने CM धामी से बात कर मदद माँगी, हेल्पलाइन जारी की और प्रकृति के अंधाधुंध दोहन पर चिंता जताई।

मुख्य बातें

उत्तराखंड के चमोली के पीपलकोटी क्षेत्र में विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग में गुरुवार शाम पानी और मलबा भरने से कई श्रमिक फंसे।
फंसे श्रमिकों में झारखंड के खूंटी और गुमला सहित अन्य जिलों के मज़दूर शामिल बताए जा रहे हैं।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर सुरक्षित बचाव का आश्वासन लिया।
NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुँचकर बचाव अभियान में जुटी हैं।
झारखंड सरकार ने टोल फ्री हेल्पलाइन 1800-3456-526 तथा व्हाट्सऐप नंबर 9470132591 , 9431336472 , 9431336427 जारी किए हैं।

उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी क्षेत्र में निर्माणाधीन विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग में गुरुवार शाम अचानक पानी और मलबा भर जाने से कई श्रमिक फंस गए। इनमें झारखंड के खूंटी, गुमला सहित अन्य जिलों के श्रमिकों के होने की सूचना है। घटना की जानकारी मिलते ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात की।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों के अनुसार, विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार शाम अचानक पानी और मलबा घुस आया, जिससे अंदर काम कर रहे कई श्रमिक फंस गए। हादसे की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), जिला प्रशासन और अन्य राहत-बचाव एजेंसियाँ मौके पर पहुँचीं और बचाव अभियान शुरू किया।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री धामी ने सोरेन को भरोसा दिलाया कि सुरंग में फंसे सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस घटना को 'चिंताजनक' बताते हुए कहा कि निर्माणाधीन सुरंगों में बार-बार हादसे और श्रमिकों के फंसने की खबरें गहरी चिंता पैदा करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्रकृति और पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाना चाहिए — 'प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम बार-बार सामने आ रहे हैं।'

हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र

झारखंड सरकार ने प्रभावित परिजनों की सहायता के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-3456-526 जारी किया है। इसके अलावा 9470132591, 9431336472 और 9431336427 पर व्हाट्सऐप के माध्यम से भी जानकारी साझा की जा सकती है। मुख्यमंत्री सोरेन ने उन सभी लोगों से अपील की है जिनके परिजन या परिचित चमोली की इस परियोजना में कार्यरत हैं, वे राज्य सरकार के कंट्रोल रूम से संपर्क करें और श्रमिकों से संबंधित उपलब्ध जानकारी साझा करें।

आम जनता पर असर

यह हादसा उन हजारों प्रवासी श्रमिकों की कमजोर स्थिति को उजागर करता है जो झारखंड जैसे राज्यों से उत्तराखंड की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में काम करने जाते हैं। खूंटी और गुमला जैसे जिले आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं, जहाँ से बड़ी संख्या में श्रमिक रोज़गार की तलाश में पहाड़ी राज्यों की निर्माण परियोजनाओं में जाते हैं। गौरतलब है कि यह उत्तराखंड में किसी सुरंग से जुड़ा पहला हादसा नहीं है — नवंबर 2023 में सिलक्यारा सुरंग में भी 41 श्रमिक 17 दिनों तक फंसे रहे थे।

क्या होगा आगे

झारखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह उत्तराखंड प्रशासन के लगातार संपर्क में है और स्थिति पर निरंतर नज़र रखी जा रही है। मुख्यमंत्री सोरेन ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार झारखंड के श्रमिकों की सुरक्षित वापसी के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। बचाव अभियान जारी है और आगे की जानकारी आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

ओडिशा जैसे राज्यों के आदिवासी और प्रवासी मज़दूर ही सबसे अधिक प्रभावित होते हैं — जो यह दर्शाता है कि श्रमिक सुरक्षा प्रोटोकॉल और अंतर-राज्यीय समन्वय तंत्र अभी भी कमज़ोर है। CM सोरेन का पर्यावरण दोहन पर बयान राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन असली जवाबदेही तब तय होगी जब यह स्पष्ट हो कि सुरंग में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चमोली सुरंग हादसा क्या है और कब हुआ?
उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी क्षेत्र में विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार शाम अचानक पानी और मलबा भर जाने से कई श्रमिक फंस गए। NDRF और SDRF की टीमें मौके पर बचाव अभियान चला रही हैं।
चमोली सुरंग में झारखंड के कितने और किन जिलों के श्रमिक फंसे हैं?
सूचनाओं के अनुसार झारखंड के खूंटी, गुमला सहित अन्य जिलों के कुछ श्रमिकों के फंसे होने की जानकारी है। अभी तक सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
झारखंड सरकार ने चमोली हादसे पर क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर श्रमिकों की सुरक्षित वापसी का आश्वासन लिया। झारखंड सरकार ने टोल फ्री हेल्पलाइन 1800-3456-526 और व्हाट्सऐप नंबर 9470132591, 9431336472 व 9431336427 जारी किए हैं।
परिजन श्रमिकों की जानकारी कहाँ से प्राप्त कर सकते हैं?
जिन लोगों के परिजन या परिचित चमोली की परियोजना में कार्यरत हैं, वे झारखंड सरकार के कंट्रोल रूम से टोल फ्री नंबर 1800-3456-526 पर संपर्क कर सकते हैं। व्हाट्सऐप के माध्यम से 9470132591, 9431336472 और 9431336427 पर भी जानकारी साझा की जा सकती है।
उत्तराखंड में पहले भी सुरंग हादसे हो चुके हैं?
हाँ, नवंबर 2023 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की सिलक्यारा सुरंग में 41 श्रमिक 17 दिनों तक फंसे रहे थे और बाद में सुरक्षित बाहर निकाले गए थे। यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण की सुरक्षा को लेकर बार-बार सवाल उठाती रही है।
राष्ट्र प्रेस
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